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भास्कर तत्काल:5 साल में 9 प्लान, करोड़ों का स्मार्ट ड्रेन; सब जलमग्न, काॅलोनी में 30 मिनट की बारिश में ही जलविहार

रायपुर18 दिन पहले
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जलविहार कालोनी की मेन रोड देर शाम तक लबालब। केवल यही नहीं, तेलीबांधा स्थित पार्क रेसीडेंसी में भी बुधवार को बारिश का पानी घुस गया। - Dainik Bhaskar
जलविहार कालोनी की मेन रोड देर शाम तक लबालब। केवल यही नहीं, तेलीबांधा स्थित पार्क रेसीडेंसी में भी बुधवार को बारिश का पानी घुस गया।

राजधानी में तेलीबांधा तालाब से लगी जलविहार कॉलोनी बुधवार को करीब आधा घंटे की मूसलाधार बारिश में फिर कमर तक पानी में डूबी और मकानों-बंगलों में एक-एक फीट तक पानी घुस गया। राजधानी में यही ऐसी कालोनी है, जिसे डूबने से बचाने के लिए हर साल नया प्रोजेक्ट लाया जा रहा है और थोड़ी देर की तेज बारिश में सारी कवायद फिर डूब जाती है।

भास्कर की पड़ताल के मुताबिक करीब 75 एकड़ के क्षेत्र को इलाके को बारिश में डूबने से बचाने के लिए पिछले पांच साल में 9 प्लान बनाए, जिसमें से कुछ आंशिक तौर पर लागू हुए। पिछले साल स्मार्ट सिटी ने स्मार्ट ड्रेन का 4 करोड़ रुपए का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट यहां शुरू किया। इसका थोड़ा काम बचा है, लेकिन बुधवार की बारिश ने इस प्लान की भी इज्जत उतार दी है।

जिस महत्वाकांक्षी स्मार्ट ड्रेन प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, उसके तहत तेलीबांधा के निचले इलाकों को जलभराव से बचाने के लिए चार मीटर चौड़ाई का करीब एक किमी लंबा नाला बनाया जाना है। ये नाला तेलीबांधा के एसटीपी यानी सीवरेज प्लांट सिस्टम से कनेक्ट रहेगा।

पिछले साल फरवरी में स्मार्ट ड्रेन प्रोजेक्ट के पहले चरण के लिए करीब ढाई करोड़ के काम का टेंडर निकलना था, लेकिन कोरोना में मंजूरी अटक गई। पिछले साल जून में टेंडर निकला, बारिश के बाद काम भी शुरू हुआ, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

बजट पांच से घटाकर किया- 4 करोड़, छह माह में बनना था लेकिन अब तक अधूरा

स्मार्ट सिटी ने इस साल की शुरूआत में स्मार्ट ड्रेन प्रोजेक्ट का बजट 5 करोड़ से घटाकर 4 करोड़ किया और दूसरे चरण के काम को भी मंजूरी दे दी। स्मार्ट सिटी ने अप्रैल मई में लॉकडाउन के दौरान किसी भी प्रोजेक्ट पर निर्माण नहीं रोका। लेकिन इसका काम एजेंसी ने मजदूर नहीं होने का हवाला देकर बंद कर दिया।

बाद में काम शुरू भी हुआ तो मजदूर कम लगाए गए। इससे काम गति नहीं पकड़ सका। दो चरणों के इस काम में पहले चरण में श्यामनगर, सुभाष नगर, जलविहार कॉलोनी और तेलीबांधा के करीब 75 एकड़ के अलग अलग हिस्से में छोटी नालियों की चैन बनाने थी।

उसके बाद तेलीबांधा तालाब में श्यामनगर, जलविहार और आसपास की बसाहट की नालियों का गंदा पानी न जाए, इसके लिए तालाब के समानांतर जमीन में साढ़े 8 फीट गहराई में पाइप के जरिए गंदे पानी की निकासी का सिस्टम बनकर तैयार होना था।

  • एजेंसी ने कहा था कि समय पर काम कर देंगे। काम में देरी और अड़चन के लिए निगम कमिश्नर और स्मार्ट सिटी के एमडी को शिकायत भी कर चुका हूं, लेकिन मदद नहीं मिली। - अजीत कुकरेजा, पार्षद, मदर टेरेसा वार्ड
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