CGPSC टॉपर्स का दिलचस्प संघर्ष:रिजल्ट से एक दिन पहले दोस्तों के साथ PSC दफ्तर के बाहर खिंचवाई तस्वीर; अगले दिन रिजल्ट आया तो नीरनिधि टॉप कर चुके थे

रायपुर3 महीने पहले
पीएससी दफ्तर के बाहर नीरनिधी ने यह फोटो रिजल्ट के एक दिन पहले खिंचवाई थी।

CGPSC-2019 के नतीजे आ चुके हैं। इस परीक्षा में टॉप पोजिशन रायपुर के नीरनिधि नंदेहा ने हासिल की है। रिजल्ट आने के बाद नीर के दोस्त दीपक ने बताया कि हम 5 दोस्तों का ग्रुप है। खास बात ये है कि नीर के साथ ही सभी दोस्त इस परीक्षा में सेलेक्ट हो चुके हैं। टॉपर साथी के बारे में दीपक ने बताया कि 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन खुले रहने वाले नालंदा परिसर में रहकर ही हमने तैयारी की। रात के 3 से 4 बजे तक जाग कर नीर भी इसी कैंपस में पढ़ा करते थे।

दीपक ने आगे कहा कि प्री और मेंस का एग्जाम भी यहीं के स्टडी मटेरियल और किताबों के सहारे क्लीयर किया। इसके बाद जब हमारा सेलेक्शन इंटरव्यू के लिए हुआ तो हम एक दूसरे का टेस्ट लिया करते थे। नीर मुझसे सवाल पूछा करते थे हम नीर से। इस तरह से अपनी तैयारी को पक्का किया और नीर को कामयाबी मिली।

इंटरव्यू 17 सितंबर की शाम खत्म होने वाले थे। हम दोस्तों ने तैयारी बेहद अच्छी तरह से की थी। हमने एक दिन पहले 16 सितंबर की रात आम स्टूडेंट की तरह CGPSC के दफ्तर के बाहर जाकर तस्वीर भी खिंचवाई। अगले दिन जब रिजल्ट आया तो नीरनिधि ने टॉप किया, हम में से किसी को यकीन नहीं हुआ खुशी भी काफी हुई।

दोस्तों के साथ नीरनिधि।
दोस्तों के साथ नीरनिधि।

मदनवाड़ा नक्सल कांड के बाद लगा अपने राज्य के लिए कुछ करना है
मेरिट लिस्ट में चौथे नंबर पर नाम गगन शर्मा का है। साल 2016 में गगन का सेलेक्शन नायब तहसीलदार के पद पर हो चुका था, लेकिन डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए तैयारी जारी रखी। गगन बताते हैं कि कॉलेज के आखिर वक्त में जब करियर के बारे में सोच ही रहे थे तब राजनांदगांव के मदनवाड़ा में नक्सल हमले में IPS वीके चौबे शहीद हो गए थे। अफसर और पुलिस जवानों की ये कुर्बानी देकर गगन के मन में प्रदेश के लिए कुछ करने की ऐसी सोच जगी कि वो सिविल सर्विस की तैयारी में जुट गए। 4 बार मेंस की परीक्षा दी मगर कामयाबी नहीं मिली, इस बात ने जरा निराश किया मगर कोशिश करना नहीं छोड़ा।

गगन शर्मा (चेक शर्ट में)।
गगन शर्मा (चेक शर्ट में)।

सेंट्रल एक्साइज की एक परीक्षा में गगन कामयाब हुए। मुंबई जाकर अफसर के पद पर जॉइन करना था, मगर तभी CGPSC में भी नायाब तहसीलदार के पद पर चुन लिए गए। गगन ने बताया कि इसके बाद मैंने प्रदेश में रहकर ही लोगों के लिए काम करने की सोची। नौकरी जॉइन करने के बाद जिंदगी के प्रति मेरा नजरिया बदल गया। बतौर नायाब तहसीलदार कई बार हमें शवों की रिपोर्ट लिखने भी जाना पड़ता है। इन घटनाओं की वजह से मैंने बहुत कुछ सकारात्मक सीख कर अपने जीवन को सर्विस के दौरान हर जरूरतमंद के काम आने की दिशा में लगाना शुरू किया। इस बीच तैयारी भी चलती रही। इस बार जो रैंक मिली है उससे डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंच पाउंगा।

100वीं रैंक से ऐसी उड़ान कि अब आई 5वीं रैंक
रायपुर की रुचि शार्दुल ने 2019 की मेरिट लिस्ट में 5वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने बताया कि साल 2016 में उनकी रैंक 100वीं थी, साल 2017 में 74वीं और अब 2021 में 5वीं रैंक हासिल की है। रुचि को यकीन है कि इस रैंक की बदौलत वो डिप्टी कलेक्टर पद के लिए चुन ली जाएंगी। उन्होंने बताया कि क्लास 10वीं से ही उन्होंने सिविल सर्विसेस के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। 2016 के सलेक्शन के बाद रुचि वित्त विभाग में अधिनस्थ लेखा सेवा अधिकारी के तौर पर काम कर रही थीं।

रुचि शार्दुल।
रुचि शार्दुल।

रुचि ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने जो कुछ पढ़ा, उससे रिलेटेड डॉक्यूमेंटरी देखीं। अपने काम और माहौल में भी स्टडी को जोड़े रखती थीं। करीब डेढ़ से दो सालों से किसी फैमिली फंक्शन में नहीं गईं। खुद को बस तैयारी में लगाए रखा। ग्रुप डिस्कशंस की वजह से काफी फायदा मिला। वन विभाग से रिटायर्ड अफसर पिता श्याम शार्दुल और हाउस वाइफ मां रुक्मणी शार्दुल ने भी बेटी को सपोर्ट किया। मेंस के बाद जब इंटरव्यू के लिए रुचि गईं तो चूंकि उन्होंने आर्किटेक्चर में ग्रेजुएशन किया था उसने उससे जुड़े सवाल किए गए। इसके बाद उन्हें सेलेक्ट कर लिया गया।

पहली बार में मिली कामयाबी
अंबिकापुर की वर्षा बंसल को पहली बार में ही कामयाबी मिली। इनकी रैंक 6वीं है। CGPSC की पिच पर इन्होंने पहली बॉल में ही कामयाबी का सिक्सर लगाया है। दैनिक भास्कर से अपनी स्टडी के बारे में जानकारी देते हुए वर्षा ने बताया कि मैं साल 2018-19 से तैयारियों में जुट गई। इस वक्त मुझे लगा कि क्यों न खुद को इस कसौटी पर परखा जाए। इससे पहले मैं एक डेंटिस्ट के तौर पर काम कर रही थी। मैंने इस काम से ब्रेक लेकर तैयारी शुरू की। मैंने रेग्युलर बेसिस पर पढ़ाई शुरू की। किसी भी दिन को मिस नहीं किया। अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट कर दिया।

वर्षा बंसल।
वर्षा बंसल।

उन्होंने आगे कहा कि वॉट्सऐप पर भी दोस्तों से सिर्फ टॉपिक रिलेटेड बातें होती थीं। दोस्तों से मिलना जुलना बंद किया। लॉकडाउन के वक्त भी मैं खुद को आइसोलेट कर पढ़ती रही, तैयारी में लगी रही। मुझे याद है दीवाली पर एक या दो दिन का ही गैप लिया मैंने, इसके बाद सारा वक्त तैयारी को दिया। कोचिंग इंस्टीट्यूट्स की वजह से भी मुझे गाइडेंस मिली। हर दो से तीन महीने में मुझे ये लगता था कि पता नहीं मैं कर पाउंगी या नहीं, एक घबराहट लगी रहती थी। ऐसे में मेरे पिता सुभाष चंद्र बंसल और मां मीरा बंसल ने मुझे सपोर्ट किया। इनकी वजह से मैं भी कुछ कर दिखाने के जज्बे के साथ फिर से तैयारी में जुट जाया करती थी। मेंस के बाद इंटरव्यू के लिए खुद को प्रीपेयर किया। इसमें मुझ से नक्सलवाद, तालिबान इश्यू, अंबिकापुर और मैनपाट के विषय पर बात की गई थी।

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