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अभी आक्सीजन का रोज 300 टन उत्पादन, जरूरत 65 टन:ऑक्सीजन बनाने 4 छोटे प्लांट को मंजूरी, मांग-सप्लाई में भी बैलेंस

रायपुर13 दिन पहले
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खाद्य एवं औषधी विभाग ने प्रदेश में 4 छोटे प्लांटों को मेडिकल ऑक्सीजन बनाने की मंजूरी दे दी है। ये चारों मिलकर हर दिन करीब 1500 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पतालों और केयर सेंटर के लिए उपलब्ध करा सकेंगे। अब हालात ये हैं कि अभी करीब 3500 से अधिक मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। इसके लिए अस्पताल और केयर सेंटरों में 56.21 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है।

जबकि प्रदेश में अभी उत्पादन क्षमता 300 टन प्रतिदिन है, यानी संकट की कोई वजह नहीं है। प्रदेश में इस साल मार्च की शुरूआत में केवल 200 मरीज ही ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। जिनको प्रतिदिन करीब 3.72 टन ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी। लेकिन दूसरी लहर में चूंकि अब ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा पड़ रही है। इसलिए ऑक्सीजन की कमी को रोकने के लिए हेल्थ विभाग भी हरकत में आ गया है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि प्रदेश में अभी राजधानी रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और बिलासपुर में ही ज्यादातर मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। रायपुर में दो बड़े मेडिकल ऑक्सीजन सप्लायर हैं जो कि रायपुर और दुर्ग जिले में ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं। अस्पतालों और केयर सेंटर में कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी न हो इसके लिए छोटे चार सप्लायर को मेडिकल ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए मंजूरी दी गई है।

15 दिन में ही 14 गुना डिमांड
इस साल 15 मार्च की स्थिति में प्रदेश में 227 मरीजों को 4.25 टन ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी। पहली लहर की पीक स्थिति में सितंबर में ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीजों की संख्या एक हजार के आसपास थी। जो कि अब बढ़कर तीन गुना से अधिक हो चुकी है। संक्रमण की इस लहर में जानकारों के मुताबिक बहुत सारे मरीजों को होम आइसोलेशन में रहते हुए सांस लेने में दिक्कत अब बहुत कॉमन हो गई है। सरकारी सप्लाई में एक जंबो सिलेंडर जिसमें करीब 7 हजार लीटर तक ऑक्सीजन होती है। उसकी कीमत 168 रुपए के आसपास है। जबकि छोटे सिलेंडर की कीमत 61.60 रुपए के करीब है।

कालाबाजारी रोकने बनीं टीमें
कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत को देखते हुए बाजार में इसकी कालाबाजारी की आशंका के मद्देनजर खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग ने प्रदेश में 100 से अधिक अमले को तैनात किया है। विभाग के आला अफसरों के मुताबिक हर दिन अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई और डिमांड की मॉनिटरिंग भी की जा रही है। सहायक औषधी नियंत्रक और ड्रग इंस्पेक्टरो की टीमें ऑक्सीजन निर्माता कंपनी के प्रोडक्शन और स्टॉक पर भी अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड रख रहे हैं इसके जरिए कालाबाजारी को रोकेंगे।

कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन की कमी न हो इसके लिए 4 निर्माता कंपनियों को मेडिकल ऑक्सीजन बनाने की अनुमति दी गई है। कालाबाजारी को रोकने प्रोडक्शन, सप्लाई, डिमांड और स्टॉक पर कड़ाई से नजर रख रहे हैं।
- केडी कुंजाम, नियंत्रक खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग

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