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कोरोना से खत्म हो रही कुरीतियां:114 दिन से खर्चीली शादी, मृत्युभोज बंद; 60% कम हुआ शादियों का खर्च, डीजे और भव्य पार्टी पर प्रतिबंध ने रोकी फिजूलखर्ची

रायपुर24 दिन पहले
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भले ही कोरोना महामारी लोगों की परेशानियों का सबब बन गया हो, लेकिन इसने कई कुप्रथाओं पर अंकुश लगाने की राह भी खोल दी है। 19 मार्च को छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन लगने के बाद आज 114 दिन हो गए हैं, अनुमति के अभाव में प्रदेश में कहीं भी भव्य शादी समारोह नहीं हुआ है। न ही मृत्यभोज जैसे कार्यक्रम हुए। महामारी के इस संक्रमण ने लोगों को सीखा दिया है कि दशगात्र-तेरहवीं के बिना इंसान स्वर्ग जा सकता है और डीजे-पार्टी के बिना बहु घर आ सकती है। जब आज सारे कार्यक्रम सादगी से कराए जा सकते हैं तो आगे भी कराए जा सकते हैं। समाज न सिर्फ इस बात को समझ रहे हैं, बल्कि इसे अनिवार्य करने की दिशा में कदम भी बढ़ाने लगे हैं।

ब्राह्मण समाज - पहली बार यज्ञोपवीत घर पर
छत्तीसगढ़ सर्व ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष ललित मिश्रा का कहना है कि हर साल अप्रैल, मई, जून में ब्राह्मण समाज में सैकड़ों की संख्या में जनेऊ संस्कार होते थे। इस साल महामारी के चलते लोगों ने व्यक्तिगत रूप से घर पर ही सादगी से यज्ञोपवीत संस्कार करवाया। न तो बटुक बरात निकाली, न ही भिक्षा की रस्म निभाई। लोगों को समझना होगा कि समय के अनुसार परंपराएं बदलती हैं, इससे संस्कृति मिट नहीं जाती।
माहेश्वरी समाज - सोशल मीडिया पर निमंत्रण 
माहेश्वरी समाज के संगठन मंत्री राजकुमार राठी का कहना है कि लॉकडाउन के बाद से घर-घर जाकर निमंत्रण पत्र बांटने की औपचारिकता खत्म हो गई है। परिवार में शोक हो या खुशी का माहौल हो, लोग सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निमंत्रण दे रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियां भी ऐसी हैं कि  मेहमान आएं तो ठीक न आएं तो ठीक। कोई नाराज नहीं होगा। इससे फिजूलखर्ची भी रूकेगी। लोगों ने नए बदलावों को स्वीकारना शुरू कर दिया है।
सिंधी समाज - शांति बैठक अब ऑनलाइन
छत्तीसगढ़ सिंधी महापंचायत के अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी का कहना है कि समाज में मृत्यु के बाद शांति बैठक होती है। इसमें पूरा समाज एकत्रित होता है। महामारी के चलते यह परंपरा अब टूट गई है। 3 महीने में जिन परिवारों में शोक हुआ, उनके परिजनों ने ऑनलाइन शांति बैठक रखी जिसमें समाज के सदस्यों ने उन्हें सांत्वना दी। शादी की रस्मों में भी गीत, संगीत, नृत्य आदि तामझाम खत्म सा हो गया है। इससे फिजूलखर्ची भी रूकी है।

पंजाबी समाज - खुद भी सादगी से करा रहे हैं विवाह, अन्य समाजों को भी ऐसा करने के लिए लिखा पत्र 
इसी तरह छत्तीसगढ़ पंजाबी सनातन सभा ने समाज में होने वाली शादियों से फिजूलखर्ची को पूर्णत: खत्म करने की दिशा में कदम उठाए हैं। समाज के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा कि अभी सिर्फ 50 लोगों के शादी में शामिल होने की अनुमति है। पहले की तरह डीजे, बैंड-बाजास या भव्य पार्टी की अनुमति नहीं है। इससे लोगों को समझना चाहिए कि बिना खर्च के भी शादियां हो सकती हैं। दिखावे के चक्कर में लोगों ने शादियों का खर्च बढ़ाकर रखा है। पंजाबी समाज में लोगों को सादगी से शादी करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। अन्य समाजों को भी इस संबंध में पत्र लिखा है। 

अग्रवाल समाज - मृत्युभोज कराने की जगह जरूरतमंदों को खिला रहे हैं खाना
लॉकडाउन के बाद से छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के लोग तेरहवीं में समाज और पास-पड़ोस के लोगों को भोजन कराने की जगह गरीबों की मदद कर रहे हैं। समाज के जिलाध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने बताया, हमारी अपील के बाद तीन परिवारों ने अपने परिजन की तेरहवीं पर गरीबों को खाना खिलाया। समाज में अब यह परिपाटी शुरू हो चुकी है और हमारा प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे अपनाएं। इसके अलावा छट्ठी, जन्मदिन जैसे पारिवारिक कार्यक्रमों में भी फिजूलखर्ची न करने के लिए लाेगों को प्रेरित किया जा रहा है। सामाजिक कार्यक्रमों भी अब सादगी के साथ होंगे। 

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