सहकारी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई:​​​​​छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव जिला सहकारी बैंक का संचालक मंडल भंग, संचालकों पर अनियमितता का आरोप

रायपुर5 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में सरकार ने सहकारी क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई की है। सहकारी संस्थाओं के पंजीयक ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव के संचालक मंडल को भंग कर दिया है। अब राजनांदगांव कलेक्टर इस बैंक के प्रशासक होंगे। बैंक के संचालक मंडल पर अनियमितता और शेयरधारकों के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप है।

छत्तीसगढ़ में सहकारी संस्थाओं के पंजीयक हिमशिखर गुप्ता ने गुरुवार शाम आदेश जारी किया। बताया जा रहा है, बैंक के संचालक मंडल पर बैंक के प्रबंधन एवं काम-काज को लेकर कई अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। जांच में शिकायतें सही पाई गई। उसके बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के संचालक मंडल को भंग करने का आदेश जारी हुआ। पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने 10 जुलाई 2019 को पहली बार बैंक के संचालक मंडल को नोटिस जारी कर पूछा था कि उन्हें क्यों न भंग कर दिया जाए। संचालक मंडल का पक्ष सुनने के लिए 30 जुलाई तक का समय दिया गया था। बाद में संचालक मंडल ने उच्च न्यायालय में इसको चुनौती दी। न्यायालय में मामला निपटने के बाद अब पंजीयक फिर से सक्रिय हुए।

संचालक मंडल पर इस तरह के आरोप

सहकारी संस्थाओं के पंजीयक ने जुलाई 2019 में संचालक मंडल को दिए नोटिस के साथ 7 पृष्ठ का आरोपपत्र भी दिया था। इसमें मुख्य रूप से चार आरोप थे। पहला यह कि संचालक मंडल ने बैंक के हितों की अनदेखी करते हुए गलत फैसले लिए। इसकी वजह से बैंक को तकरीबन 3 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। दूसरा संचालक मंडल ने अपनी मनमानी करते हुए 18 हजार किसानों को सही समय पर कर्ज माफी का लाभ नहीं दिया। इसकी वजह से वे समय से नया ऋण हासिल नहीं कर पाए। तीसरा यह कि अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदिम जाति सहकारी समिति गेंदाटोला के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया। और चौथा कि बैंक ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति में रिजर्व बैंक के निर्देशों के खिलाफ जाकर अपात्र व्यक्ति को कार्यपालन अधिकारी बनाए रखा और बैंक में आर्थिक गड़बड़ियां की गई।

रमन सिंह के करीबी हैं बैंक अध्यक्ष सचिन बघेल

जिस संचालक मंडल को भंग किया गया है उसके अध्यक्ष सचिन सिंह बघेल पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के करीबी हैं। सावित्री द्विवेदी और राधेलाल साहू इसके उपाध्यक्ष रहे। वहीं धेलाल साहू, शशिकांत द्विवेदी, मिथलेश दुबे, अरूण साहू, मिनेश कुमार साहू, श्रवण कुमार जंघेल, रामकृष्ण चंद्रवंशी, हरिसिंह पुरामे, गुहराम बंजारे, सुरजे राम देवांगन और लक्ष्मीबाई चंद्राकर संचालक थे।

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