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फैक्ट्री से डरा है बलौदाबाजार का एक गांव:ग्राम सभा ने रद्द कर दी प्लांट को दी NOC, प्रशासन काम रुकवाने को तैयार नहीं

रायपुर7 महीने पहले
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प्लांट काम नहीं रुकने से नाराज ग्रामीण आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री से भी मिलने की कोशिश में हैं। - Dainik Bhaskar
प्लांट काम नहीं रुकने से नाराज ग्रामीण आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री से भी मिलने की कोशिश में हैं।

राजधानी रायपुर से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर नेशनल हाईवे के किनारे बसा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का गांव चौरेंगा फैक्ट्री से डरा हुआ है। उनको आशंका है कि उनके गांव में फैक्ट्री लगने से प्रदूषण बढ़ेगा। मनमुटाव बढ़ेगा और गांव की शांति हमेशा के लिए छिन जाएगी। इस गांव में दो बड़े उद्योग प्रस्तावित हैं। एक सोलर पावर प्लांट को ग्राम पंचायत ने चुपचाप अनुमति दे दी थी। जानकारी हुई तो ग्राम सभा की बैठक बुलाकर पूरे गांव ने वह NOC ही रद्द कर दिया।

गांव के जोगी दास मानिकपुरी बताते हैं कि इस साल की शुरुआत में कृष्णा आयरन स्ट्रिप्स एंड ट्यूब्स प्राइवेट लिमिटेड ने उनके गांव में एक सोलर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया। मार्च में सरपंच ज्ञानेश्वरी वासुदेव आदि ने ग्राम पंचायत की ओर से कंपनी को अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। उसके बाद वहां प्लांट का काम तेजी से चालू हो गया। इसकी जानकारी हुई ताे गांव में विरोध शुरू हो गया। 29 जून को सरपंच की अध्यक्षता में ग्राम सभा की बैठक हुई। बड़ी संख्या में लोग इस बैठक में शामिल हुए। इस दौरान सर्व सम्मति से सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए दी गई अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) को रद्द करने का फैसला हुआ। ग्राम सभा ने यह भी प्रस्ताव पारित किया कि उस जमीन पर किसी प्रकार का उद्योग अथवा उपकरण नहीं लगना चाहिए।

इस प्रस्ताव की जानकारी लेकर पूर्व सरपंच गणेश राम वर्मा और रामू वर्मा प्लांट की साइट पर गए। वहां काम करा रहे कंपनी के प्रतिनिधियों को बताया कि ग्राम सभा ने विरोध में प्रस्ताव पारित किया है। आप लोग काम रोक दो। इस बात पर कंपनी की ओर से दोनों बुजुर्गों के खिलाफ प्रशासनिक अफसरों से शिकायत की। बाद में पुलिस ने 85 साल के गणेश राम वर्मा और 75 साल के रामू वर्मा को थाने बुलाकर कार्रवाई की धमकी दी। ग्रामीणों ने स्थानीय थाने से कलेक्टर कार्यालय तक सबको ग्राम सभा का प्रस्ताव सौंपकर फैक्ट्री का काम बंद कराने की अर्जी लगाई लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा है। नदी-घाटी मोर्चा के संयोजक गौतम बंद्योपाध्याय बताते हैं, चौरेंगा वह गांव है जहां से उठे विरोध की वजह से राज्य सरकार को स्पंज आयरन से जुड़ी नीति बदलनी पड़ी। अब जब ग्राम सभा खुली बैठक में प्रस्ताव पारित कर रही है कि उन्हें प्लांट नहीं चाहिए तो सरकार को भी जिद नहीं करनी चाहिए। इससे गांव की शांति प्रभावित होने का डर बढ़ जाएगा।

सोलर पावर प्लांट लगाने वाली कंपनी ने ढांचा खड़ा करने के लिए गांव के 60-70 साल पुराने पेड़ काट डाले हैं।
सोलर पावर प्लांट लगाने वाली कंपनी ने ढांचा खड़ा करने के लिए गांव के 60-70 साल पुराने पेड़ काट डाले हैं।

एक स्पंज आयरन कंपनी भी लाइन में

यहां एक और स्पंज आयरन कंपनी भी अपना प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। बालाजी स्पंज एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड नाम की इस कंपनी को गांव में 43 एकड़ जमीन चाहिए। कंपनी ने ग्राम पंचायत को आवेदन देकर NOC मांगी है। ग्राम पंचायत ने ऐसा नहीं किया तो कंपनी प्रशासन पर दबाव बना रही है। राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र लिखकर कंपनी की मदद को कह रहा है।

ग्रामीणों ने कहा-हमें गांव की जमीन पर नहीं चाहिए उद्योग

जिले में सभी को आवेदन देकर थक चुके ग्रामीण गुरुवार को राजधानी पहुंचे थे। यहां राजकुमार मानिकपुरी, सनत कुमार, भुवनलाल वर्मा, डामन सिंह वर्मा, आत्माराम ध्रुव, रवि वर्मा, गोलू वर्मा जैसे ग्रामीणों से बात हुई। उनका कहना था, प्रदेश में बहुत जमीन खाली है। सरकार दूसरी जमीनों पर उद्योग लगाए। उनको अपने गांव की जमीन पर कोई उद्योग नहीं चाहिए। गांव के राजकुमार मानिकपुरी अखबार की एक कतरन दिखाकर कहते हैं कि मुख्यमंत्री जी ने कहा था, ग्राम सभा की सहमति के बिना उद्योग नहीं लगेगा। हमारी ग्राम सभा ने भी कह दिया, उसके बाद भी प्लांट का काम बंद क्यों नहीं हो रहा है।

इस वजह से डर रहा है गांव

पूर्व सरपंच गणेश राम वर्मा बताते हैं कि उनके गांव में एक स्पंज आयरन फैक्ट्री थी। गांव का पूरा वातावरण खराब हो चुका था। साल 2003-04 में उसके खिलाफ वहां बड़ा आंदोलन हुआ। कंपनी ने ऐसा माहौल बना दिया कि गांव में दो युवकों की हत्या हो गई। गांव के 40 लोगों को जेल जाना पड़ा। वे सात साल बाद छूटे। जेल जाने वालों में 23 महिलाएं शामिल हैं। उसके बाद से ही गांव किसी भी तरह के प्लांट के खिलाफ है। 2004 में जब गणेश राम वर्मा सरपंच थे तो ग्राम सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर संकल्प लिया था कि उनके यहां कोई प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा। ग्रामीणों को डर है कि सोलर पॉवर प्लांट खुल गया तो एक-एक कर उसके आसपास स्पंज आयरन जैसे प्रदूषणकारी उद्योग भी आ जाएंगे।

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