स्टील उद्योग को मिल सकता है 92 MT ऑक्सीजन:केंद्र सरकार की मांग पर आज औपचारिक प्रस्ताव भेजा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कल प्रधानमंत्री से की थी बात

रायपुर7 महीने पहले
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भिलाई स्टील प्लांट प्रदेश के उन बड़े ऑक्सीजन उत्पादकों में से एक है जहां से बनी ऑक्सीजन ने लाखों को सांसें लौटाई हैं। - Dainik Bhaskar
भिलाई स्टील प्लांट प्रदेश के उन बड़े ऑक्सीजन उत्पादकों में से एक है जहां से बनी ऑक्सीजन ने लाखों को सांसें लौटाई हैं।

कोरोना संकट के समय स्टील उद्योग में ठप्प उत्पादन को ऑक्सीजन की संजीवनी मिल सकती है। केंद्र सरकार की मांग पर राज्य सरकार ने आक्सीजन के आवंटन संबंधी एक प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इसमें प्रदेश में उत्पादित कुल ऑक्सीजन का 20% हिस्सा यानी करीब 92 मीट्रिक टन औद्योगिक गतिविधियों के लिए देने की बात है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फोन किया था। प्रधानमंत्री ने कोरोना प्रबंधन और टीकाकरण की स्थितियों पर बात की। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्टील उद्योग के संकट की ओर उनका ध्यान खींचा था। मुख्यमंत्री ने कहा, यहां बन रही ऑक्सीजन का करीब 20% हिस्सा उद्योगों को दे दिया जाए तो वहां उत्पादन फिर से शुरू हो जाएगा।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री के फोन के कुछ घंटे बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का फोन आया। उन्होंने मुख्यमंत्री से ऑक्सीजन आवंटन संबंधी औपचारिक प्रस्ताव मांगा। उसके बाद सरकार की ओर से एक पत्र भेज कर औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया गया।

पिछले महीने लगा दी गई थी रोक

देशभर में मेडिकल ऑक्सीजन की बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन के औद्योगिक प्रयोग पर रोक लगा दी थी। केवल 9 सेक्टर को इससे छूट थी। इसमें स्टील उद्योग भी शामिल था। बाद में इस पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। स्टील उद्योगों में बनी ऑक्सीजन को अस्पतालों के लिए भेजा जाने लगा था।

छत्तीसगढ़ में ऐसा है ऑक्सीजन के उत्पादन और वितरण का गणित

प्रदेश में रोजाना 462 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता है। इसमें से 15 मई तक 115 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्रदेश के अस्पतालों में भेजा गया। वहीं 175 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दूसरे प्रदेशों को गया। पिछले महीने की 28 तारीख को प्रदेश के अस्पतालों में 150 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भेजा गया था। वहीं दूसरे राज्यों को 340 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दिया गया।

कहा- अभी आवंटित करें जरूरत पड़े तो फिर रोक देंगे

मुख्यमंत्री की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है, ऑक्सीजन की कमी के कारण राज्य की सभी स्टील निर्माता इकाईयां बंद पड़ी हैं। इसकी वजह से लाखों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्टील निर्माता इकाईयों को राज्य में उत्पादित 20% ऑक्सीजन (92 मीट्रिक टन) के उपयोग की अनुमति प्रदान किया जाए। कहा गया, भविष्य में अधिक ऑक्सीजन की जरूरत महसूस हुई तो स्टील निर्माता इकाईयों को ऑक्सीजन की आपूर्ति रोकी जा सकती है।

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