मिलेट मिशन:कोदो, कुटकी एवं रागी का उत्पादन बढ़ाने 14 जिलाें में खर्च होंगे 170 करोड़

रायपुरएक वर्ष पहले
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सीएम बघेल की मौजूदगी में एमओयू करते जिलों के अफसर। - Dainik Bhaskar
सीएम बघेल की मौजूदगी में एमओयू करते जिलों के अफसर।
  • आईआईएमआर हैदराबाद के साथ जिला कलेक्टरों ने किया एमओयू

मिलेट मिशन के तहत इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च हैदराबाद और प्रदेश के 14 जिला कलेक्टरों ने शुक्रवार को एमओयू किया है। इसके तहत अब राज्य में कोदो-कुटकी, रागी समेत अन्य लघु धान्य फसलों का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। छत्तीसगढ़ के 20 जिलों में कोदो-कुटकी, रागी का उत्पादन होता है। इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश का मिलेट हब बनेगा।

उन्होंने कहा कि मिलेट मिशन के तहत किसानों को लघु धान्य फसलों की सही कीमत दिलाने आदान सहायता देने, खरीदी की व्यवस्था, प्रोसेसिंग और विशेषज्ञों की विशेषज्ञता का लाभ दिलाने की पहल की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कोदो, कुटकी और रागी का समर्थन मूल्य तय करने के साथ-साथ राजीव गांधी किसान न्याय योजना के दायरे में इन्हें भी शामिल किया है। इस मिलेट मिशन के आगामी 05 वर्षों के लिए 170 करोड़ 30 लाख रुपए का प्रबंधन डीएमएफ एवं अन्य माध्यमों से किए जाने का भी निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु वनोपजों की तरह लघु-धान्य-फसलों के वैल्यू एडीशन से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। कांकेर और दुर्गूकोंदल में दो प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित हो चुकी है। स्व सहायता समूहों की बहनों को इससे रोजगार मिल रहा है। कार्यक्रम में कांकेर जिले में मिलेट प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित करने के लिए अवनि आयुर्वेदा प्राइवेट लिमिटेड तथा महुआ प्रसंस्करण के लिए मेसर्स ब्रज कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड और उद्योग विभाग के मध्य एमओयू किया गया।

यह मिलेट मिशन छत्तीसगढ़ के कवर्धा, कांकेर, कोण्डागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, राजनांदगांव, सुकमा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, बलरामपुर, कोरिया, सूरजपुर और जशपुर जिले में चलेगा। हैदराबाद का यह संस्थान कोदो, कुटकी एवं रागी की उत्पादकता बढ़ाने, तकनीकी जानकारी, सीड बैंक की स्थापना के लिए सहयोग करेगा। साथ ही वह किसानों का मार्गदर्शन और उन्हें कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी करेगा।

बस्तर, सरगुजा, कवर्धा और राजनांदगांव में लघु धान्य फसलों के सीड बैंक स्थापित किए जाएंगे। इस एमआेयू कार्यक्रम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. विलास ए.तोनापी और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. दयाकर राव तथा 14 जिलों के कलेक्टर कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े। आईआईएमआर के डायरेक्टर डॉ. विलास ए.तोनापी ने कहा कि वर्ष 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट के रूप में मनाया जाएगा। मिलेट मिशन के माध्यम से वर्ष 2023 तक छत्तीसगढ़ देश में मिलेट हब के रूप में पहचान बनाने में सफल होगा।

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