निर्माण कार्य की रफ्तार रुकी:नवा रायपुर में सालभर पहले बन जाने थे 4 स्टेशन, कोरोना और फंड की खींचतान से पहला ही अधूरा

रायपुर7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

नवा रायपुर में सबसे देरी इस शहर को रेल नेटवर्क से जोड़ने में हो रही है। यहां रेलवे लाइन और चार स्टेशनों को चालू का प्लान 2018 में फाइनल हुआ था। रेल प्रोजेक्ट में काम इस तरह शुरू हुआ, ताकि लगभग 20 किमी दोहरी लाइन और चार स्टेशन 2020 में पूरे कर लिए जाएं। पिछले सालभर से काम कोरोना की वजह से अटका है, लेकिन भास्कर की पड़ताल में पता चला कि लाइन और स्टेशन निर्माण को लेकर अलग-अलग एजेंसियों में फंड की खींचतान और बजट में कमी-वृद्धि ने भी इस प्रोजेक्ट को बुरी तरह लेट किया है।

हालात ये हैं कि 2020 के अंत तक चार स्टेशन बन जाने थे, लेकिन अभी एक ही स्टेशन कॉलम-बेस से ऊपर नहीं हो पाया है। रेलवे के ही जानकार मानते हैं कि सामान्य रफ्तार से काम चला और फंड की बाधा नहीं आई, तब भी इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में कम से कम दो साल लग जाएंगे।

नवा रायपुर रेल लाइन पर बनने वाले चार स्टेशनों में पहला यानी अटल नगर मंदिरहसौद से केवल 2 किमी दूर बन रहा है। इसका काम शुरू हुआ था, लेकिन फंड के अभाव में नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) ने बंद कर दिया क्योंकि शासन ने फंड 160 करोड़ से घटाकर 85 करोड़ रुपए कर दिया था, अब यह राशि भी कोरोना की वजह से रोक दी गई। पहला स्टेशन ही अधूरा है, इसलिए शेष तीन यानी सीबीडी, मुक्तांगन और उद्योग नगर स्टेशन तो नींव के स्तर पर ही अटके हैं।

एक स्टेशन पहले ही कटा
एनआरडीए ने फंड घटने की वजह से चौथे यानी मुक्तांगन स्टेशन को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। स्टेशनों को बनाने का खर्च राज्य शासन व एनआरडीए को उठाना है। चार स्टेशन राज्य को तथा पांचवां यानी केंद्री स्टेशन रेलवे को बनवाना है क्योंकि यहीं से अभनपुर और राजिम होते ही धमतरी तक नैरो गेज की जगह ब्राड गेज रेलवे लाइन बननी है।
मॉडल स्टेशन का प्लान गिरा
पांच साल पहले शासन और रेलवे में अनुबंध हुआ था कि नवा रायपुर और सीबीडी को मॉडल स्टेशन बनाया जाएगा। तय अनुबंध में एनआरडीए की तरफ से रेलवे को कुछ फंड देना था, लेकिन यह भी रुक गया है। इसलिए मॉडल स्टेशन का कांसेप्ट भी धराशायी है। एनआरडीए ने तय किया है कि स्टेशन सामान्य सुविधाओं वाले ही रहेंगे।

खबरें और भी हैं...