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सर्वदलीय बैठक में टूटा लॉकडाउन प्रोटोकॉल:राजनीतिक दलों की बैठक जूम पर होनी थी, तकनीकी कारण बताकर सभी को रायपुर जिला पंचायत सभागार बुला लिया गया

रायपुर8 महीने पहले
कोरोना काल में हो रही पहली सर्वदलीय में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को जिला पंचायत के बैठक कक्ष में इस तरह बिठाया गया। उसी दौरान सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को भी उसमें बिठा लिया गया। एक साथ करीब 60 लोग मौजूद रहे। उनके बीच सेनिटाइजर की एक बोतल रखी गई थी।

छत्तीसगढ़ में बढ़ते कोरोना को कंट्रोल करने के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में ही कोरोना प्रोटोकॉल टूट गए। दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से बुलाई गई बैठक वर्चुअली होनी थी। लेकिन, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को रायपुर जिला पंचायत के सभागार में बुलाया गया। यहां से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये राज्यपाल और मुख्यमंत्री से उनकी बात हुई। बैठक के दौरान राज्यपाल राजभवन और मुख्यमंत्री CM हाउस के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में बैठे हुये थे। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम कोण्डागांव के NIC कक्ष में बैठे थे। इस बात को लेकर राजनीतिक दलों ने नाराजगी भी जताई।

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा, ‘कल हम लोगों को बताया गया कि जूम एप के जरिए वर्चुअल बैठक होगी। आज 12 बजे बताया गया कि जूम का जो पासवर्ड है वह रिसेट हो गया है इसलिये जूम में मीटिंग नहीं हो सकती। आज जितने भी दलों के नेताओं को यहां बुलाया गया, उन्हें अनावश्यक रूप से संक्रमण के खतरे में डाला गया है।’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने घर में बैठे हैं। राज्यपाल राजभवन में हैं तो फिर हम लोगों को क्यों बाहर लाया गया? छत्तीसगढ़ में यह जो दोहरी नीति चल रही है वह स्थिति को भयावह बना रहा है।’ दूसरे राजनीतिक दलों ने भी इस तरह अचानक उन्हें जिला पंचायत भवन बुलाने पर आपत्ति जताई है। भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि सरकार ने यह सर्वदलीय बैठक केवल औपचारिकता के लिए बुलाई थी। इसमें दिए गए सुझावों पर सरकार क्या करेगी मुख्यमंत्री ने यह नहीं बताया?

स्वास्थ्य मंत्री की अनुपस्थिति पर भी उठे सवाल
भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने बैठक में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठा दिए। शर्मा ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार एकजुट है यह संदेश जनता के बीच जाना चाहिए। दुर्भाग्य से इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री को ही नहीं बुलाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री को मुख्यमंत्री को पत्र लिखना पड़ता है। यह समाचार में छपता है। पत्र की बजाय संवाद करेंगे तो बेहतर परिणाम होगा।

मुख्यमंत्री और राज्यपाल अपने निवास कार्यालयों के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष से ही बैठक में शामिल हुये।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल अपने निवास कार्यालयों के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष से ही बैठक में शामिल हुये।

मुख्यमंत्री ने सरकार की कोशिशों की जानकारी दी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना के नियंत्रण और इलाज के लिए सरकार की ओर से की जा रही कोशिशों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, प्रदेश में ऑक्सीजन की कोई कमी नही है। राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश के प्लांट में उत्पादित होने वाली 80 प्रतिशत ऑक्सीजन का उपयोग छत्तीसगढ़ में ही हो। मुख्यमंत्री ने बताया, RTPCR और ट्रू नॉट लैब की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। RTPCR टेस्ट के लिए वर्तमान में 7 सरकारी और 5 निजी क्षेत्र में लैब हैं। इसी तरह 31 सरकारी ट्रू नॉट लैब और 5 लैब निजी क्षेत्र में हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में 815 वेन्टीलेटर उपलब्ध हैं। प्रदेश में सामान्य, ऑक्सीजनयुक्त और ICU बिस्तरों की संख्या भी बढ़ी है। मेडिकल स्टॉफ की भर्ती की जा रही है। साथ ही सभी जिलों को कोविड प्रबंधन के लिए लगातार राशि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए रायपुर के मेकाहारा में काउंटर शुरू किया जा रहा है। इस इंजेक्शन की सुचारू आपूर्ति के लिए महाराष्ट्र और हैदराबाद वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है।

राज्यपाल बोलीं, अकेली राज्य सरकार का बीमारी से निपटना कठिन होगा

राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा, प्रदेश में कोरोना गंभीर स्थिति में है। हमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कार्य करना होगा। इसमें राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आम जनता को जागरूक कर मोटिवेटर की भूमिका निभा सकते हैं। वे गरीबों को राशन पहुंचाने तथा उन्हें इस बीमारी के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। राज्यपाल ने कहा, अकेली राज्य सरकार के लिए कोरोना महामारी से निपटना काफी कठिन है। इस महामारी से निपटना हम सब का सामूहिक दायित्व और कर्तव्य है।

राज्यपाल ने सरकार को आवश्यक संसाधन जुटाकर मंत्रियों-सचिवों के समन्वय से काम करने का भी निर्देश दिया है।
राज्यपाल ने सरकार को आवश्यक संसाधन जुटाकर मंत्रियों-सचिवों के समन्वय से काम करने का भी निर्देश दिया है।

भाजपा ने इस तरह के सुझाव दिए
भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सुविधाओं की कमी का मामला उठाया। उनका सुझाव था कि सरकार को जितनी जल्दी हो सके ऑक्सीजन युक्त बेड और वेंटिलेटर की संख्या बढ़ानी चाहिए। जांच में तेजी लानी चाहिये। भाजपा नेताओं ने पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती करने का भी सुझाव दिया। भाजपा नेताओं ने स्वास्थ्य कर्मियों की सुविधा बढ़ाने की मांग की।

जनता कांग्रेस ने कोविड उपचार केंद्र का प्रस्ताव दिया
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की ओर से अमित जाेगी ने लंबा सुझाव रखा। उन्होंने रायपुर में एक कोविड उपचार केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव किया। उन्होंने कहा कि सरकार अगर पांच हेक्टेयर जमीन और आर्थिक अनुदान देती है तो जनता कांग्रेस अपने संस्थापक अजीत जोगी की स्मृति में अस्पताल का एक प्रोटोटाइप मॉडल स्थापित करने का भरसक प्रयास करेगा। अमित जोगी ने क्रिकेट और हॉकी स्टेडियम को भी अस्पताल बनाने का सुझाव दिया।

कांग्रेस ने कहा, यह राजनीति का समय नहीं
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा, यह वक्त राजनीति करने का नही है बल्कि लोगो की सेवा करने का है। उन्होंने कहा कि हमने अपनी पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को लोगों की मदद करने को एवं शासन प्रशासन से सहयोग करने को पहले ही कहा है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कांग्रेस कार्यालयों को क्वॉरेंटीन सेंटर एवं आइसोलेशन सेंटर के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी जरूरतमंदों की मदद की जाएगी।

इन दलों ने भी रखे सुझाव

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नीलकंठ त्रिपाठी ने ऑक्सीजन की कमी, निजी अस्पतालों द्वारा उपचार में अत्यधिक शुल्क लेने जैसी समस्याएं उठाई। शिवसेना के धनंजय परिहार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग की जागरुकता पर जोर दिया। माकपा के धर्मराज महापात्र ने पीएम केयर फण्ड से विशेष राहत की मांग की। गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी के फरीद मोहम्मद कुरैशी और समाजवादी पार्टी की वंदना साहू ने भी सुझाव दिए।

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