पटना बम कांड में NIA का फैसला:मोदी की सभा में बम फोड़ने में 9 दोषी करार, रायपुर के उमेर और अजहरुद्दीन भी शामिल

रायपुर3 महीने पहले
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आतंकियों ने जनसभा की इस भीड़ को निशाना बनाकर कई धमाके किए थे। - Dainik Bhaskar
आतंकियों ने जनसभा की इस भीड़ को निशाना बनाकर कई धमाके किए थे।

करीब 8 साल पहले पटना में हुई नरेंद्र मोदी की चुनावी सभा में बम फोड़ने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपना फैसला सुना दिया है। बम कांड के 10 आरोपियों में से 9 को दोषी घोषित किया गया है। इनमें रायपुर के दो आतंकी उमेर और अजहरुद्दीन का नाम भी शामिल है। दोनों को छत्तीसगढ़ पुलिस ने पकड़कर NIA को सौंपा था, तबसे वे पटना की बेउर जेल में बंद हैं। अदालत एक नवम्बर को इनको सजा सुनाने वाली है।

2014 के लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान का आगाज पटना के गांधी मैदान से हुआ। 27 अक्टूबर 2013 को आयोजित सभा में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करने वाले थे। भारी भीड़ के बीच आतंकियों ने सीरियल बम धमाके किए। इसमें 6 लोगों की मौत हुई और 90 लोग घायल हुए। उसी समय पटना रेलवे जंक्शन के शौचालय में एक बम फटा। इसमें एक व्यक्ति की मौत हुई। कहा गया कि यह मानव बम था जो वीआईपी गाड़ी को निशाना बनाने की फिराक में था, लेकिन गलती से बम पहले ही एक्टिव हो गया। घटना की जांच शुरू हुई तो तार रांची से जुड़े मिले। वहां से रायपुर लिंक का पता चला और खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने राजा तालाब क्षेत्र से उमेर सिद्दीकी को गिरफ्तार किया। यहां इंडियन मुजाहिदीन और सिमी का रायपुर मॉड्यूल फूटा। पुलिस ने इनसे जुड़े कुछ और लोगों को गिरफ्तार किया। एक आतंकी अजहरुद्दीन उर्फ अजहर फरार हो चुका था। इनमें से पटना बम धमाकों में केवल इन दाेनों का हाथ मिला। उसके बाद उमेर को NIA के सुपुर्द कर दिया गया।

2019 में पकड़ा गया अजहर

छत्तीसगढ़ पुलिस फरार आतंकी अजहरुद्दीन उर्फ अजहर को ढूंढने में लगी रही। इस बीच पता चला कि वह सउदी अरब चला गया है। अक्टूबर 2019 में उसके देश लौटने की सूचना मिली। रायपुर पुलिस ने जाल बिछाकर उसे हैदराबाद हवाई अड्‌डे से गिरफ्तार किया। अजहर का परिवार रायपुर मे मोदहापारा में रहता था।

फरार आतंकियों को छिपाने और फंडिंग का काम

इस केस पर काम करने वाले एक अधिकारी ने बताया, रायपुर से पकड़े गए दोनों आतंकी दरअसल स्लिपर सेल मॉड्यूल के सदस्य थे। वे आतंकी घटना कर फरार हुए सदस्यों के छिपने में मदद करते थे। वे उनके लिए कमरा और काम का इंतजाम करते। वहीं संगठन के लिए फंडिंग की व्यवस्था भी कर रहे थे। रायपुर मॉड्यूल ने भोपाल जेल ब्रेक के बाद मुठभेड़ में मारे गए सिमी आतंकियों की भी मदद की थी।

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