माओवादियों का शांतिवार्ता प्रस्ताव:छत्तीसगढ़ सरकार को चिट्‌ठी पर भरोसा नहीं, औपचारिक प्रस्ताव का इंतजार, बंदूक छोड़ने की शर्त भी

रायपुर7 महीने पहले
आंध्र प्रदेश में दबाव बढ़ने पर माओवादियों ने 80 के दशक में बस्तर क्षेेत्र को अपने संगठन का आधार बनाया था। उनकी गतिविधियों की वजह से अलग राज्य बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ का यह इलाका शांत नहीं हो पाया है।
  • सरकार के प्रवक्ता रविंद्र चौबे ने कहा-प्रस्ताव आए तो करेंगे विचार
  • एक दिन पहले माओवादियों के प्रवक्ता ने बातचीत का प्रस्ताव दिया था

छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने सरकार के साथ शांतिवार्ता के लिए जो पत्र जारी किया था। उसपर सरकार को ही भरोसा नहीं है। सरकार के प्रवक्ता और प्रदेश के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने आज कहा, उस पत्र पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वे सरकार को कोई प्रस्ताव दें तो उसपर विचार किया जाएगा।

कृषि, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने आज कहा, अभी तक जो बातें सामने आई हैं। वह केवल कयास है कि ऐसी चिट्‌ठी नक्सलवादियों ने जारी की है। सरकार तक इस तरह का कोई ऑफर आएगा उसके बाद ही बातचीत हो सकती है। कृषि मंत्री ने कहा, सरकार पहले भी कह चुकी है कि ऐसी किसी वार्ता के लिए सबसे पहले उन्हें बंदूक छोड़ना होगा। तभी आगे बात हो पाएगी। एक दिन पहले गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा था, उनके पास तक अभी पत्र नहीं पहुंचा है। पत्र मिलने पर मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद इस पर अगले कदम का फैसला लिया जाएगा।

एक दिन पहले भाकपा माओवादी की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प की ओर से जारी पत्र में कहा था। जनता की भलाई के लिए वे सरकार के साथ बातचीत को तैयार हैं।

बातचीत के लिए माओवादियों की भी शर्त

सरकार के साथ बातचीत के लिए माओवादियों ने तीन शर्तें प्रस्तावित की हैं। इनमें संघर्षरत क्षेत्रों से सशस्त्र बलों को वापस बुलाने, माओवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध हटाने और उनके जेल में बंद नेताओं को रिहा करने की शर्त प्रमुख रूप से शामिल है। माओवादियों ने कहा है कि इसके बिना बातचीत का माहौल नहीं बनेगा।

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