रायपुर में रेमडेसिविर की कालाबाजारी:900 रुपए का डोज 15 हजार में बिक रहा, 5 हजार मरीजों को चाहिए रेमडेसिविर इंजेक्शन के 30 हजार डोज, कहीं भी स्टाॅक नहीं

रायपुर6 महीने पहलेलेखक: पीलूराम साहू
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राजधानी में कोरोना के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में रेमडेसिविर इंजेक्शन है, जिसे प्राणरक्षक माना जा रहा है लेकिन यह कहीं उपलब्ध नहीं है। सरकार ने इस इंजेक्शन की सप्लाई को नियंत्रित करने की कोशिश की है, लेकिन यह अस्पतालों में ही भेजा जा रहा है।

अधिकांश निजी अस्पतालों में इस इंजेक्शन का स्टाक नहीं है और वे भी अपने यहां भर्ती मरीज के लिए पर्चा लिख रहे हैं। परिजन इसे लेकर पूरे शहर में भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें रेडक्रास से लेकर निजी दवा दुकानों में भी यह नहीं मिल रहा है।

संकट ऐसा है कि लोग 900 रुपए के एक डोज (मरीज के लिए 6 डोज जरूरी) के लिए कई मरीजों के परिजन ने 15 हजार रुपए (सभी डोज मिलाकर लगभग एक लाख रुपए) तक देकर इसका इंतजाम किया है। दवा दुकानदार कहते हैं कि इंजेक्शन आ नहीं रहा इसलिए खत्म हो गया। उधर, राजधानी दवा विक्रेता संघ के पूर्व अध्यक्ष का दावा है कि इंजेक्शन यहां आए हैं।

मेडिकल स्टोर्स का स्टाॅक चेक करें तो यह मिल जाएगा। कोरोना मरीजों के इलाज में रेमडेसिविर के लिए मारामारी जैसे हालात हैं। हालांकि सरकार की पहल के बाद दो दिनों में लगभग 10 हजार इंजेक्शन आए हैं, लेकिन पूरे अस्पतालों को सप्लाई कर दिए गए हैं। जो लोग बाजार में इंजेक्शन के लिए भटक रहे हैं, उन्हें यह नहीं मिल रहा है।

सरकार रेडक्रास व सरकारी अस्पतालों को इंजेक्शन उपलब्ध करवा रही है। भास्कर टीम मंगलवार को थोक दवा बाजार के अलावा रेडक्रास व दूसरे मेडिकल स्टोर में गई तो वहां बताया गया कि स्टाॅक नहीं है। प्रदेश में मंगलवार की स्थिति में 1 लाख से ज्यादा एक्टिव केस है। इनमें 20 से 25 फीसदी मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। 5 फीसदी मरीजों को भी गंभीर मान लें तो 5 हजार से ज्यादा का इलाज आईसीयू, एचडीयू में चल रहा है। इसमें वेंटीलेटर वाले मरीज भी शामिल हैं।

बाजार में भी इंजेक्शन मिलना जरूरी
नई व्यवस्था के तहत सरकार रेमडेसिविर इंजेक्शन अब सीधे सरकारी और निजी अस्पतालों में भेज रही है। इससे जो मार्केट से इंजेक्शन खरीदना चाहते हैं, उन्हें नहीं मिल पाएगा। रेमडेसिविर इंजेक्शन के खुले बाजार में नहीं बिकने से इसकी कालाबाजारी पर तो रोक लगेगी लेकिन अस्पतालों में भेजे जाने से यह इंजेक्शन भी पहुंचवालों को मिलने की आशंका है। इससे सामान्य मरीज तो पैसों से इसे खरीदकर लगवाने की क्षमता रखता है, उसे यह इंजेक्शन मिल पाएगा। इसे लेकर संशय की स्थिति है। इसलिए लोगों ने मांग की है इसे रिटेल में भी बेचा जाए ताकि लोगों को इसे आसानी से उपलब्ध हो सके। कई निजी अस्पताल वालों ने शिकायत की है कि उन्हें गंभीर मरीजों की तुलना में कम इंजेक्शन भेजे जा रहे हैं।

रिकाॅर्ड रखना अनिवार्य
रेमडेसिविर इंजेक्शन के इस्तेमाल के लिए आयुष मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी की थी। किन मरीजों को यह इंजेक्शन किन आपात स्थिति में दिया गया है, इसका रिकाॅर्ड अस्पताल को रखना अनिवार्य है। रिकाॅर्ड में आपात स्थिति का विवरण भी देना होगा। इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन (ईयूए) के तहत आपात स्थिति को छोड़कर यदि रेमडेसिविर का उपयोग किया गया, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अस्पताल और डॉक्टर की होगी। यही नहीं, इसके लिए फार्मासिस्ट भी जिम्मेदार होगा। जानकारों का कहना है कि प्रदेश में किसी भी मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जा रहा है, जिसके कारण इसकी कमी होने लगी है।

अब पर्याप्त स्टाक आने लगा है। इसके बावजूद लोग भटक रहे हैं। आखिर उन्हें इंजेक्शन क्यों नहीं मिल रहा है, इसकी जांच करने की जरूरत है। स्टॉक की जांच करने से पता चलेगा कि किन-किन थोक दुकानों में कितने इंजेक्शन आए हैं।
-ठाकुर राजेश्वर सिंह, थोक दवा कारोबारी

जिस मरीज को कोरोना के कारण ऑक्सीजन सेचुरेशन 85 से कम हो। ऐसे मरीजों को रेमडेसिविर का इंजेक्शन दिया जाता है। देखने में आया है कि कई मरीजों की घबराहट से ऑक्सीजन सेचुरेशन कम हो जाता है। ऐसे में स्थिति बिगड़ जाती है।
-डॉ. केके सहारे, एचओडी एनीस्थिसिया मेडिकल कॉलेज

ऑक्सीमीटर पर ऑक्सीजन का लेवल 85 से नीचे जा रहा हो तब रेमडेसिविर की जरूरत : डॉ. महेश सिन्हा
प्रदेश अध्यक्ष-आईएमए और डॉ. महेश सिन्हा ने बताया कि हर मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं है। जो गंभीर हो और जिसका आक्सीजन सेचुरेशन कम हाे, उनके लिए यह इंजेक्शन उपयाेगी है। इसके बावजूद कई झोला छाप डॉक्टर भी मरीजों से रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगवा रहे हैं। मरीज भी डॉक्टरों को फोर्स कर रहे हैं कि यही इंजेक्शन लगाया जाए। सोशल मीडिया में खबरें पढ़कर वे भी इसे रामबाण इंजेक्शन मान रहे हैं, और चाहते हैं कि किसी भी तरह यह लग जाए। कालाबाजारी करनेवाले इसी का फायदा उठा रहे हैं।

ऑक्सीमीटर में अगर कोरोना की वजह से ऑक्सीजन लेवल 85 से नीचे जा रहा हो, तब इसकी जरूरत है। जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 90 से ऊपर है, उन्हें इस इंजेक्शन के बजाय दवाइयों से अाराम मिल सकता है। इसलिए इस इंजेक्शन के दुरुपयोग रोकने की जरूरत है। सरकार ने इंजेक्शन की उपलब्धता के लिए प्रयास शुरू किए हैं। उम्मीद की जा सकती है कि अब जरूरतमंद मरीजों को इंजेक्शन मिलने में दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि जिन्हें इसकी वाकई जरूरत है, अभी वास्तव में ऐसे कई लोगों को इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है।

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