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छत्तीसगढ़ में नदियां उफान पर:गरियाबंद का राजधानी से संपर्क कटा, रायपुर-जगदलपुर हाईवे भी बंद, सात जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट; CM बोले, किसानों की चिंता दूर हुई

रायपुर8 दिन पहले

पिछले सप्ताह तक सूखे की आशंका से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अब लोग भारी बारिश की वजह से लोग परेशान हैं। पिछले तीन दिनों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। नदी-नाले उफान पर हैं। शहरों-गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई फीट तक पानी बह रहा है। गरियाबंद को रायपुर से जोड़ने वाले राजमार्ग को बंद कर दिया गया हैं। धमतरी के बाद रायपुर-जगदलपुर हाईवे को बंद कर दिया गया है। जगदलपुर जाने के लिए रूट डायवर्ट कर वाहन निकाले जा रहे हैं। मौसम विभाग ने प्रदेश के अधिकांश जिलों में भारी बरसात और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। सात जिलों के लिए तो रेड अलर्ट जारी किया गया है।

प्रसिद्ध पर्यटन स्थल घटारानी के पास बाढ़ का भयावह रूप।
प्रसिद्ध पर्यटन स्थल घटारानी के पास बाढ़ का भयावह रूप।

रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा, राजनांदगांव, बालोद, दुर्ग और कांकेर जिलों और उनसे लगे जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी से अति भारी बरसात की चेतावनी दी है। इन इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। वहीं रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, बलौदा बाजार, रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, नारायणपुर और कोण्डागांव जिलों में भारी वर्षा की कम स्तर की चेतावनी आई है।

कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों में एक-दो स्थानों पर भी भारी बरसात की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग की यह चेतावनी अगले 24 घंटों के लिए है। इनमें से अधिकतर इलाकों में बाढ़ के हालात पहले से बने हुए हैं।

गरियाबंद के पास इस तरह बाढ़ में डूब गई है सड़क। कई रास्ते बंद कर दिए गए हैं, गांवों को खाली कराया जा रहा है।
गरियाबंद के पास इस तरह बाढ़ में डूब गई है सड़क। कई रास्ते बंद कर दिए गए हैं, गांवों को खाली कराया जा रहा है।

सिकासेर बांध के 22 में से 17 गेट खोले गए
भारी बारिश के बीच बांध भी उफान पर हैं। रात में प्रशासन ने सिकासेर बांध से 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का फैसला लिया है। प्रभारी अधिकारी उत्तम सिंह ध्रुव ने बताया कि बांध के 22 में से 17 गेट को खोल दिए गए हैं।वेस्ट वियर से भी पानी छोड़ा जा रहा है। बांध में लगे बिजली उत्पादन यूनिट को भी चालू कर दिया गया है। इससे पानी सीधे पैरी नदी में जाता है।

गरियाबन्द मुख्यालय में जेल रोड, महाविद्यालय, मजरकटा, पैरी कॉलोनी ,कोकड़ी आमदी के इलाके में घुटने भर से ज्यादा पानी भर गया है। वहीं, नदी किनारे बसे गांव पटोरा, चिखली, पाथर मोहन्दा, भिलाई, नहरगांव, मालगांव, बारूका, जलकुंभी, गाहदर में पानी घुस गया है। प्रशासन ने नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले गांवों को खाली कराना शुरू किया है। प्रशासन को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत के लिए आदेश दिया गया है।

धमतरी में घरों में घुसा बरसाती पानी।
धमतरी में घरों में घुसा बरसाती पानी।

धमतरी में आज सुबह से भारी बारिश हो रही है, बारिश के कारण शहर के प्रमुख सड़क आमापारा, बनिया पारा सहित निचली बस्तियों में करीब 4 फीट तक पानी भर गया है। रायपुर से जगदलपुर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे पर शहर के पुराना बस स्टैंड के पास भी 3 फीट तक पानी भर गया है। इस वजह से नेशनल हाईवे को बंद करके छोटी-बड़ी गाड़ियों को सिहावा रोड से विंध्यवासिनी मंदिर गोकुलपुर होते हुए जाने को कहा जा रहा है। शहर में सड़क किनारे की दुकानों के अंदर पानी भर गया है।

धमतरी शहर की सड़कों पर इस तरह पानी जमा हो गया है।
धमतरी शहर की सड़कों पर इस तरह पानी जमा हो गया है।

राजिम में कुलेश्वर महादेव मंदिर का चबूतरा डूबा
राजिम में त्रिवेणी संगम के बीच बना प्रसिद्ध कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पानी से घिर गया है। उसका चबूतरा करीब-करीब डूब चुका है। इसकी वजह से श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना बंद हो गया है। बताया जा रहा है- पिछले तीन-चार सालों में राजिम स्थित महानदी, सोंढुर और पैरी नदियों के पवित्र संगम में ऐसी बाढ़ नहीं आई थी। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग राजिम पुल पर पहुंचकर संगम में बाढ़ का नजारा देख रहे हैं।

राजिम त्रिवेणी संगम में बना कुलेश्वर महादेव मंदिर तक जाने का रास्ता पूरी तरह डूब चुका है।
राजिम त्रिवेणी संगम में बना कुलेश्वर महादेव मंदिर तक जाने का रास्ता पूरी तरह डूब चुका है।

कोरबा में पुल के ऊपर से बहा नाला

कोरबा जिले में सुबह से ही बारिश हो रही है। 24 घंटे में 20 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की गई है। सबसे अधिक करतला तहसील में 80 मिलीमीटर बारिश हुई है। जिसकी वजह से नदी नाले उफान पर है। घिनारा के पास नाला पुल के ऊपर पानी बह रहा है। यही हाल सिवनी से सुखरीकला मार्ग पर जमड़ी नाला पुल से 2 फीट ऊपर पानी बह रहा है।

कांकेर के अंतागढ़ के पास बाढग्रस्त पुल के ऊपर से गुजरने की खतरनाक कोशिश जारी है।
कांकेर के अंतागढ़ के पास बाढग्रस्त पुल के ऊपर से गुजरने की खतरनाक कोशिश जारी है।

अंतागढ़ से कोयलीबेड़ा का रास्ता कटा

कांकेर जिले के अंतागढ़ अंचल में रात से ही तेज बारिश हो रही है। मेंढकी नदी उफान पर है। इसकी वजह से अंतागढ़ से कोयलीबेड़ा का संपर्क टूट गया है। कोयलीबेड़ा से कई गांवों का संपर्क भी कट गया है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज किए हैं। निचले इलाकों के गांवों को सतर्क रहने को कहा जा रहा है।

भाटापारा में सेमरिया घाट पुल को छूकर बह रही शिवनाथ

पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बरसात की वजह से भी भाटापारा में भी बाढ़ के हालात बन रहे हैं। सेमरिया घाट के पास शिवनाथ नदी पुल को छूकर बह रही है। आशंका जताई जा रही है, ऐसे ही पानी बढ़ता रहा तो पुल नदी की धारा में डूब जाएगा।

यह सेमिरिया घाट के पास शिवनाथ नदी के बहाव का नजारा है।
यह सेमिरिया घाट के पास शिवनाथ नदी के बहाव का नजारा है।

रायपुर में ही बरस गया 504 MM पानी
सोमवार से आज सुबह के 24 घंटे में रायपुर में भी बरसात का रिकॉर्ड टूटा है। जिले में 504.4 MM बरसात दर्ज हुई है। इसमें गोबरा नवापारा तहसील में सबसे अधिक 130.3 MM पानी बरसा है। जिले की तहसीलों में रायपुर में 92.3, आरंग में 82, अभनपुर में 80, खरोरा में 61.5 और तिल्दा में सबसे कम 58.3 MM पानी गिरा है। इसकी वजह से अब तक की वर्षा का कोटा लगभग पूरा हो गया है। बताया जा रहा है, पिछले 10 वर्षों में जिले में इतना पानी कभी नहीं बरसा।

रायपुर तहसील में सामान्य से 104 प्रतिशत, गोबरा नवापारा में 138 प्रतिशत, खरोरा का 98 प्रतिशत और अभनपुर में बरसात का प्रतिशत 95 तक हो गया है। सूखे से सबसे अधिक प्रभावित चार तहसीलों में शुमार आरंग में अब जाकर 50 प्रतिशत बरसात का निशान छुआ है। वहीं तिल्दा में 81 प्रतिशत बरसात हो चुकी।

CM बोले, जहां बचाव की जरूरत वहां टीम काम कर रही हैं
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति पर कहा- छत्तीसगढ़ में अच्छी बारिश हो रही है, इससे किसानों की चिंता दूर हो गई है। कुछ जगह बाढ़ की स्थिति है। बचाव के लिए टीमें भेज दी गई हैं। अधिकारी वहां की निगरानी कर रहे हैं। जब अचानक बहुत तेज बारिश हो तो कोई सिस्टम काम नहीं करेगा। ऐसे में जलभराव होता है, लेकिन स्थिति सामान्य भी बन जाती है। ऐसे वक्त पर लोगों को यात्रा नहीं करनी चाहिए। जो सड़क सुरक्षित है, उसीका इस्तेमाल करना चाहिए। नगर-निगमों के अधिकारी-कर्मचारी व जनप्रतिनिधि जलभराव की स्थिति को देखे और निकासी की तत्काल व्यवस्था करें।