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राजधानी में कोरोना:इस माह 29 हजार कम टेस्ट, इसलिए मरीज कम

रायपुरएक महीने पहले
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  • सितंबर में रोजाना औसतन 753 कोरोना के मरीज

राजधानी के लोग पिछले महीने यानी सितंबर में कोरोना की जबर्दस्त दहशत से गुजरे और अक्टूबर में केस कम होने से लोगों को खासी राहत मिली, लेकिन चिकित्सा जगत इसे अब भी मामूली राहत ही मान रहा है। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड और डाक्टरों के मुताबिक सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में राजधानी में 29 हजार टेस्ट कम हो गए। वायरस कुछ कमजोर लगता है, लेकिन कम टेस्ट होने की वजह से मरीजों की संख्या काफी कम हो गई। भास्कर की पड़ताल के मुताबिक राजधानी में सितंबर के महीने में जब कोरोना के सैंपल और जांच अधिक संख्या में लिए जा रहे थे, तब सितंबर के तीस दिन में 753 पॉजिटिव प्रतिदिन के हिसाब से 22 हजार 602 केस आए। इस दौरान 79,290 सैंपलों की जांच हुई। वहीं अक्टूबर की बात करें तो इस माह के 28 दिन में 50400 सैंपल की जांच में 7061 पाजिटिव केस निकले हैं। यानी हर दिन 252 कोरोना पॉजिटिव निकले हैं। डाक्टरों का कहना है कि प्रति 100 टेस्ट में पाजिटिव केस की संख्या निकाली जाए तो अक्टूबर में पाजिटिव केस निकलने का प्रतिशत कम रहा है। लेकिन इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि सितंबर की तुलना में अक्टूबर में 28,890 सैंपल कम लिए गए हैं। राजधानी रायपुर में रोजाना 2400 सैंपल की जांच के हिसाब से 15 से 27 सितंबर के बीच तेरह दिन में 31 हजार 200 सैंपल की जांच के मुकाबले 34 हजार 365 सैंपल का टेस्ट हुआ। जिसमें 9,270 सैंपल पॉजिटव आए। यानी औसतन हर दिन 713 मरीज इस दौरान रायपुर और उपनगरीय इलाको में निकले। जबकि अक्टूबर में पहली तारीख से 21 के बीच 2400 सैंपल प्रतिदिन के टारगेट के हिसाब से साढ़े पचास हजार सैंपलों की जांच के मुकाबले केवल 40 हजार सैंपलों का टेस्ट हो सका। इस तरह सितंबर में जहां रोजाना 2643 सैंपल जांचे गए वहीं उसके अनुपात में अक्टूबर में रोजाना 1800 सैंपल की ही जांच हो सकी है।

ग्राउंड रिपोर्ट : लोग डरते हैं कि टेस्ट होगा तो पाजिटिव निकलेंगे
भास्कर टीम ने शहर के अलग-अलग जगहों पर कोरोना जांच के लिए बनाए गए केंद्रों का दौरा किया। सितंबर में जहां कोरोना जांच के लिए लोगो की भीड़ उमड़ रही थी, उसके मुकाबले अक्टूबर में लोग जांच करवाने खुद से नहीं आ रहे हैं। जांच के लिए बैठी टीमों के मुताबिक बहुत से लोग इस भ्रम में है कि अगर जांच करवाएंगे तो वो पॉजिटिव आ सकते हैं। दिवाली का त्योहार है, पूरे सालभर कोरोना के कारण काम-धंधा बंद रहा है। त्योहार के मौके पर ही काम पटरी पर लौटने की आस भी है। ऐसे में क्वारेंटाइन होने से तो सालभर की कमाई पर असर होगा। इसलिए लोग खुद से जांच करवाने न तो कोरोना सैंपल कलेक्शन गाड़ियों के पास आ रहे हैं, और न ही केंद्र में जा रहे हैं।

"कोरोना जांच करवाने इलाज समय पर शुरू होता है और ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। जांच में लापरवाही से रिस्क ज्यादा है।"
-मीरा बघेल, सीएमएचओ रायपुर

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