भ्रष्ट बाबू का ऑफर, सैलरी चाहिए तो बकरा-भात खिलाओ!:छग में 8 माह से रोक रखा है शिक्षिका का वेतन, मानसिक रूप से हो चुकी परेशान, CMO तक शिकायत फिर भी सुनवाई नहीं

रायपुर6 महीने पहले
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रीना इसी स्कूल में कॉमर्स की टीचर हैं। - Dainik Bhaskar
रीना इसी स्कूल में कॉमर्स की टीचर हैं।

बलौदा बाजार जिले के कसडोल ब्लॉक में गांव है बया। यहां की सरकारी स्कूल की एक टीचर को वेतन इसलिए नहीं मिल रहा क्योंकि वह अपने अफसरों को घूस देकर खुश नहीं कर पा रही। तरह-तरह के नियमों का हवाला देकर शिक्षिका का वेतन रोक दिया गया है। मानसिक रूप से परेशान इस शिक्षिका ने कई जगहों पर अफसरों की मनमानी की शिकायत भी की है, मगर अब तक इनके साथ न्याय करने को कोई आगे नहीं आया है। इनके इलाके का क्लर्क हरीश पालेश्वर इनसे कहता है, 'बकरा-भात (मीट और चावल) की दावत दो तो तुम्हारा काम करूंगा। इंकार करने पर बदसलूकी झेलनी पड़ती है।'

संविलियन के बाद से परेशानी

भ्रष्ट सरकारी सिस्टम से परेशानी का सबक सीख रही महिला टीचर का नाम रीना ठाकुर है। रीना ने दैनिक भास्कर को बताया, 'पिछले 8 महीनों से मैं सरकारी नौकरी होने के बाद भी फ्री में ही बच्चों को पढ़ा रही हूं। मुझे वेतन नहीं दिया जा रहा है। बया के अधिकारी आर जगत, उनके क्लर्क हरीश पालेश्वर मुझे वेतन जारी नहीं कर रहे हैं। ये हाल तब से है जब से साल 2020 नवंबर के महीने में मेरा शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया है।'

नियमों का हवाला दे रहे, ज्यादा पूछने पर जान से मारने की धमकी दी

रीना ने बताया कि शुरुआत में उनके नाम की गड़बड़ी बताकर वेतन रोका गया। रीना शादी से पहले उर्वाशा सरनेम लिखती थीं अब ठाकुर। इसी को आधार बनाकर अफसर परेशान करते रहे। ब्लॉक एजुकेशन अफसर के दफ्तर जाकर नाम की त्रुटि को बदला लिया मगर अफसरों ने तब भी वेतन नहीं दिया। इसके बाद रीना ने बताया कि क्लर्क हरीश ने एक बार शराब पीकर उसे जान से मारने की धमकी भी दी। इन घटनाओं की वजह से रीना मानसिक रूप से परेशान महसूस कर रही हैं। लोक शिक्षण संचालनालय में भी शिकायत दे चुकी हैं मगर इन्हें वेतन नहीं मिला है।

CMO पहुंची शिकायत
शिक्षक संघ के नेता विवेक दुबे ने कहा कि DDO इस मामले में पूरी तरह से दोषी है और वही जानबूझकर अब महिला कर्मचारी को परेशान कर रहे हैं। इसी प्रकार के प्रकरणों में संचालक डीपीआई ने जो निराकरण दिया था उससे संबंधित समस्त जानकारी उनको पहले ही मैंने खुद उपलब्ध करा दी थी। इसके अतिरिक्त जिला कोषालय अधिकारी से भी मेरी बात हुई और उन्होंने भी कोषालय में बिल पास करने को निर्देशित किया है लेकिन प्राचार्य ने जानबूझकर बिल लगाया ही नहीं है और अनावश्यक रूप से महिला शिक्षिका को परेशान कर रहे हैं। हम इस मामले की शिकायत अब कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक कर रहे हैं।

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