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बाढ़ का पॉजिटिव इफेक्ट:अक्टूबर में 90 लाख यूनिट बिजली बनी, बांगों बांध में पहली बार इतना उत्पादन; पिछली बार 82 लाख यूनिट था

रायपुरएक महीने पहले
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सितम्बर में आई बाढ़ के बाद बांगों बांध के गेट खोल दिए गए थे। - Dainik Bhaskar
सितम्बर में आई बाढ़ के बाद बांगों बांध के गेट खोल दिए गए थे।

सितंबर महीने में छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्से में आई बाढ़ का सकारात्मक असर अब दिख रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के हसदेव बांगो जल विद्युत गृह ने अक्टूबर महीने में 90 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया है। बताया जा रहा है, बांध बनने के बाद यह एक महीने में सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन है।

अधिकारियों ने बताया, बांगो हाइडल प्लांट का अक्टूबर में मासिक बिजली उत्पादन 101 फीसदी कैपेसिटी यूटीलाइजेशन फैक्टर रहा। बारिश के मौसम में बांगो बांध में जल भराव होने के बाद हाइडल प्लांट के जरिए लगातार पानी छोड़ा जा रहा था। वर्तमान में भी प्लांट की तीनों इकाइयों से विद्युत उत्पादन हो रहा है। पावर जनरेशन कंपनी के बांगो जल विद्युत गृह की कुल उत्पादन क्षमता 120 मेगावॉट है।

इसमें 40-40 मेगावॉट की तीन इकाइयां काम कर रही हैं। कोरबा के माचाडोली गांव में हसदेव और बांगो नदियों पर हसदेव बांगो जल विद्युत परियोजना का निर्माण 1984 में हुआ। साल 1994-95 से यहां बिजली का उत्पादन हो रहा है। बरसात के चार महीने में यह जल विद्युत परियोजना पूरी क्षमता से काम करती हैं।

पिछले साल 87 लाख यूनिट बिजली उत्पादन सर्वाधिक था
अधिकारियों ने बताया कि बांगो हाइडल प्लांट द्वारा अगस्त 2020 में 88 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया था। यह तब तक का सर्वाधिक उत्पादन रिकॉर्ड था। पिछले साल अगस्त में 98 प्रतिशत सीयूएफ रहा था। साल 2011 के अक्टूबर में इस परियोजना से 82.611 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ था।

यहां भी पन बिजली परियोजनाएं
छत्तीसगढ़ में रुद्री बैराज, सिकासारा डैम और गंगरेल डैम में भी पन बिजली परियोजनाएं संचालित हैं। हालांकि, इनका आकार बहुत छोटा है। सरकार बस्तर में बोध घाट परियोजना की भी योजना बना रही है। अब यह पन बिजली परियोजना न रहकर सिंचाई परियोजना के तौर पर विकसित की जानी है।

इससे राज्य की जनता को प्रत्यक्ष फायदा नहीं है. उत्पादन अधिक होने से विद्युत उत्पादन और ट्रेडिंग कंपनी की आय बढेगी. इससे घाटा पटेगा और उपभोक्ता पर दबाव बढ़ने की संभावना कम हो जाएगी। पन बिजली का उत्पादन पर्यावरण के लिहाज से अच्छा है और ताप बिजली की तुलना में सस्ता भी तो दूसरी परियोजनाओं का भी रास्ता बनेगा।