होम आइसोलेशन:दस दिन बाद घर से बाहर आ सकते हैं मरीज, टेस्ट करवाने की जरूरत भी नहीं

रायपुर6 महीने पहले
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वर्मा परिवार। - Dainik Bhaskar
वर्मा परिवार।
  • गाइडलाइन में बदलाव, हल्के लक्षण वाले मरीजों को राहत

होम आइसोलेशन में इलाज करवाने वाले हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए राहत की खबर है। अब होम आइसोलेशन यानी घर में रहकर कोरोना इलाज करवा रहे मरीजों को एकांत में ज्यादा दिन नहीं रहना होगा। ऐसे मरीजों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक अब घर में इलाज करवाने वाले मरीज को 17 नहीं केवल 10 दिन तक पूरा ट्रीटमेंट लेने के बाद घर के बाहर निकल सकेंगे। यही नहीं दस दिन तक इलाज करवाने के बाद उन्हें दोबारा टेस्ट भी नहीं करवाना होगा।

कोरोना की पुरानी गाइड लाइन के अनुसार होम आइसोलेशन लेने वाले मरीजों को 17 दिन अकेले रहना पड़ता था। उसके बाद भी दोबारा टेस्ट करवाकर निगेटिव रिपोर्ट लेनी पड़ती थी। इस नियम में बेहद कम वायरल लोड वाले मरीजों को भी गाइडलाइन के अनुसार 17 दिन परिवार से अलग-थलग रहना पड़ता था। आमतौर पर ऐसे मरीज 6-7 दिन में बिलकुल स्वस्थ्य हो जाते हैं, लेकिन गाइडलाइन के मुताबिक उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। इस वजह से वे बाहर नहीं आ पाते थे।

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार होम आइसोलेशन के मरीजों के लिए जारी नई गाइडलाइन में घर में रहकर इलाज करवा रहे किसी भी मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगवाने की भी जरूरत नहीं है। पिछले साल केंद्रीय मंत्रालय ने जुलाई में होम आइसोलेशन की गाइडलाइन जारी की थी। उसी गाइडलाइन में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बदलाव किया गया है। गाइडलाइन के मुताबिक बगैर लक्षण वाले रोगियों को बुखार, कफ, खांसी, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, थकान जैसी शिकायतें रहती है। आमतौर पर विशेषज्ञ इसे बेहद सामान्य और कम वायरल लोड वाला कोरोना मानते हैं। खुश्बू और स्वाद का चला जाना भी इसी श्रेणी में आता है।

देखभाल वाले को 3 लेयर का मास्क जरूरी

कोरोना की नई गाइडलाइन में कहा गया है कि होम आइसोलेशन के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं हो सकता। यानी कोई मरीज चाहे कि वह रेमडेसिवर इंजेक्शन लगवा ले तो इसकी अनुमति नहीं मिलेगी। इसके साथ ही यह जानकारी दी गयी है कि ऐसे रोगी जिनका अंग प्रत्यारोपण हुआ हो, एचआईवी ग्रसित हों या फिर कैंसर थेरेपी का कोर्स पूरा हो चुका है उन्हें होम आइसोलेशन में नहीं रखा जाना चाहिए। घर पर मरीज की देखभाल करने वाले व उनके संपर्क में आने वाले सभी लोगों को तीन लेयर वाले मास्क का इस्तेमाल करना जरूरी। बाहरी व्यक्ति को अपने घर में बिल्कुल न बुलाएं। इमरजेंसी होने पर सेनेटाइज करने के बाद ही एंट्री दें।

घर में परिवार से दूरी जरूरी

गाइडलाइन में कोरोना मरीज को घर के एक कमरे में रहने तथा विशेषतौर पर परिवार में मौजूद गंभीर रोगों से ग्रसित लोगों से दूरी बनाकर रहने के लिए कहा गया है। साथ ही कमरे में पर्याप्त फ्रेश हवा आनी चाहिए। इसके लिए वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखने की सलाह दी गयी है। कमरे में देखभाल करने वाले और मरीज दोनों को तीन लेयर के मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी गयी है. साथ ही अधिकतम आठ घंटे तक ही एक मास्क का इस्तेमाल करने की बात कही गयी है। मास्क के गीला होने पर उसे तुरंत बदलने के लिए भी कहा गया है। देखभाल करने वाले को मरीज से दूरी, गाइडलाइन में मास्क एवं अन्य चीजों के सुरक्षित डिस्पोजल की भी सलाह दी गयी है।

डॉक्टरी सलाह पर ही होम आइसोलेशन

स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइन में कहा गया है कि केवल डॉक्टरों की सलाह पर ही कोई भी कोरोना मरीज होम आइसोलेशन ले सकता है। डाक्टर की सलाह के बाद निर्धारित अधिकारियों द्वारा जांच के बाद होम आइसोलेशन की अनुमति दी जाएगी। गाइडलाइन के अनुसार होम आइसोलेशन में रहकर इलाज करवाने वाले मरीज को शरीर के तापमान, ऑक्सीजन लेवल आदि की जानकारी नियमित रूप से स्वास्थ्य विभाग के कोरोना कंट्रोल रूम को देनी होगी। ऐसे कोरोना मरीज जिनकी उम्र 60 साल से अधिक है और हाइपरटेंशन, डायबिटीज, लीवर, किडनी या कोई और गंभीर बीमारी है उन्हें भी डॉक्टरों की सलाह के बाद ही होम आइसोलेशन लेने की अनुमति मिल सकती है।

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