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भास्कर एक्सक्लूसिव:राकेश्वर के बदले हिड़मा के लिए सेफ पैसेज चाहते हैं उसके साथी; दंतेवाड़ा SP ने बताया- अगवा करने के बाद जवानों का ब्रेन वॉश करते हैं नक्सली

रायपुर4 दिन पहलेलेखक: सुमन पांडेय
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तस्वीर राकेश्वर की है।  कहा जा रहा है कि बीजापुर मुठभेड़ के बाद  इन्हें अपने साथ लेकर नक्सली गए हैं। अब फोर्स इन्हें सुरक्षित वापस लाने के मिशन पर है। - Dainik Bhaskar
तस्वीर राकेश्वर की है। कहा जा रहा है कि बीजापुर मुठभेड़ के बाद इन्हें अपने साथ लेकर नक्सली गए हैं। अब फोर्स इन्हें सुरक्षित वापस लाने के मिशन पर है।

बीजापुर में जो कुछ हुआ उससे देश स्तब्ध है। नक्सलियों से सीधी मुठभेड़ में पुलिस और CRPF कुल 22 जवान शहीद हो गए और CRPF कोबरा दस्ते के कमांडो राकेश्वर सिंह अभी भी लापता हैं। कुछ मीडिया वालों को नक्सलियों का संदेश मिला कि राकेश्वर उनके कब्जे में है। एक सूचना यह भी है कि नक्सली सरगना हिड़मा पर सुरक्षाबलों का शिकंजा कसता जा रहा है और राकेश्वर के बदले हिड़मा के साथी उसकी सुरक्षा को लेकर कोई सौदा करना चाहते हैं। पहले भी नक्सली पुलिस जवानों को अगवा कर चुके हैं। आखिर क्यों करते हैं नक्सली ऐसा, इसके पीछे की उनकी साजिशों, मांगों के बारे में दैनिक भास्कर को नक्सल प्रभावित जिले दंतेवाड़ा के SP डॉ. अभिषेक पल्लव ने बताया।

दंतेवाड़ा SP इस तरह से बंदी बनाए जाने के बाद पुलिसकर्मियों को नक्सलियों के चंगुल से छुड़ा चुके हैं।उनके सामने पिछले कुछ महिनों में 200 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है।
दंतेवाड़ा SP इस तरह से बंदी बनाए जाने के बाद पुलिसकर्मियों को नक्सलियों के चंगुल से छुड़ा चुके हैं।उनके सामने पिछले कुछ महिनों में 200 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है।

खुफिया जानकारी हासिल करना होता है एक मकसद
डॉ. पल्लव ने बताया कि दंतेवाड़ा में मार्च 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एक सब इंस्पेक्टर, RES और PMGSY के दो सब इंजीनियर को इसी तरह नक्सलियों ने बंदी बना लिया था। इनको नक्सलियों ने अंदरूनी इलाके में घेरकर अगवा किया था। मगर हमारे दबाव के चलते उन्हें दूसरे दिन छोड़ दिया था। सब इंस्पेक्टर से नक्सलियों ने फोर्स की मूवमेंट, कैंप की स्थिति, जवानों की संख्या, खाने-सोने की टाइमिंग, सर्चिंग ऑपरेशन के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की थी।

ब्रेन वाश की कोशिश करते हैं

नक्सली कोशिश करते हैं कि फोर्स का कोई व्यक्ति अगर उनके कब्जे में हैं तो उसका ब्रेन वॉश करें, उसे नौकरी छोड़ने, अपने घर वापस लौटने का दबाव बनाएं। जब भी फोर्स का कोई जवान उनके कब्जे में होता है तो वह इस बात के प्रेशर में रहते हैं कि उसे कोई नुकसान ना पहुंचे। ऐसा अभी भी है। बीजापुर की स्थिति में ये बातें सामने आ रही हैं कि कमांडो घायल अवस्था में है, ऐसे में उसका सही ट्रीटमेंट कराना होगा, दवाएं देना होगा। नक्सली इस बात को जानते हैं कि अगर उनके कब्जे में ऊंच-नीच हुई तो उनकी साजिश का पासा उल्टा पड़ जाएगा।

बस्तर IG सुंदरराज पी इस पूरे मिशन पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा हमारा जिम्मा जवान की सुरक्षित वापसी है।
बस्तर IG सुंदरराज पी इस पूरे मिशन पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा हमारा जिम्मा जवान की सुरक्षित वापसी है।

गांव के किसी घर में हो सकते हैं राकेश्वर
बस्तर IG सुंदरराज पी ने बताया कि इस तरह की सूचनाएं आ रही हैं कि कमांडो राकेश्वर नक्सलियों के कब्जे में है। हमारी टीम सर्चिंग पर है। हमारा मिशन है कि सुरक्षित जवान को वहां से बाहर निकाला जाए। इस बात की संभावना है कि किसी ग्रामीण के घर में राकेश्वर को रखा गया हो। हम हर संभावना पर पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में नक्सली गांव में रहने वाले अपने साथियों की मदद ले सकते हैं। पहले के कुछ मामलों में भी अपहरण किए गए लोगों को नक्सलियों ने गांवों में रखा था।

नक्सली कमांडर हिड़मा की ये तस्वीर साल 2016 में आई थी। NIA के मुताबिक अब इसकी उम्र 51 के आस-पास होगी।
नक्सली कमांडर हिड़मा की ये तस्वीर साल 2016 में आई थी। NIA के मुताबिक अब इसकी उम्र 51 के आस-पास होगी।

हिड़मा के लिए सेफ पैसेज की हो सकती है डिमांड
बीजापुर के जोनागुड़ा में शनिवार को हिड़मा और बड़ी तादाद में नक्सलियाें के छिपे होने की जानकारी पर ही फोर्स रवाना हुई थी। पिछले कुछ माह से फोर्स हिड़मा को ही टारगेट कर सर्चिंग आपरेशन चला रही है। बस्तर में लगातार खुलते सुरक्षा बलों के कैंप और सतत सर्चिंग से नक्सलियों का दायरा छोटा होने लगा है। ऐसे में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी की एक रणनीति बस्तर के सबसे दुर्दांत नक्सल नेता हिड़मा को बचाने की हो सकती है। नक्सल इंटेलिजेंस सूत्रों ने दैनिक भास्कर को बताया कि बड़े कमांडर हिड़मा को सुरक्षित किसी दूसरे प्रदेश निकलने देने और मुठभेड़ में घायल नक्सलियों को भी सुरक्षित निकाल ले जाने के लिए कमांडो राकेश्वर को बंदी बनाया होगा। राकेश्वर की आड़ लेकर नक्सलियों को भागने छुपने और फोर्स को उलझाने का वक्त मिलेगा। मगर स्थानीय पुलिस और CRPF राकेश्वर को सुरक्षित निकालने के मिशन पर अलर्ट है।

दूसरी तरफ जम्मू में राकेश्वर का पूरा परिवार परेशान है। विंग कमांडर अभिनंदन की तरह राकेश्वर को वापस लाने जाने की बात परिजन ने कही है।
दूसरी तरफ जम्मू में राकेश्वर का पूरा परिवार परेशान है। विंग कमांडर अभिनंदन की तरह राकेश्वर को वापस लाने जाने की बात परिजन ने कही है।

सुरक्षित हैं राकेश्वर
बस्तर पुलिस को मिल रहे खुफिया इनपुट के आधार पर राकेश्वर थोड़े से घायल लेकिन सुरक्षित हैं। रविवार से लेकर अब तक फोर्स की कई टीमें सर्चिंग ऑपरेशन चलाए हुए हैं। पुलिस गांव के अपने खुफिया नेटवर्क से भी राकेश्वर से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगी है। अफसरों को उम्मीद है कि एक से दो दिन के भीतर राकेश्वर को सकुशल वापस लाने में कामयाबी मिलेगी। नक्सलियों पर इसे लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

सोनी सोरी पिछली भाजपा सरकार के वक्त नक्सल मामले में गिरफ्तार की गईं थीं। उनका कहना है कि जेल में इन्हें यातनाएं दी गईं थी। अब सोनी आदिवासी अधिकारों के लिए काम करती हैं।
सोनी सोरी पिछली भाजपा सरकार के वक्त नक्सल मामले में गिरफ्तार की गईं थीं। उनका कहना है कि जेल में इन्हें यातनाएं दी गईं थी। अब सोनी आदिवासी अधिकारों के लिए काम करती हैं।

सोनी सोरी ने की जवान की रिहाई की अपील
बस्तर की सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी जेल बंदी रिहाई समिति से जुड़ी हैं। इस समिति ने अपनी संवेदना प्रकट करते हुए कहा है कि हम सदैव से ही हिंसा के विरोधी रहे हैं चाहे हिंसा किसी भी तरफ से क्यों न किया जाए। हम न ही हरे और काले रंग के कपड़ों वाले वर्दी का समर्थन करते हैं न ही हम खाकी और दूसरे प्रकार की वर्दी की हिंसा का समर्थन करते हैं। जान तो दोनों तरफ जाती है। हम सिर्फ मानवता और इंसानियत के नाते नक्सलियों से विनम्र अपील करते हैं कि CRPF जवान राकेश्वर सिंह मनहास जो वर्तमान में आपके पास है उन्हें सकुशल रिहा करें।

अगर किसी भी कारण से जवान की वापसी में देरी होती है तो जेल बंदी रिहाई समिति 7 अप्रैल को एक टीम गठित कर घटनास्थल के जंगलों की ओर आगे बढ़ेगी और बिना किसी भी विषय पर टिप्पणी करते हुए सिर्फ और सिर्फ जवान की रिहाई की मांग को लेकर जवान को वापस लाने के उद्देश्य से नक्सलियों के प्रतिनिधि मंडल से बात करने के लिए आगे बढ़ेगी।

नक्सलियों ने माना उनके 5 उग्रवादी मारे गए
नक्सलियों की ओर से जारी प्रेसनोट में उन्होंने पुलिस मुठभेड़ में 5 उग्रवादियों के मारे जाने की बात स्वीकार की है। मारे गए उग्रवादियों के नाम नूपो सुरेश निवासी मीनागट्‌टा, बस्तर, ओड़ी सन्नी निवासी एलमगोंडा, बस्तर, कोवासी बदरू निवासी कोड़ोम, दरभा, पद्दम लखमा निवासी चिकपाल, दरभा और माड़वी सुक्का निवासी जीरागुड़ा, जगरगुंडा शामिल हैं। नक्सलियों ने कहा है कि पुलिस का जवान उनके पास सुरक्षित है। सरकार वार्ताकारों के नाम की घोषणा करे, तब हम उसे सौंप देंगे।

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