फूटा था नेटवर्क:आतंकी संगठनों को फंडिंग करने का आरोपी 8 साल बाद बंगाल में गिरफ्तार

रायपुरएक महीने पहले
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आंतकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन और सिमी के सदस्यों को पाकिस्तान से आने वाला फंड पहुंचाने वाला फरार आरोपी राजू खान 8 साल बाद बंगाल में पकड़ा गया है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर मंगलवार को रायपुर लाया गया है। आरोपी का कनेक्शन टेरर फंडिंग में सजा काट रहे धीरज साव है। धीरज साव ही राजू के खाते में रायपुर से पैसा ट्रासंफर करता था। उसके बाद राजू दूसरों तक पहुंचाता था। राजू का कनेक्शन पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से है। वह कई बार विदेश भी गया है। राजू केंद्र सरकार के उपक्रम दुर्गा स्टील प्लांट में सरकारी नौकरी पर था।

धीरज के पकड़े जाने के बाद उसने अचानक वीआरएस लिया और गायब हो गया। फरारी के दौरान वह कई बार रायपुर भी आया था। रायपुर कोर्ट ने 13 दिन पहले टेरर फंडिंग के इसी केस के आरोपियों को 10-10 साल की सजा दी है। कोर्ट ने ही राजू को वांटेड घोषित किया था। उसी के बाद पुलिस ने राजू की तलाश शुरू की। क्लू मिलने के बाद रायपुर पुलिस और एटीएस ने छापा मारकर राजू को पकड़ा। एडिशनल एसपी तारकेश्वर पटेल ने बताया कि टेरर फंडिंग के इस केस में सबसे पहले खमतराई निवासी 21 वर्षीय धीरज साव की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस ने उसे 25 अक्टूबर 2013 को गिरफ्तार किया था।

खमतराई में अंडा ठेला लगाता था। उसका कनेक्शन पाकिस्तान के मोहम्मद खालिद से था। खालिद उसके खाते में आतंकियों तक पहुंचाने के लिए पैसा जमा करता था। अक्सर दोनों के बीच फोन पर बातचीत होती थी। खालिद पाक के आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है। पुलिस को खालिद और धीरज के बीच बातचीत का कई रिकॉर्ड मिला। खालिद के कहने पर धीरज कर्नाटक मेंगलोर के जुबेर हुसैन उसकी पत्नी आयशा, बिहार के पप्पू मंडल और बंगाल दुर्गापुर के राजू खान (56) खाते में पैसा जमा करता था। पुलिस ने छापा मारकर धीरज के बाद जुबेर और आयशा को गिरफ्तार किया। फिर बिहार से पप्पू को पकड़ा। राजू को पुलिस ने काफी दिनों तक तलाश किया। कई जगह छापेमारी की, लेकिन वह नहीं मिला। वह मोबाइल बंद करके गायब हो गया। तब से वह फरार था। पुलिस ने उसे सर्विलांस में रखा था।

12 साल पहले आरोपी ने छोड़ दी नौकरी
राजू खान मूलत: बिहार का रहने वाला है। उसके दादा स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उपक्रम दुर्गापुर में नौकरी करते थे। उसी समय से उसका परिवार दुर्गापुर बंगाल में बस गया। राजू की भी वहां नौकरी लग गई। राजू ने वहां अपना घर बना लिया। राजू के दो बेटे है। 2013 में राजू का नाम टेरर फंडिंग में आया तो उसने फैक्ट्री जाना बंद कर दिया। उसने वीआरएस ले लिया, जबकि उसकी 12 साल की नौकरी बाकी थी। वह घर वालों से अलग रहने लगा। हालांकि फरारी के दौरान कई बार वह रायपुर आया है। 4 माह पहले भी वह रायपुर और बिलासपुर पहुंचा। कुछ लोगों से उसने मुलाकात की है। पुलिस ने राजू से मिलने वालों की तलाश शुरू कर दी है। राजू से छत्तीसगढ़ वालों का कनेक्शन क्या था? पुलिस पता कर रही है।

कश्मीर में की शादी, कई बार विदेश दौरा
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि राजू ने कश्मीर में शादी की है। राजू के ससुराल वाले अभी भी कश्मीर में रहते हैं। राजू ने कई बार विदेश दौरा किया है। वह पाकिस्तानी खालिद से भी सीधे संपर्क में था। 2013 में राजू ने जितना खाता खोला था, सभी को बंद कर दिया है। उसने पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक में नया खाता खोला है। पुलिस ने दोनों खातों को सीज कर लिया है। बैंक से ट्रांजेक्शन के संबंध में जानकारी मांगी गई। पासपोर्ट ऑफिस से विदेश दौरा की हिस्ट्री मांगी गई है।

खमतराई के बैंक से 17 हजार का ट्रांजेक्शन
पुलिस को 8 साल पहले धीरज के घर से राजू के नाम की एक पर्ची मिली थी। धीरज ने अक्टूबर 2013 में खमतराई के स्टेट बैंक से राजू के खाते में 17 हजार रुपए जमा किए थे। धीरज ने अलग-अलग किश्त में 2 लाख का ट्रांजेक्शन किया था। हालांकि उस खाते में 8 साल में एक भी लेन-देन नहीं हुआ है। खाता बंद कर दिया गया है।

3 और आरोपियों की तलाश : टेरर फंडिंग में तीन और व्यक्तियों का नाम सामने आया है, जो पिछले 8 साल से गायब है। तीनों राज्य के बाहर के हैं। उनका धीरज और राजू से सीधा संपर्क में था।

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