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अब सभी वर्गों को 33% वैक्सीन:छत्तीसगढ़ में प्राथमिकता के आधार पर अंत्योदय कार्डधारियों को वैक्सीन देने का मामला, हाईकोर्ट का नया आदेश

रायपुर2 महीने पहले
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  • सरकार का जवाब अभी वैक्सीनेशन पर रोक लगा दी है, नई नीति जल्द बनाकर देंगे टीका
  • हाईकोर्ट ने कहा- रोक लगाने किसने कहा, एक तिहाई के हिसाब से सबको वैक्सीन लगाओ

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में वैक्सीन प्राथमिकता के आधार पर नहीं, बल्कि तब तक सभी वर्गों में एक तिहाई लोगों को लगाई जाएगी, जब तक इस पर स्पष्ट नीति नहीं बन जाती। दरअसल, शुक्रवार को जब सरकार ने कहा कि कोर्ट के आधार के बाद वैक्सीनेशन रोक दिया गया है, ताकि सभी वर्गों को ज्यादा फायदा कैसे मिल सके, इसका निर्धारण किया जा सके। इस पर कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई। कहा, वैक्सीनेशन बंद करने किसने कहा था। जब तक स्पष्ट नीति नहीं बन जाती, तब तक अंत्योदय, बीपीएल, एपीएल आदि सभी वर्गों का 33 प्रतिशत के हिसाब से वैक्सीनेशन किया जाए। वैक्सीनेशन को रोका नहीं जा सकता।

दरअसल, दो दिन पहले हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार की उस नीति पर रोक लगा दी थी, जिसमें सरकार ने अंत्योदय कार्डधारियों को पहले वैक्सीन लगाने का निर्णय लिया था। सरकार ने कहा था कि प्राथमिकता के आधार पर अंत्योदय वर्ग को इसलिए रखा गया है क्योंकि इनके पास मोबाइल इंटरनेट नहीं है, ये लोग रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकते। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि बीमारी अमीरी में फर्क नहीं करती। यह समानता के अधिकार के भी खिलाफ है। दो दिनों के भीतर हाईकोर्ट ने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने कहा था। सरकार ने जवाब पेश करने के लिए मुख्यसचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई। शुक्रवार को राज्य सरकार ने जवाब पेश किया। इसमें कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद वैक्सीनेशन को रोक दिया गया है।

राज्य शासन की तरफ से बताया गया कि कमेटी बनाई गई है। पूर्व के आदेश में कुछ परिवर्तन करना चाहते हैं, इसलिए कमेटी की रिपोर्ट आने पर वैक्सीनेशन फिर से शुरू किया जाएगा, जिससे सभी वर्ग को फायदा मिले। इस पर कोर्ट ने पूछा कि शासन को वैक्सीनेशन बंद करने किसने आदेश दिया है। शासन तत्काल आज से ही वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को शुरू करे। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक आपकी कमेटी वैक्सीनेशन नीति का निर्धारण नहीं कर लेती, तब तक इस वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में अंत्योदय, बीपीएल और एपीएल कार्डधारकों को एक-एक तिहाई के हिसाब से वैक्सीनेशन किया जाए। लिहाजा छत्तीसगढ़ में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण अब प्राथमिकता के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि अंत्योदय, बीपीएल आैर एपीएल श्रेणी के लोगों का एक तिहाई यानी तीनों श्रेणियों के युवाओं को बराबर-बराबर अनुपात में टीके लगेंगे।

गरीबों को लेकर सरकार की चिंता से हाईकोर्ट भी सहमत
सरकार की आेर से जारी आदेश में यह भी बताया गया है कि हाईकोर्ट ने राज्य शासन द्वारा गरीबों के लिए जाहिर की गई चिंता को जायज माना है और वरिष्ठ सचिवों की समिति से इस संबंध में अनुशंसा प्रस्तुत करने के लिए कहा है, जिस पर बाद में सुनवाई की जाएगी।

केंद्र से हाईकोर्ट ने पूछा- राज्यों को पर्याप्त वैक्सीन क्यों नहीं दे रहे
न्यायमित्र प्रफुल्ल एन. भारत ने केंद्र सरकार द्वारा राज्य को पर्याप्त मात्रा में टीका नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाया। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से लिखित में जवाब देने निर्देशित किया है। कोर्ट ने पूछा है कि प्रदेश सरकार को कम वैक्सीन क्यों मिल रही है? इन्हें कितने अनुपात में वैक्सीन मिलनी चाहिए। केंद्र सरकार के तरफ से एएसजी रमाकांत मिश्रा ने पक्ष रखा कि 50 प्रतिशत के हिसाब से हम वैक्सीन राज्यों को दे रहे हैं। 10 मई को इसी विषय पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है, वहां केंद्र सरकार के तरफ से जो भी तथ्य और आंकड़े दिए जाएंगे वह हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर देंगे। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप अपना जवाब लिखित में प्रस्तुत करें

सरकार सीरम को 9.35 करोड़, भारत बायोटेक को 6.30 करोड़ दे चुकी
राज्य शासन ने 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए 75 लाख वैक्सीन की मांग की है, लेकिन अभी तक उसे सिर्फ डेढ़ लाख वैक्सीन ही मिली है। इस मामले में वैक्सीन निर्माता कंपनियों को राज्य सरकार ने एडवांस के तौर पर भुगतान किया है। सबसे ज्यादा सीरम इंस्टीट्यूट को 9 करोड़ 35 लाख 89 हजार 650 रुपए का भुगतान किया जा चुका है। लेकिन 18 प्लस टीकाकरण के लिए इस कंपनी ने कोविशील्ड की एक भी डोज भेजना तो दूर, अब तक सरकार को जवाब नहीं दिया है कि वह टीके कब से और कितने सप्लाई करेगी। कोवैक्सीन बनाने वाली लैब भारत बायोटेक को सरकार ने 6 करोड़ 30 लाख रुपए का भुगतान किया है।

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