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सुविधा:राजधानी में फल व मिठाइयों में केमिकल की जांच अब नई मशीन से

रायपुर2 महीने पहले
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राजधानी में बिकने वाले मिलावटी दूध, खोवा और मिठाइयों की जांच अब यहीं होगी। छह करोड़ की लागत से तीन नई आधुनिक मशीन खरीद ली गई है। मशीनों की मदद से फूड एंड ड्रग विभाग की लैब में तुरंत पता लगेगा कि कौन से फल को जल्दी पकाने के लिए किस तरह के केमिकल का उपयोग किया जा रहा है? खोवे में किस तरह की मिलावट की जा रही है? अभी तक यहां जांच की सुविधा नहीं थी। शंका होने पर सैंपल कोलकाता की लैब भेजा जाता था। कोलकाता और अन्य शहरों की लैब से रिपोर्ट आने में ही कई महीने लग जाते थे। इस वजह से यहां फूड विभाग सैंपल लेने में भी ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाता था। अब सब्जी, फल के जरिए सेहत को बिगाड़ने वाले घातक रसायनों, हैवी मेटल्स और पेस्टीसाइड की जांच रायपुर स्थित फूड एंड ड्रग विभाग की लेबोरेटरी में की जा सकेगी। यहां लैब में करीब छह करोड़ की लागत की तीन नई मशीनें आईसीपी एमएस, एलसीएमएस एमएस और जीसीएमएस मशीनें खरीदी गईं हैं। इनका इंस्टालेशन अंतिम दौर में है। पिछले साल मार्च में ही मशीनें इंस्टाल होने वाली थी, लेकिन कोरोना के कारण प्रक्रिया अटक गई। अब कोरोना संक्रमण कम होने के बाद मशीनों का इंस्टालेशन किया जा रहा है। फरवरी से एडवांस लैब के जरिए मिलावट की जांच शुरु हो जाएगी।

जानवरों को क्या एंटीबायोटिक्स दी जा रही दूध से चलेगा पता : सब्जी, फल में कीटनाशक या पकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जहरीले केमिकल की जांच हो सकेगी। इसी तरह हरी ताजा सब्जी दिखाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रंग की जांच भी प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक के जरिए इन एडवांस मशीनों से की जा सकेगी।
यही नहीं घर तक पहुंचने वाले दूध को बढ़ाने किस तरह की एंटीबायोटिक्स जानवर को दिए जा रहे हैं, इसकी जांच लिक्विड क्रेमेटोग्राफी सपेक्टोमेट्री की जा सकेगी।

किसी खाद्य पदार्थ में सामान्य जांच के जरिए पेस्टीसाइड, हैवी मेटल्स ,लिपिड प्रोफाइल या फैटी एसिड है या नहीं इसका पता नहीं लगाया जा सकता। इसकी जांच के लिए इन एडवांस मशीनों से ये भी संभव हो सकेगा।

सब्जियों में हैवी मेटल्स किडनी कैंसर जैसी बीमारियां
सब्जियों में हैवी मेटल्स जैसे आर्सेनिक, निकिल, मर्करी, केडियम वगैरह की जांच इन तीनों मशीनों से हो सकेगी। सब्जियों के जरिए ये घातक रसायन शरीर में जाकर किडनी और कैंसर जैसी बीमारियां भी पैदा करते हैं।

मशीन के साथ कंपनी के तकनीकिशन भी
जिस कंपनी ने आईसीपी एमएस, एलसीएमएस एमएस और जीसीएमएस तीन मशीनें दी है, उसने इन्हें तीन साल तक ऑपरेट करने के लिए तीन लैब टेक्नीशियन भी मुहैया कराए हैं। ये तीन से पांच साल तक इन मशीनों से दूध, सब्जी, फल की जांच करने के साथ फूड एंड ड्रग विभाग के टेक्नीशियन को ट्रेनिंग भी देंगे।

किस मशीन से किस तरह की होगी जांच
1) आईसीपी एमएस - हैवी मेटल की जांच
2 ) एलसीएमएस एमएस - पेस्टीसाइड घातक रसायनों की जांच
3) जीसीएमएस - फैटी एसिड आदि की जांच

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