दिया तले अंधेरा:जिम्मेदार ही कर रहे लापरवाही; डॉक्टर्स समेत 29 हजार हेल्थ वर्कर्स ने पहली तो 41 हजार ने नहीं ली दूसरी डोज

रायपुरएक महीने पहलेलेखक: अमिताभ अरुण दुबे
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राजधानी में नेहरू मेडिकल कॉलेज के टीकाकरण केंद्र में लोगों की संख्या घटी। - Dainik Bhaskar
राजधानी में नेहरू मेडिकल कॉलेज के टीकाकरण केंद्र में लोगों की संख्या घटी।

काेराेना काे लेकर चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान की चौंकाने वाली हकीकत। राज्य में टीकाकरण अभियान 16 जनवरी से शुरू किया गया। उसके बाद से अब तक पिछले ग्यारह माह गुजर चुके हैं, लेकिन कोरोना के बचाव और टीकाकरण अभियान में फ्रंट लाइन में होने के बावजूद 29 हजार हजार डॉक्टरों, नर्स और पैरा मेडिकल स्टाफ ने अब तक पहला टीका नहीं लगवाया है।

स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर खुद इस हकीकत के सामने आने के बाद हैरान हैं। कोरोना अभियान से 29 हजार फ्रंट लाइन वर्करों ने जहां पहली डोज नहीं ली वहीं 41 हजार ऐसे हैं, जिन्होंने दूसरा टीका नहीं लगवाया है। अब तक प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के 3.10 लाख से अधिक अफसर, डाक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ ने टीका लगवा चुका है। राज्य में टीकाकरण की रफ्तार धीमी पड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग पहली बार सरकारी अमले की लिस्ट तैयार करवा रहा है, जिससे ये पता चल सके कि कौन कौन से विभाग के कितने स्टाफ ने टीका नहीं लगवाया है।

अफसरों के अनुसार फ्रंट लाइन वर्करों में राजस्व, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, आंगनवाड़ी और स्थानीय प्रशासन विभाग के अफसर, कर्मचारी शामिल किए गए हैं। इन्हें इसलिए फ्रंट लाइन वर्कर कहा जाता है, क्योंकि वे कोरोना के रोकथाम, बचाव और टीकाकरण की सभी गतिविधि से सीधे जुड़े हैं। यही नहीं पहली डोज लगवाने के बाद दूसरा टीका लगवाने वाले भी कम नहीं हैं। इनकी संख्या भी 57 हजार से अधिक है। अब स्वास्थ्य विभाग इनकी ट्रेसिंग करने के लिए एक नया सिस्टम बना रहा है, जिसके तहत हर विभाग से टीका नहीं लगवाने वालों को सूची मांगी जा रही है। जिसमें पहला टीका नहीं लगवाने वाले और दूसरा टीका नहीं लगवाने वालों की संख्या निकाली जाएगी।

ट्रेस नहीं कर पा रहे हैं, कौन हैं चूके हुए लोग
हेल्थ वर्करों के स्टाफ में पहला या दूसरा टीका टालने वालों की चिन्हित करने का काम एक बार पहले भी किया गया। लेकिन उसके बावजूद विभाग पता नहीं लगा पाया कि ये लोग कौन हैं जो चूक रहे हैं। अब नई रणनीति के तहत डायरेक्टर स्वास्थ्य सेवाएं, डीएमई, जिला सीएमओ, अस्पतालों क्लिनिकों से एक बार फिर टीकाकरण में छूटे हुए लोगों की सूची मांगी जा रही है। टीकाकरण विभाग के अफसरों के मुताबिक इन लोगों की ट्रेसिंग में सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है क्योंकि हर जगह कलेक्टरों के जरिए फ्रंट लाइन वर्करों की सूची बनाई गई थी। संभावना है कि इनमें से अधिकतर ने दूसरा डोज भी ले लिया हो लेकिन विभाग को सूचित नहीं किया।

11 माह बाद भी 57 हजार से अधिक अफसर, फ्रंट लाइन अधिकारी-कर्मचारियों ने नहीं ली वैक्सीन की दूसरी डोज

केवल डाॅक्टर ही 2 हजार से ज्यादा
टीका नहीं लगवाने वाले फ्रंट लाइन 29 हजार से अधिक लोगों में 2 हजार से अधिक डॉक्टर हैं जिन्होंने पहला ही टीका अभी तक नहीं लगवाया है। इस साल 16 जनवरी से पूरे देश में टीकाकरण की शुरुआत फ्रंट लाइन हेल्थ वर्करों के साथ ही की गई थी। उस दौर में कोविशील्ड का दूसरा टीका भी 30 दिन में लगाया जा रहा था। प्रदेश में साढ़े 41 हजार से अधिक दूसरा डोज नहीं लेने वालों में 41 सौ से अधिक डॉक्टर ऐसे हैं जिन्होंने पहला टीका लेने के बाद सेंकेड डोज ही नहीं लिया। बहुत से डॉक्टर और हेल्थ स्टाफ निजी कारणों का हवाला देकर टीका लगाने से पीछे हटे हैं। अब तक 3.39 लाख लोगों को फ्रंट लाइन हेल्थ वर्करों की सूची में शामिल किया गया था। जिसमें सरकारी के अलावा निजी अस्पताल और क्लिनिक के हेल्थ स्टाफ को भी शामिल किया गया था।

टीका नहीं लगवाने वालों की जानकारी जुटाने ट्रेसिंग शुरू
हेल्थ स्टाफ के अंतर्गत कार्यरत लोगों में पहला या दूसरा टीका नहीं लगवाने वालों की जानकारी जुटाने के लिए एक बार फिर ट्रेसिंग शुरू की गई है। वहीं दूसरा डोज नहीं लगवाने फ्रंट लाइन वर्करों को लेकर ये संशय है कि उन्होंने टीका लगवा लिया होगा, इसके लिए विभागों से जानकारी भी मांगी जा रही है, ताकि स्पष्ट हो सकें कि कितने लोग इन दोनों श्रेणियों में चूक गए हैं।
-डॉ. विश्वनाथ भगत, राज्य टीकाकरण अधिकारी