नेताजी का बवाली बयान:पूर्व मंत्री बृजमोहन बोले-कांग्रेसी नामर्द हैं; कांग्रेस का जवाब- सत्ता गई तो अभद्र और अशिष्ट हो गए

रायपुर3 महीने पहले
। - Dainik Bhaskar

रायपुर में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्व मंत्री और रायपुर के विधायक बृजमोहन अग्रवाल कुछ ऐसा बोल गए जो अब कांग्रेसियों को रास नहीं आ रहा। बृजमोहन अग्रवाल के ताजा बयान की वजह से नया सियासी बवाल खड़ा होता दिख रहा है। दरअसल ये बयान बृजमोहन ने भाजपा के जेल भरो अंदोलन में दिया।

जेल में भाजपा नेताओं ने नारेबाजी की।
जेल में भाजपा नेताओं ने नारेबाजी की।

घड़ी चौक के पास तपती दोपहरी में बड़ी तादाद में भाजपा कार्यकर्ता नेता जमा हुए। सभी बैरीकेड हटाकर मुख्यमंत्री निवास की तरफ जाना चाहते थे। पुलिस के साथ झूमाझटकी हुई। कुछ देर बाद सभी का नेतृत्व कर रहे बृजमोहन अग्रवाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर जबरन बस में बैठा दिया। इस बीच मीडिया से बात करते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा- ये कांग्रेस के लोग निकम्मे हैं, कांग्रेस के लोग नामर्द हैं। प्रदेश में जैसी गाइडलाइन किसी धरना, आंदोलन या जुलूस के लिए बनाई गई है वैसी किसी और राज्य में नहीं है।

बृजमोहन ने आगे कहा कि ऐसे कानून कहां लागू है, कांग्रेस के नेता हमें आदेश दिखाएं। छत्तीसगढ़ अलग राज्य क्यों बना है, जो कानून दूसरे राज्यों में लागू हैं वो यहां भी लागू होंगे न। ये दूसरे प्रदेशों से बराबरी की बात करते हैं। तो दूसरे राज्यों में पीएम आवास बन रहे हैं, यहां पीएम आवास के मकान क्यों नहीं बन रहे, यहां लोगों को पट्‌टे क्यों नहीं मिल रहे, यहां घर घर में नल क्यों नहीं पहुंच रहा। अन्य राज्यों की बात करते हैं तो अन्य राज्यों की बराबरी करके दिखाएं जहां क्रेंद्र की योजनाएं लागू हैं।

कांग्रेस नेता सुशील आनंद ने जवाब दिया।
कांग्रेस नेता सुशील आनंद ने जवाब दिया।

कांग्रेस का जवाब- बृजमोहन को मतिभ्रम
बृजमोहन के बयान के बाद अब कांग्रेस इस मौके को नहीं छोड़ने वाली। कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि - सत्ता हाथ से जाने के बाद भाजपा के कुछ नेता बौखला गए थे, अब अभद्र और अशिष्ट हो गए हैं। बृजमोहन अग्रवाल के प्रयोग किए गए शब्द बेहद आपत्ति जनक हैं। हम इस पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हैं, हम चाहते हैं कि बृजमोहन अग्रवाल अपने शब्दों पर माफी मांगें। जहां सवाल आंदोलन संबंधी गाइडलाइन का है तो बृजमोहन अग्रवाल मतिभ्रम के शिकार हैं। वो प्रदेश में भाजपा शासन काल के वक्त खुद गृहमंत्री थे। तब इन्हीं नियमों के तहत धरना की अनुमति दी जाती थी। जन सरोकार का कोई मुद्दा भाजपा के पास है नहीं तो काल्पनिक मुद्दों पर राजनीति करने की कोशिश है। खुद छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार अपने वक्त में इन्हीं नियमों के तहत अनुमति देती थी।

ये वो नियम की वजह से खड़ा हुआ है बवाल

सोमवार को भाजपा ने गृह विभाग के इसी आदेश की वजह से जेल भरो आंदोलन किया। अकेले रायपुर शहर में 2 हजार से ज्यादा नेता और कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी दी। राजनांदगांव, बिलासपुर, दुर्ग जैसे शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुआ। गृह विभाग की तरफ से जारी किए गए फरमान में कहा गया है कि अब किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम जैसे कि धरना प्रदर्शन, रैली को आयोजित करने से पहले कलेक्टर दफ्तर में एक फॉर्म भरकर जमा करना होगा। इसका बकायदा एक प्रारूप तैयार किया गया है। ये फॉर्म एसडीएम कार्यालय से आवेदन करते वक्त लिया जा सकेगा।

इसमें आयोजक के पूरी जानकारी ली जाएगी । आयोजन किस तारीख से किस तारीख तक चलेगा, कहां होगा, अगर रैली हुई तो उसका रूट क्या होगा, रैली में कौन लोग शामिल होंगे, कहां से आएंगे कौन सी गाड़ियों से आएंगे, पूरे आयोजन का मकसद क्या है। इस तरह के 11 सवालों के जवाब के साथ फॉर्म भरकर जमा करना होगा। इसके बाद जिला प्रशासन पर निर्भर करता है कि वह अनुमति देगा या नहीं। बिना अनुमति के कार्यक्रम किया तो आयोजकों पर FIR दर्ज की जाएगी।

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