बेबाकी से विवादों में रहते थे जूनियर जूदेव:निशानेबाजी के शौकीन थे युद्धवीर; कलेक्टर से कहा था औकात में रहें वरना सुधार दूंगा, BJP की खामियां भी गिनाईं

रायपुर3 महीने पहले
जशपुर के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान युद्धवीर सिंह जुदेव।

जशपुर राज परिवार के सबसे छोटे बेटे और चंद्रपुर के पूर्व भाजपा विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव का सोमवार तड़के निधन हो गया। वो लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे। जशपुर में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सोमवार शाम या मंगलवार सुबह ये कार्यक्रम हो सकता है। स्व. दिलीप सिंह जूदेव के बेटे होने की वजह से बचपन से ही युद्धवीर ने सियासी माहौल देखा। पिता के सामने अच्छे अच्छों को झुकते देखा।

जशपुर के लोग और युद्धवीर के सम्बंध इस तस्वीर से जाहिर हैं।
जशपुर के लोग और युद्धवीर के सम्बंध इस तस्वीर से जाहिर हैं।

जशपुर और आसपास के इलाके की जनता ने भी हमेशा जूदेव परिवार के सदस्यों को पलकों पर बिठाए रखा। युद्धवीर को भी जनता से वैसा ही प्यार मिला, लेकिन पिछले कुछ सालों से हमेशा युद्धवीर विवादों में रहे। भाजपा की खामियां खुलकर गिनवाईं, कांग्रेस के मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तारीफ करने से भी पीछे नहीं रहे। स्थानीय अफसरों को भी हड़काने की वजह से जुनियर जूदेव सुर्खियों में छाए रहते थे।

लोगों के बीच अक्सर पहुंचकर उनकी समस्याओं पर जूदेव बात करते थे, तब भी जब वो विधायक नहीं थे।
लोगों के बीच अक्सर पहुंचकर उनकी समस्याओं पर जूदेव बात करते थे, तब भी जब वो विधायक नहीं थे।

कार्यक्रम का बहिष्कार कर कहा था- औकात में रहें IAS

बात साल 2020 के जनवरी महीने की है। पत्थलगांव नगर पंचायत में लंबे अरसे बाद यहां कांग्रेस को जीत मिली थी। कुछ भाजपा पार्षद भी जीतकर आए। पंचायत भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने युद्धवीर भी पहुंचे थे। जब नव निर्वाचित पार्षदों के सम्मान की बारी आई तो सिर्फ कांग्रेसियों का ही सम्मान किया जा रहा था। इसे लेकर जूदेव की अगुवाई में भाजपा के स्थानीय नेताओं ने नगर पंचायत में जमकर हंगामा किया। कार्यक्रम बीच में छोड़कर जूदेव बाहर निकले और पत्रकारों से कहा इस कार्यक्रम में अफसर कांग्रेस की तरफदारी कर रहे हैं। चाहे SDM हो, कलेक्टर हों या कोई भी IAS अफसर हो अपनी औकात में रहे नहीं तो उन्हें सबक सिखाने के लिए युद्धवीर सिंह जूदेव ही काफी है।

युद्धवीर के पिता के जमाने से विष्णुदेव साय करीबी रहे हैं।
युद्धवीर के पिता के जमाने से विष्णुदेव साय करीबी रहे हैं।

भाजपा को बताया था व्यापारियों की पार्टी, विष्णुदेव साय पर किया था कटाक्ष
चंद्रपुर सीट से पूर्व विधायक युद्धवीर ने पिछले साल कहा था कि भाजपा में छत्तीसगढ़िया माटी पुत्रों की कमी है। छत्तीसगढ़ियावाद को लेकर उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं हमारे दल में वो कमी रही है कि जिनकों छत्तीसगढ़ से मतलब नहीं है, जो व्यापार में ज्यादा रुचि रखते हैं वो पार्टी में ज्यादा आगे थे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय को लेकर जूदेव ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा था- विष्णुदेव साय पहले जशपुर से जड़ी बूटी लेते थे। अब वे रायपुर के डॉक्टर से दवा लेने लगे हैं। शायद उनका विश्वास आयुर्वेद पर कम हो गया है। उन्होंने मरवाही उपचुनाव में साय को चुनाव लड़ने के लिए पत्र भी लिखा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साय ने कहा था- स्व. दिलीप सिंह जूदेव मेरे आदर्श हैं। उस परिवार से मौखिक और पत्र के जरिए बहुत सी बातें बताई जाती हैं। राज परिवार मेरा शुभ चिंतक है और हमेशा मेरे हित में सोचता है।

हथियारों का शौक भी था।
हथियारों का शौक भी था।

उद्योगपतियों को धमकाते हुए कहा था- बीमा करवा लें

जनवरी 2019 में युद्धवीर सिंह जूदेव की एक फेसबुक पोस्ट बेहद चर्चा में थी। उन्होंने खनन से जुड़े उद्योगपतियों के लिए पोस्ट में लिखा- हमारी चट्टानों को चीरने से पहले अपना जीवन बीमा करवा लें। सन्ना क्षेत्र के निवासी, जो मुश्किल वक्त में साथ देते हैं, सुना है कोई हेलिकॉप्टर लगातार ऊपर से गुजर रहा है। सरकार कोई भी हो लेकिन सतर्क हो जाएं। इससे पहले युद्धवीर सिंह चन्द्रपुर सीट से विधायक चुने गए थे। बीते विधानसभा चुनावों में युद्धवीर की जगह भाजपा ने उनकी पत्नी संयोगिता को टिकट दी, लेकिन वे चुनाव में हार गई थीं।

पत्नी संयोगिता के साथ युद्धवीर।
पत्नी संयोगिता के साथ युद्धवीर।

पत्नी से प्यार अक्सर करते थे जाहिर

युद्धवीर सिंह जूदेव को पत्नी संयोगिता से बेहद प्यार था और इसे वो अकसर बयां भी करते थे। अपनी एक फेसबुक पोस्ट में तस्वीर साझा करते हुए पत्नी के लिए युद्धवीर ने लिखा - प्रिय जीवन संगिनी, आज आए हो और कल चले जाओगे, ये मोहब्बत मुझे गवारा नहीं, उम्र भर का सहारा बनो तो बनो, चार दिन का सहारा सहारा नहीं। 8 वर्ष पहले मुलाकात में मैंने पूछा था ये सवाल, धन्यवाद आपका संयोगिता, मेरे जैसे नदी के विपरीत तैरने वाले का जीवन भर दोस्त बनने के लिए।

पिता के साथ युद्धवीर।
पिता के साथ युद्धवीर।

पिता की तरह बनने की कोशिश

दिलीप सिंह जूदेव जशपुर में हावी होते मिशनरियों पर भारी पड़े। 90 के दशक में यहां धर्मांतरण के काफी मामले थे। सीनियर जूदेव ऐसे आदिवासियों की घर वापसी कराया करते थे। हिंदुत्व की जड़ें मजबूत करने के लिए जूदेव परिवार को जाना जाता है। इसी माहौल को देखते हुए युद्धवीर सिंह बड़े हुए। 1998 में शुरुआती दिनों में बजरंग दल में काम किया फिर साल 2000 में भाजपा में आए और युवा मोर्चा के नेता बने। हिंदुत्व को लेकर युद्धवीर सिंह जूदेव ने भी वैसा ही तेवर दिखाया जैसे उनके पिता के थे। कुछ महीने पहले ही युद्धवीर सिंह ने बहुजन हिंदू समाज परिषद नाम का संगठन खड़ा किया था।

युद्धवीर के शाही ठाठ में कोई कमी नहीं थी।
युद्धवीर के शाही ठाठ में कोई कमी नहीं थी।

1 मार्च 1982 को जन्मे युद्धवीर सिंह जूदेव की पत्नी संयोगिता राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, इनकी एक बेटी है। युद्धवीर सिंह साल 2005 में दुलदुला जिला पंचायत के उपाध्यक्ष बने। 2007 में उन्हें प्रदेश भाजयुमो का उपाध्यक्ष बनाया गया। 2008 में पहली बार युद्धवीर सिंह ने चंद्रपुर से विधानसभा चुनाव जीता था। भाजपा सरकार के वक्त ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष भी रहे। साल 2012 में युद्धवीर सिंह के सबसे बड़े भाई शत्रुंजय प्रताप जूदेव का निधन हो गया था। इसके बाद अगस्त 2013 में पिता दिलीप सिंह जुदेव की मौत हुई। युद्धवीर के निधन के बाद जशपुर राज परिवार का प्रमुख चेहरा उनके बड़े भाई और दिलीप सिंह जूदेव के मंझले बेटे प्रबल प्रताप जूदेव के कंधों पर इस इलाके में भाजपा की सियासी जिम्मेदारी होगी।

मां और पिता के बीच में बंदूक लिए बैठे हैं युद्धवीर।
मां और पिता के बीच में बंदूक लिए बैठे हैं युद्धवीर।
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