‘गगन’ पर बीएसपी, ‘मंगल’ की उम्मीद:गगनयान के साथ मंगलयान-2 में भी लगेगी बीएसपी में बनी स्पेशल प्लेट

भिलाई10 महीने पहलेलेखक: उमेश निवल
  • कॉपी लिंक
भिलाई स्टील प्लांट में गगनयान के लिए ढलती प्लेट - Dainik Bhaskar
भिलाई स्टील प्लांट में गगनयान के लिए ढलती प्लेट
  • 2024 में इसरो द्वारा लांच होगा मंगलयान
  • 440 टन प्लेट अब तक मंगलयान के लिए रोलिंग
  • 03 गगनयान के लिए भी मिला है प्रोजेक्ट

गगनयान मिशन के साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना मंगलयान मिशन पर भी काम कर रहा है। इस मिशन के तहत मंगलयान-2 2024 को लांच किए जाने की योजना है। इसके लिए भी अन्य मिशन की तरह स्पेशल प्लेट मिधानि ही उपलब्ध कराएगा। जिसके लिए प्लेट रोलिंग का काम बीएसपी में किया जाता है।

पीएसएलवी के बाहरी मोटर आवरण और इसरो के जीएसएलवी सेटेलाइट प्रक्षेपण वाहनों में लगने वाले स्पेशल ग्रेड की प्लेट का स्लैब मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानि) द्वारा तैयार किया जाता है। इसमें चंद्रयान प्रक्षेपण के लिए उपयोग किए जाने वाले एसएलवी भी शामिल है।

मिधानि अपने स्लैब को बीएसपी के प्लेट मिल में रोल करवाता है। क्योंकि प्लेट की मोटाई महज 9.3 एमएम होती है। इतनी पतली प्लेट शुरू से अंत तक एक ही साइज में हो यह बड़ी चुनौती होती है। मिधानि की इस डिमांड को बीएसपी बीते 12 वर्षों से पूरा करते आ रहा है। यही वजह है कि इसरो के सेटेलाइट से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए उसका बीएसपी पर भरोसा कायम हो चुका है।

स्पेशल प्लेट के लिए बीएसपी ही क्यों चुना गया

बीएसपी की प्लेट मिल में 8 एमएम से लेकर 120 एमएम मोटाई की प्लेट रोल की जा सकती है। मिल में अब तक 9 लाख 50 हजार टन प्लेट की रोलिंग की जा चुकी है। इसलिए जब भी इसरों के लिए स्पेशल प्लेट की डिमांड होती है, रोलिंग के लिए उसकी प्राथमिकता बीएसपी ही होता है।

009 से की जा रही स्पेशल प्लेट की सप्लाई

अक्टूबर 2009 में 20 टन प्लेटों की रोलिंग की गई। उसके बाद से नियमित रूप से बीएसपी के प्लेट मिल द्वारा एमडीएन-250 स्लैब्स की रोलिंग की जा रही है। इन प्लेटों का उपयोग विभिन्न सेटेलाइट लांच यान में किया जाता रहा है।अब तक बीएसपी में 440 टन प्लेट की रोलिंग हो चुकी है।

स्पेशल प्लेट की खासियत, जिसे भिलाई स्टील प्लांट बना रहा है गगनयान व मंगलयान के लिए

  • सेटेलाइट में इस्तेमाल किए जाने वाले स्पेशल ग्रेड की प्लेट उच्च ताप सहने की क्षमता रखते हैं।
  • स्पेशल प्लेट की मोटाई महज 9.3 एमएम होने के बावजूद उच्च तापमान को झेलने में सक्षम होता है।
  • स्लैब्स के रिहीटिंग से लेकर रोलिंग तक कड़े तकनीकी मापदंडों का अनुपालन किया जाता है।
  • इसरो, विक्रम साराभाई रिसर्च सेंटर व मिधानि के वरिष्ठ अफसरों के निगरानी में की जाती है रोलिंग।

गगनयान मिशन एक नजर में

गगनयान प्रोजेक्ट के तहत पहला सेटेलाइट दिसंबर 2020 में ही लांच किया जाना था लेकिन कोविड-19 की वजह से संभव नहीं हो पाया। जिसके बाद अब पूरा कार्यक्रम रिशेड्यूल किया गया है। अब पहला सेटेलाइट दिसंबर 2021, दूसरा सेटेलाइट 2022 और तीसरा सेटेलाइट 2024 में अंतरिक्ष भेजा जाएगा।

10 हजार करोड़ की लागत वाले गगनयान मिशन का उद्देश्य सिर्फ अंतरिक्ष में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को भेजना भर नहीं है। यह निरंतर अंतरिक्ष मानव उपस्थिति के लिए एक नया केंद्र स्थापित करना है।

गगनयान के पहले सेटेलाइट व्हीकल का ट्रायल सफल

गगनयान प्रोजेक्ट के तहत तीन सेटेलाइट व्हीकल लांच किए जाएंगे। पहला मानव रहित सेटेलाइट दिसंबर में छोड़े जाने की योजना है। इसका ट्रायल सफल रहा। 2022 में दूसरा सेटेलाइट व्हीकल व अगला 2024 में छोड़े जाने की योजना है।

मंगलयान-2 ऑर्बिटर, लैंडर तथा रोवर ले जाएगा

वहीं मंगलयान 2 या मार्स ऑर्बिटर मिशन 2 भारत का मंगलयान के बाद मंगल ग्रह के लिए दूसरा मिशन है। इसरो द्वारा मंगल ग्रह के लिए मिशन को 2024 में लांच किया जाएगा। यह मिशन अपने साथ ऑर्बिटर, लैंडर तथा रोवर ले के जाएगा।