उपचुनाव की स्थिति बन रही:खैरागढ़ में 6 माह में उपचुनाव, ढाई साल में ऐसा चौथी बार; हर बार सत्ता की जीत

रायपुर20 दिन पहलेलेखक: मनोज व्यास
  • कॉपी लिंक
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने के बाद दंतेवाड़ा, चित्रकोट और मरवाही में हुए उपचुनाव। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने के बाद दंतेवाड़ा, चित्रकोट और मरवाही में हुए उपचुनाव।

खैरागढ़ विधायक देवव्रत सिंह के निधन के बाद अब 6 महीने के भीतर उपचुनाव कराना होगा। यानी 4 मार्च से पहले नए विधायक का चुनाव हो जाएगा। सीट खाली होने की सूचना मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रीना कंगाले सोमवार को चुनाव आयोग को भेजेंगी। 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद चौथी बार उपचुनाव की स्थिति बन रही है। इससे पहले 2008-13 के बीच चार बार उपचुनाव हुए थे।

छत्तीसगढ़ में अब तक 12 बार विधानसभा उपचुनाव हुए हैं, जिसमें कोटा को छोड़ दें तो हर बार सत्ताधारी पार्टी की जीत हुई है। 2006 में पहले विधानसभा अध्यक्ष पं. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के निधन के बाद कोटा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. रेणु जोगी जीती थीं। तब से लेकर अब तक वे चौथी बार विधायक हैं। बता दें कि 2018 के चुनाव में देवव्रत सिंह ने जनता कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ा था।

इस चुनाव में जनता कांग्रेस के पांच प्रत्याशी जीते थे। इनमें पार्टी के संस्थापक अजीत जोगी, रेणु जोगी, धर्मजीत सिंह, देवव्रत और प्रमोद शर्मा शामिल हैं। जोगी के निधन के बाद जनता कांग्रेस के विधायकों की संख्या चार रह गई थी। हालांकि मरवाही उपचुनाव के दौरान ही देवव्रत और प्रमोद के कांग्रेस में शामिल होने की भी चर्चा थी। 1994 में देवव्रत भी उपचुनाव के जरिए विधायक चुने गए थे। उनकी मां रश्मि देवी सिंह के निधन के बाद चुनाव हुए थे। इस तरह खैरागढ़ में ही तीसरी बार उपचुनाव होंगे।

पहले दो उपचुनाव मुख्यमंत्रियों के लिए
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहले दो उपचुनाव मुख्यमंत्रियों के लिए हुए थे। दरअसल, पहले दोनों मुख्यमंत्री यानी जोगी और डॉ. रमन सिंह जब मुख्यमंत्री चुने गए, तब वे विधायक नहीं थे। जोगी के लिए तत्कालीन भाजपा विधायक रामदयाल उइके ने मरवाही सीट छोड़ी थी।

तब से वे मरवाही से ही विधानसभा चुनाव लड़े और जीतते रहे। 2003 में जब भाजपा सरकार बनी, तब प्रदीप गांधी ने डॉ. रमन के लिए डोंगरगांव सीट खाली की। हालांकि जीतने के बाद रमन ने अपनी सीट बदल ली और राजनांदगांव से चुनाव लड़े और उसी सीट से तीसरी बार विधायक चुने गए हैं।

सबसे चौंकाने वाला उपचुनाव अंतागढ़ का
प्रदेश में सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर वाला उपचुनाव अंतागढ़ में हुआ था। 2014 में अंतागढ़ के तत्कालीन विधायक विक्रम उसेंडी को भाजपा कांकेर लोकसभा सीट से उतारा। उसेंडी जीते और सांसद बन गए। इसी साल में अंतागढ़ में उपचुनाव हुए। इसमें भाजपा से भोजराज नाग और कांग्रेस से मंतूराम पवार प्रत्याशी थी। नामांकन वापसी के अंतिम दिन मंतूराम ने अपना नाम वापस ले लिया। इसे लेकर काफी बवाल मचा, लेकिन उससे भी बड़ा बवाल, तब हुआ, जब अंतागढ़ में खरीद-फरोख्त के आरोप लगे थे। इस खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई थी।

अब तक उपचुनाव

  • 2000-03 मरवाही: रामदयाल उइके ने सीट खाली की और अजीत जोगी जीते।
  • 2003-08 डोंगरगांव: प्रदीप गांधी ने सीट खाली की और डॉ. रमन सिंह जीते। मालखरौदा: निर्मल सिन्हा ने कांग्रेस विधायक के चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिससे निर्वाचन रद्द हुआ और वे उपचुनाव में जीते। कोटा: पं. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के निधन के बाद डॉ. रेणु जोगी जीतीं।
  • 2008-13 खैरागढ़: देवव्रत सिंह के सांसद बनने पर खाली हुई सीट पर कोमल जंघेल जीते। केशकाल: महेश बघेल के निधन के बाद सेवक राम नेताम की जीत हुई। भटगांव: रविशंकर त्रिपाठी के निधन के बाद उनकी पत्नी रजनी त्रिपाठी जीतीं। संजारी बालोद: मदनलाल साहू के निधन के बाद उनकी पत्नी कुमारी बाई जीतीं।
  • 2013-18 अंतागढ़: विक्रम उसेंडी के सांसद बनने के बाद खाली सीट पर भोजराज नाग जीते।
  • 2018 से अब तक दंतेवाड़ा: नक्सल हमले में भीमा मंडावी के निधन के बाद देवती कर्मा की जीत हुई। चित्रकोट: दीपक बैज के सांसद बनने के बाद खाली सीट पर राजमन बेंजाम जीते। मरवाही: अजीत जोगी के निधन के बाद डॉ. केके ध्रुव की जीत हुई। खैरागढ़: 6 महीने के भीतर उपचुनाव की प्रक्रिया होगी।