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  • As The Distance Between The Devotee And God Increases, The Broken 600 year old Tradition ... The Fourth Monday Of The Month Of Sawan Remained Untouched

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सावन का चौथा सोमवार:भक्त और भगवान के बीच दूरी बढ़ी तो टूटी 600 साल पुरानी परंपरा, शृंगार बिना रहे हटकेश्वरनाथ

रायपुर4 महीने पहले
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मंदिरों के बाहर पुलिस का पहरा है और लोग घरों में कैद हैं। भक्त और भगवान के बीच बनी इस दूरी ने अब 600 साल पुरानी परंपरा को भी तोड़ दिया है। सावन सोमवार में ऐसा पहली बार हुआ जब बाबा हटकेश्वरनाथ पूरे दिन बिना शृंगार के रहे। मंदिर में कोई विशेष अनुष्ठान भी नहीं हुआ। पंडितों ने सुबह सिर्फ सामान्य पूजा कर भगवान का जलाभिषेक किया। गौरतलब है कि हर साल सावन सोमवार में 10 हजार से ज्यादा भक्त बाबा हटकेश्वरनाथ के दर्शन के लिए महादेवघाट पहुंचते हैं। सावन से पहले मंदिर अनलॉक हुए तो भक्तों का उत्साह बढ़ा था। तीसरे सावन सोमवार तक सबने फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भगवान के दर्शन भी किए। पर शहर में तेजी से फैल रहे संक्रमण की वजह से सरकार ने एक बार फिर लॉकडाउन कर दिया है। इसी वजह से चौथे सावन सोमवार को शिवालय पहली बार पूरी तरह से सूने रहे। भक्तों के नहीं आने की वजह से पंडितों ने भी बाबा का शृंगार नहीं किया। पंडित सुरेश गिरी ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियां ऐसी हैं कि न चाहते हुए भी भगवान से दूरी बढ़ गई है। इससे भक्त मायूस हैं और हमारा उत्साह भी फीका पड़ा है। चौथे सावन सोमवार को भगवान का जलाभिषेक कर महामारी के कहर से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की गई। इसी तरह का विशेष शृंगार नहीं किया गया।

इधर, बूढ़ेश्वर मंदिर में भी सामान्य पूजा-अर्चना, नहीं हुआ विशेष शृंगार
इसी तरह बूढ़ापारा स्थित बूढ़ेश्वर महादेव का भी चौथे सावन सोमवार को विशेष शृंगार नहीं किया गया। सुबह पंडितों ने ही पूजन-अभिषेक किया फिर मंदिर बंद कर दिया गया। मंदिर के ट्रस्टियों का कहना है कि सावन में ऐसा पहली बार हुआ है जब शिवलिंग की पिंडी साफ नजर आ रही है। इससे पहले तक सावन के मौके पर भगवान शृंगार और फूलों से इतने ढंक जाते थे कि मूल स्वरूप के दर्शन ही नहीं होते थे। इस बार विशेष शृंगार भी नहीं हुआ और भक्तों के नहीं आने की वजह से भगवान पर ज्यादा फूल भी नहीं चढ़े। कोरोना महामारी से विश्व को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान से कामना भी की गई। बता दें कि, यहां स्थापित भी महादेवघाट स्थित हटकेश्वरनाथ के समकालीन है। आदिवासी समाज के इष्टदेव बूढ़ा देव के नाम पर शिवलिंग का नाम बूढ़ेश्वर महादेव पड़ा। मान्यता है कि इस स्वयंभू शिवलिंग पर सांप लिपटे रहते थे, जिसे देखकर श्रद्धालुओं ने मंदिर का निर्माण करवाया।

घर-घर बनाया गया मिट्टी का शिवलिंग, मांगी कोरोना से मुक्ति
चौथे सावन सोमवार को सप्तमी-अष्टमी तिथि एक साथ थी। सर्वार्थसिद्धि योग के संयोग में भक्तों ने घर पर ही शिवलिंग बनाकर मन से पूजा-अर्चना की। इस दिन माता लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है इसलिए लोगों ने शिव महामंत्र का उच्चारण धन की देवी लक्ष्मी की भी पूजा की। साथ ही वैश्विक महामारी कोविड-19 से मुक्ति दिलाने की भी प्रार्थना की। ज्योतिषियों के मुताबिक जब कभी सावन में पांच सोमवार का संयोग पड़े तो चौथा और पांचवां सोमवार विशेष फलदायी होता है।

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