छत्तीसगढ़ में जीनोम सीक्वेंसिंग सिस्टम में ही खामी:लैब में 7 लाख सैंपल भेजने थे, लेकिन 3300 ही भेजे, ऐसे में नया वैरिएंट मिलना मुश्किल

रायपुर6 महीने पहलेलेखक: अमिताभ अरुण दुबे
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बेहद कम सैंपल भेजने से नया वैरिएंट फैलने की शुरुआत का पता चल पाना मुश्किल है। प्रतीकात्मक तस्वीर - Dainik Bhaskar
बेहद कम सैंपल भेजने से नया वैरिएंट फैलने की शुरुआत का पता चल पाना मुश्किल है। प्रतीकात्मक तस्वीर

दुनियाभर में तहलका मचा देने वाले कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के देश में दो पहले मरीज कर्नाटक में मिल गए, क्योंकि क्वारैंटाइन करने के बाद जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए उनके सैंपल तुरंत लैब भेजे गए थे। जीनोम सीक्वेंसिंग का छत्तीसगढ़ में मौजूदा सिस्टम कैसा है? भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो चौंकाने वाली अनदेखी सामने आई है। इसके मुताबिक प्रदेश में इस साल जनवरी से 15 नवंबर तक सब मिलाकर 1.40 करोड़ से अधिक कोरोना सैंपल कलेक्ट हुए, जिनकी जांच हुई।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसान इन सैंपलों में से कोरोना के नए वैरिएंट की जांच यानी जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए कम से कम 5% (7 लाख) तक सैंपल आईसीएमआर से अधिकृत प्रयोगशालाओं (जैसे विशाखापट्टनम) को भेजने थे, लेकिन केवल 3300 (0.023%) ही भेजे गए। बेहद कम सैंपल भेजने का आशय यही है कि यहां नया वैरिएंट फैलने की शुरुआत का पता चल पाना ही मुश्किल है। इतने कम सैंपल की जांच में जब तक इसका पता चलेगा। काफी लोग संक्रमित हो चुके होंगे।

जानकारों के मुताबिक यह दिक्कत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के जीनोम सीक्वेंसिंग के नियमों की वजह से भी आ रही है। केंद्र ने देशभर में नए वैरिएंट की जांच के लिए जो व्यवस्था बनाई है, उसके तहत छत्तीसगढ़ को यहां के सैंपल विशाखापट्टनम लैब में भेजने पड़ रहे हैं। यही नहीं, प्रदेश के सैंपल की जांच के लिए आंध्र प्रदेश का भी चयन किया गया है। हालांकि राज्य स्तर पर जीनोम सीक्वेंसिंग को अनुमति देने की कोशिश कई बार की गई, लेकिन नतीजा शून्य है।

इसका असर केवल कोरोना ही नहीं, दूसरी वायरल बीमारियों की रिसर्च और स्टडी, वैरिएंट की पड़ताल जैसी तमाम गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। इस साल दूसरी लहर के प्रकोप के दौरान नेहरु मेडिकल कॉलेज में जीनोम सीक्वेंसिंग लैब के लिए डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव बनाया गया है। शासन के पास इसकी फाइल भेजी जा चुकी है। अनुमति के लिए चार माह से यह फाइल लंबित है।

350 की जांच रिपोर्ट एक माह बाद भी नहीं

प्रदेश में पिछले साल 2020 में कोरोना की पहली लहर के पीक और साल खत्म होने तक 35.14 लाख से अधिक सैंपल की जांच हुई थी। इस साल जनवरी से कोरोना जांच का पैमाना बढ़ाने की कवायद शुरू हुई। दूसरी लहर के पीक में एक दिन में 70 हजार से अधिक टेस्ट हुए। कुल मिलाकर 1.40 करोड़ से अधिक टेस्ट हो चुके हैं। प्रदेश में महीने में दो बार कोरोना सैंपल जीनोम सैंपलिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। 11 माह में 3329 सैंपल भेजे गए हैं, यानी हर माह औसतन तीन सौ के आसपास। उसमें भी करीब साढ़े तीन सौ सैंपल की जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है।

एक्सपर्ट व्यू नए खतरों पर एक्शन जरूरी; डॉ अरविंद नेरल

कोरोना हो या कोई भी दूसरी वायरल बीमारी इसमें वायरस में म्यूटेशन और नए वैरिएंट की वक्त रहते पहचान बहुत ज्यादा जरूरी होती है। इसके जरिए ही प्रदेश में किसी भी विपरीत स्थिति का सामना किया जा सकता है। कोरोना के मामले में हमने पाया है कि नए वैरिएंट की जांच अगर स्थानीय स्तर पर हो जाए तो इससे काफी वक्त बचाया जा सकता है।

वहीं खतरनाक स्थिति बनने से पहले इसे रोका जा सकता है। जीनोम जांच के एडवांस सेटअप और मशीन के लिए हमने प्रस्ताव भी दिया है। केवल वैरिएंट की जांच के लिहाज से ही नहीं आगे के खतरों को रोकने के लिए रिसर्च और स्टडी के लिहाज से भी जरूरी हो चला है कि राज्य स्तर पर जीनोम सीक्वेंसिंग और टेस्टिंग के लिए एक लैब को जल्द मंजूरी मिले।

आंकड़े बता रहे हैं जीनोम सीक्वेंसिंग का सच

  • 1.40+ करोड़ सैंपल लिए नवंबर तक
  • 3329 एडवांस जांच के लिए भेजे गए
  • 0.023 फीसदी सैंपल का अनुपात
  • 0.023 फीसदी सैंपल का अनुपात

प्रदेश में 37 नए केस

राज्य में गुरुवार को कोरोना के 37 नए मामले और बढ़ गए हैं। इसमें रायपुर के 6 पॉजिटिव शामिल हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के किसी भी जिले से मौत की सूचना नहीं मिली है। इस बीच विदेश से छत्तीसगढ़ लौटे 51 मुसाफिरों की नई सूची मिल गई है। सभी यात्री 29 नवंबर के बाद देश लौटे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम अब इन सभी यात्रियों के घर पहुंचकर उनकी जांच करेगी।