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छत्तीसगढ़ में कोरोना:गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 7 दिन का लॉकडाउन; रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल

रायपुर3 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में कोरोना से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में 107 लोगों की मौत हुई है। हफ्तेभर से संक्रमितों की संख्या बढ़ रही थी, लेकिन एक साथ 100 से ज्यादा मौतें नहीं हुई थीं। हर रोज औसतन 95 कोरोना संक्रमितों की मौत हो रही है। सिर्फ 7 दिनों में 668 लोगों की जान गई है।

हालात बिगड़ने की वजह से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में लॉकडाउन लगाने का फैसला किया गया है। 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे से 21 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक GPM जिले में सब कुछ बंद रहेगा। 28 जिले वाले छत्तीसगढ़ में अब तक 17 जिलों में लॉकडाउन का ऐलान किया जा चुका है। इनमें शामिल दुर्ग जिले में लॉकडाउन को 19 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है। पहले यहां 6 से 14 अप्रैल तक लॉकडाउन की घोषणा की गई थी।

अंबेडकर अस्पताल में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल
कोरोना के बीच प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में मंगलवार सुबह से जूनियर डॉक्टर्स ने हड़ताल कर दी है। जूनियर डॉक्टर्स सिर्फ कोविड वार्ड में सेवाएं दे रहे हैं। अपनी मांगों को पूरा करने के लिए इन्होंने 18 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया है। इनका कहना है कि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो सभी इमरजेंसी सर्विस और कोविड वार्ड की ड्यूटी करना भी बंद कर देंगे।

हर रोज बेहोश होते हैं डॉक्टर, सुधार की मांग कर थक चुके
कोविड वार्ड में काम करने वाले एक जूनियर डॉक्टर ने दैनिक भास्कर को बताया कि आखिर क्यों इस आपदा के माहौल में डॉक्टर हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए। डॉक्टर ने बताया कि अंबेडकर अस्पताल के तीसरे माले में PPE किट पहनकर ड्यूटी करने के दौरान डॉक्टर बेहोश हो जाते हैं। ऐसा गर्मी की वजह से होता है। इस बार गंभीर मरीजों की संख्या ज्यादा है, कई घंटों की ड्यूटी के बाद कोई रिलेक्सेशन नहीं मिलता, परेशान लोगों की गालियां मिलती हैं वो अलग।

डॉक्टर ने बताया कि अच्छी क्वालिटी की PPE किट, मास्क ग्लव्स और आई वियर नहीं मिल रहे। मेडिकल वेस्ट को डिस्पोज करने के सही इंतजाम नहीं है। डॉक्टर्स को एक्स्ट्रा ड्यूटी का कोई इंसेंटिव भी नहीं दिया जा रहा। ये सारी बातें पिछले 1 साल से सरकार को बता रहे हैं, अब मजबूरन हमें कोविड को छोड़ दूसरी सर्विस बंद करनी पड़ी हैं।

फोटो अंबेडकर अस्पताल की है। यहां हर रोज कोविड के 50 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। सुविधाओं की कमी से गुस्साए डॉक्टर्स ने हड़ताल कर दी है।
फोटो अंबेडकर अस्पताल की है। यहां हर रोज कोविड के 50 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। सुविधाओं की कमी से गुस्साए डॉक्टर्स ने हड़ताल कर दी है।

इन वजहों से लोगाें की हो रहीं मौतें
12 अप्रैल की रात को सरकार की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि मरने वालों में ज्यादातर सांस में तकलीफ के लक्षण से परेशान थे। 57 लोगों की जान कोविड के गंभीर संक्रमण के चलते गई। 50 ऐसे लोगों की भी मौत हुई जिन्हें दूसरी बीमारी थी। इन लोगों में दो बीमारी कॉमन नजर आई वो थीं वो हैं हाइपरटेंशन और डायबिटीज। अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टर्स ने बताया कि इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों की मौत ज्यादा हो रही है, इनकी स्थिति बिगड़ रही है। पिछले सप्ताह हुई 25 मौतों की जानकारी सोमवार को सरकार के पास आई थी, इनमें 11 कोविड और 14 कोरोना के साथ दूसरी बीमारियों से भी पीड़ित थे।

फोटो रायपुर के अंबेडकर अस्पताल की हैष। यहां मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से बेड मिलने में दिक्कतें हो रही हैं।
फोटो रायपुर के अंबेडकर अस्पताल की हैष। यहां मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से बेड मिलने में दिक्कतें हो रही हैं।

दुर्ग के रेलवे स्टेशन पर निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी
रेलवे सुरक्षाबलों की ओर से सोमवार को ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों में रोको-टोको अभियान चलाया गया। इसके तहत दुर्ग, पावर हाउस, भिलाई-3 जैसे स्टेशनों पर यात्रियों को सही तरीके से मास्क पहनने के तरीके बताए गए। इसके अलावा कोरोना की जांच जरूरी किए जाने की जानकारी दी गई। यात्रियों को बताया गया कि बिना जांच ट्रेन में एंट्री नहीं मिलेगी। स्टेशन से बाहर निकलते समय हर यात्री को निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी। इसके अलावा रेलवे स्टेशन पर कोविड टेस्ट का भी बंदोबस्त किया जा रहा है। दुर्ग में पिछले 24 घंटे में 1,591 नए मरीज मिले हैं और 11 लोगों की जान गई है। यहां अब 17,878 एक्टिव मरीज हैं।

24 घंटे में 13,576 नए मरीज मिले
छत्तीसगढ़ में सोमवार की रात 13, 576 नए कोरोना संक्रमित मिले। इस वजह से अब प्रदेश में एक्टिव मरीजों की संख्या 98,856 हो चुकी है। सोमवार को राज्य में 45,997 सैंपल जांचे गए। प्रदेश में अब तक कुल 5,031 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण की वजह से हो चुकी है। सरकार का दावा है कि संक्रमितों की पहचान के लिए हर दिन 40 हजार से 50 हजार सैंपलों की जांच की जा रही है। इसे और बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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