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भास्कर पड़ताल:कोरोना के डेल्टा वैरिएंट में बदलाव ये कमजोर इसलिए वार्डों में घटे मरीज

रायपुर2 महीने पहले
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  • पीक में मोहल्लों से निकल रहे थे राजधानी के 90% मरीज, अब 60% ही

कोरोना मरीजों की लिहाज से राजधानी में जून काफी राहत देने वाला है। जून के 16 दिनों में रायपुर में 1026 नए संक्रमित मिले हैं। वहीं 22 मरीजों की मौत हुई है। इन दिनों 50 से कम मरीज मिल रहे हैं, वह मई 2020 जैसा है। यानी एक साल बाद राजधानी में पिछले सप्ताहभर से 50 से कम नए मरीज मिल रहे हैं। 2021 में बुधवार को अब तक का सबसे कम केवल 20 नए केस आए हैं।

वायरोलॉजी के विशेषज्ञों क मानना है कि पीक के दौरान यहां 500 सैंपल की जांच हुई थी, जिसमें 150 में कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट मिला था, जिसने दहशत फैला दी। लेकिन ऐसा लग रहा है कि इस म्यूटेशन में ही बदलाव हो गया है और इसके बाद वायरस कमजोर पड़ा है। इसीलिए केस कम हुए हैं, हालांकि सावधानी बनाए रखने की जरूरत है। भास्कर ने राजधानी में नए कोरोना मरीजों की संख्या के विश्लेषण में पाया कि अभी यानी 1 से 17 जून के बीच रोज 64 के औसत से मरीज मिल रहे हैं। जितने मरीज मिल रहे हैं, उनमें 1.3 (अर्थात एक) मरीज की मौत हो रही है। जून के पहले दिन राजधानी में केस 100 से कम थे। पिछले 15 दिनों में केवल 7 व 10 तारीख को 100 से ज्यादा संक्रमित मिले।

विशेषज्ञों के अनुसार इससे संक्रमण घटने की पुष्टि हो रही है। यही नहीं, राजधानी के घने शहरी क्षेत्रों यानी मोहल्लों में मरीजों की संख्या कम हुई है। एक हफ्ते के आंकड़े ही देखें तो 15 जून काे 42 मरीज मिले थे, जिसमें 33 घने शहरी इलाके से थे। इसी तरह, 14 जून को 41 में 28, 13 जून को 20 में 12 और 12 जून को 49 में से 31 मरीज घने शहर में निकले। इसी तरह 11 जून को 59 में 41, 10 जून को 113 में 92 व 9 जून को 56 में 39 मरीज मोहल्लों में मिले। अर्थात राजधानी में जितने मरीज मिले, उनमें 60 फीसदी मरीज मोहल्लों से और बाकी आउटर के हैं। जबकि अप्रैल अंत से मई के अंत तक यानी पीक के दौरान मोहल्लों से ही 90 फीसदी से ज्यादा मरीज निकल रहे थे।

एक्सपर्ट राय : जरूरी नहीं कि हर म्यूटेशन खतरनाक हो, कुछ बदलाव फायदेमंद भी

1. डॉ. नितिन एम नागरकर, डायरेक्टर-रायपुर एम्स
कोरोना वायरस में बदलाव की स्थितियां पहले भी बनती रही है। प्रदेश में वायरस का डेल्टा वैरिएंट मिला था। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इसमें अगर कोई नया बदलाव आएगा तो वह हमेशा खतरनाक ही होगा। एक सुखद स्थिति यह भी है कि डेल्टा वैरिएंट से मुकाबला करने में पूरे देश में फिलहाल लगाई जा रही वैक्सीन कारगर साबित हुई है। इसलिए जरूरी है कि वैक्सीनेशन अगर नहीं करवाया है, तो जरूर करवाएं। दूसरी बात यह है कि वायरस में म्यूटेशन आगे भी आते रहेंगे। इसे लेकर बार-बार चिंतित होने की जरूरत नहीं है।

2. डॉ. अरविंद नेरल, वायरोलॉजिस्ट-मेडिकल कॉलेज
डेल्टा वैरिएंट में नया म्यूटेशन आया है। जरूरी नहीं कि म्यूटेशन हमेशा खतरनाक हो। कई बार वायरस में म्यूटेशन लाभदायक रहता है, वायरस को कमजोर करता है। अभी ऐसा लग रहा है कि डेल्टा वैरिएंट का नया म्यूटेशन कमजोर है। इस वजह से घने इलाके में भी कोरोना के केस बहुत कम हो गए हैं। राजधानी में तो पाजिटिविटी रेट 0.6 प्रतित पर आ गया है, अर्थात 100 टेस्ट में एक से भी कम लोग पाजिटिव निकल रहे हैं। यह कमी जारी रह सकती है, लेकिन सतर्कता जारी रखें क्योंकि इससे खतरनाक स्थिति को रोक सकते हैं।

अभी भी सावधानी की जरूरत
घने शहरी क्षेत्रों में भी संक्रमण में काफी कमी आई है। गंभीर मरीज भी लगातार कम हो रहे हैं। ये अच्छा संकेत है, लेकिन बाजार खुल गए हैं इसलिए लोगों को सावधानी रखनी चाहिए।
-डॉ. आरके पंडा, एचओडी चेस्ट नेहरू मेडिकल कॉलेज

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