आर्थिक संकट खड़ा हो रहा:सीमेंट ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से रोजाना 3 करोड़ का घाटा, 50 हजार नौकरी खतरे में

रायपुर15 दिन पहले
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  • हड़ताल की वजह से तीन हफ्ते से सीमेंट फैक्ट्रियों में उत्पादन बेहद कम

सीमेंट ट्रांसपोर्टरों की लगातार तीन हफ्ते से चल रही हड़ताल से राज्य सरकार को रोज 3 करोड़ राजस्व का नुकसान हो रहा है। छोटे ट्रांसपोर्टरों के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। से आम लोग परेशान हैं। कई लोगों के मकान का काम बंद हो गया है। निर्माण से इकोनॉमी चलती है। सैकड़ों मजदूरों के सामने रोजी का संकट खड़ा हो गया है।

फैक्ट्रियों और ट्रांसपोर्टरों के पास करने करने वाले 50 हजार से ज्यादा लोगों की नौकरी जाने का खतरा पैदा हो गया है। सीमेंट उद्योग का उत्पादन और बिक्री थम सी गई है। सीमेंट ट्रांसपोर्टरों की मनमानी की वजह से फैक्ट्रियों से सीमेंट की सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिन फैक्ट्रियों में सीमेंट बनकर तैयार है उसे बाजार तक पहुंचाया ही नहीं जा रहा है। इस वजह से सप्लायर अपनी मर्जी से कीमत भी बढ़ा रहे हैं। फैक्ट्री संचालकों ने सीमेंट की कीमत नहीं बढ़ाई है, लेकिन सप्लायर कम सप्लाई के बहाने से पैसे बढ़ाकर मनमाना पैसा वसूल रहे हैं। प्रोडक्शन पर असर पड़ने से सीमेंट फैक्ट्रियों से मिलने वाला टैक्स कम हो रहा है। इसका असर भविष्य में राज्य सरकार की जनकल्याण और सामाजिक योजनाओं पर भी होगा। फंड की कमी से आम लोगों को जो मदद मिलती है वो भी रुकेगी। इतना ही नहीं हड़ताल से राज्य की छबि पर भी असर पड़ रहा है।

6 माह में दूसरी बार भाड़ा बढ़ाने बड़े ट्रांसपोर्टर बना रहे दबाव
सीमेंट फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि राज्य के छोटे ट्रांसपोर्टर काम करने को तैयार हैं, लेकिन कुछ प्रभावशाली ट्रांसपोर्टर उन्हें काम करने नहीं दे रहे हैं। हड़ताल के लिए वही लोग अड़े हैं, जिनके पास एक भी गाड़ी नहीं है। छोटे ट्रांसपोर्टरों के सामने रोजी के साथ-साथ गाड़ियों की किश्त अदा करने का संकट खड़ा हो गया है। 6 महीने पहले ट्रांसपोर्टरों ने सीमेंट कंपनियों पर दबाव डालकर मालभाड़े में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी करवाई थी, लेकिन अब फिर से माल भाड़ा बढ़ाने की मांग की जा रही है। कई ट्रांसपोर्टर और वाहन मालिक पिछली बढ़ी हुई दर पर गाड़ी चलाने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करना पर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही है।

मजदूर, मिस्त्री, ड्राइवर ही नहीं ढाबों पर भी हड़ताल से संकट
सीमेंट उद्योग 10 हजार से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और करीब 1.25 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार दे रहा है। इनमें मजदूर, राजमिस्त्री, ड्राइवर, वाहन मैकेनिक, ढाबे, सीमेंट, निर्माण सामग्री का कारोबार करने वाले डीलर आदि शामिल हैं। कोरोना काल के बाद सीमेंट उद्योग धीरे-धीरे अब पटरी पर आया था, लेकिन ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल की वजह से फिर से बुरा असर शुरू हो गया है। इस संकट की वजह से 50 हजार से ज्यादा लोगों की नौकरी खतरे में है।

कंस्ट्रक्शन काम बंद होने से दूसरे राज्यों में पलायन भी शुरू
सीमेंट की कमी के चलते रायपुर समेत राज्यभर में कंस्ट्रक्शन का काम प्रभावित हो रहा है। अधिकतर जगहों पर काम बंद होने की वजह से वहां के मजदूर अब पलायन भी करने लगे हैं। प्राइवेट बिल्डर, शासकीय एजेंसियां और निजी काम कराने वाले मजदूरों को बाद में काम शुरू करने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि सीमेंट की कीमत बढ़ गई है। इसलिए मजदूरों को मजबूरी में दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है।

राज्य सरकार सुलझाए मामले को
छत्तीसगढ़ सीमेंट मेन्यूफेक्चरर एसोसिएशन के प्रवक्ता ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों, कोयला आदि की लागत बढ़ने की वजह से सीमेंट कारोबार की वित्तीय स्थिति खराब हो रही है। ऐसे में ट्रांसपोर्टरों की मांग पूरी करने में सक्षम नहीं है। मार्च 2021 में ट्रांसपोर्टरों ने माल ढुलाई में बढ़ोतरी की अनुचित मांग उठाई थी। राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद 12 प्रतिशत माल भाड़ा बढ़ाने पर सहमति थी। इसके बावजूद हड़ताल कर दी गई। सभी पदाधिकारियों ने इस मामले में राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। ट्रांसपोर्टर सीमेंट की आवक-जावक रोकने के हथकंडों को ना अपनाए इससे उत्पादन भी बंद हो जाएगा। सीमेंट की बिक्री जारी रहेगी तो कारखाने चलेंगे और नए रोजगार भी पैदा होंगे। सीमेंट उद्योग और ट्रांसपोर्टरों को मिलकर समस्या का समाधान करना चाहिए।

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