हाथी रिजर्व के नए प्रस्ताव पर विवाद:टीएस सिंहदेव ने सीएम को लिखा है - मैंने 450 वर्ग किमी करने को कभी नहीं कहा, उन जंगलों में यूपीए सरकार का "NO GO AREA' वाला निर्णय लागू किया जाए

रायपुर5 महीने पहले
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टीएस सिंहदेव ने इस पत्र में वन विभाग के नए प्रस्ताव की भाषा और आशय पर आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही NO GO AREA वाला निर्णय लागू करने का सुझाव देकर नई बहस छेड़ दी है। - Dainik Bhaskar
टीएस सिंहदेव ने इस पत्र में वन विभाग के नए प्रस्ताव की भाषा और आशय पर आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही NO GO AREA वाला निर्णय लागू करने का सुझाव देकर नई बहस छेड़ दी है।

उत्तर छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित लेमरु हाथी रिजर्व को 80 प्रतिशत तक छोटा करने की वन विभाग की कोशिशों पर विवाद खड़ा हो गया है। वन विभाग ने जिन जनप्रतिनिधियों के अनुरोध को आधार बनाकर 1995 वर्ग किमी के हाथी रिजर्व को 450 वर्ग किमी करने की तैयारी की है, उसपर सवाल खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर बताया है कि उन्होंने ऐसा करने को कभी कहा ही नहीं। उन्होंने तो इन जंगलों को NO GO AREA घोषित करने का भी सुझाव दिया था जिसका निर्णय केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने लिया था।

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने 30 जून को यह पत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भेजा है। इसमें वन विभाग के उस पत्र का संदर्भ दिया गया है, जिसमें सिंहदेव और क्षेत्र के सात जनप्रतिनिधियों के अनुरोध पर हाथी अभयारण्य का क्षेत्र 450 वर्ग किमी तक सीमित रखने की बात कही गई है। सिंहदेव ने लिखा है, उस पत्र से ऐसा लगता है कि मेरे द्वारा जनभावनाओं को ध्यान में रखकर यह अनुरोध किया गया है कि लेमरु हाथी रिजर्व का क्षेत्रफल 450 वर्ग किमी तक सीमित रखा जाए। यह पूर्णत: तथ्य विहीन और भ्रामक है। मेरे द्वारा ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया है। सिंहदेव ने लिखा है, उन्होंने कैबिनेट और अन्य स्तरों पर इस अभयारण्य को 1995.48 वर्ग किमी में स्थापित करने का समर्थन इस आधार पर किया था उसमें अम्बिकापुर विधानसभा का कोई राजस्व ग्राम न आ रहा हो। तब वन मंत्री और संबंधित अधिकारियों ने बताया था कि उनकी विधानसभा का कोई गांव नहीं आ रहा है। सिंहदेव ने लिखा, मेरा यह सुझाव है कि इन क्षेत्रों में यूपीए शासन में हुए "NO GO AREA' के निर्णय को फिर से लागू किया जाए।

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दायरा बढ़ा तो चिंताओं से अवगत कराया

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में टीएस सिंहदेव ने लिखा, बाद में उनकी जानकारी में आया कि उनके क्षेत्र के उदयपुर और लखनपुर ब्लॉक के गई गांवों में वन अधिकारी दबाव बना रहे हैं कि लेमरु में रिजर्व में शामिल होने पर ग्रामसभा सहमित प्रस्ताव पारित करे। पता चला कि लेमरु हाथी रिजर्व को 1995.48 वर्ग किमी से बढ़ाकर 3827.64 वर्ग किमी किया जा रहा है। उसके बाद मैंने ग्रामीणों की आपत्तियों को सामने रखा। इसमें यह था कि राजस्व ग्रामों को अभयारण्य में न लिया जाए और सीमा क्षेत्र का चिन्हांकन कर प्रचार-प्रसार किया जाए। उसके बाद ग्राम सभाओं से इसपर सहमति ली जाए।

दूसरे विधायकों ने कहा - दहशत में हैं ग्रामीण

वन विभाग के पत्र में जिन सात दूसरे विधायकों का नाम आया है, दैनिक भास्कर ने उनसे भी बात करने की कोशिश की। मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ. विनय जायसवाल ने कहा, हाथी अभयारण्य का दायरा काफी बड़ा हो रहा था। इससे बड़ी संख्या में उनके क्षेत्र के गांव प्रभावित होते। लोगों में नाराजगी है। ग्राम सभाओं में इसके खिलाफ प्रस्ताव पास हो रहा है। इसी आधार पर वन विभाग से आग्रह किया गया था। लुण्ड्रा विधायक डॉ. प्रीतम राम ने कहा, क्षेत्र में लोगों को डर है कि हाथी रिजर्व बन जाने के बाद उनके गांवों को विस्थापित कर दिया जाएगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी को बेदखल नहीं किया जाएगा। लेकिन लोग अभी समझ नहीं रहे हैं। वन विभाग को इन चिंताओं से अवगत कराया गया था। अब देखिए क्या होता है।

वन विभाग के इस पत्र में कहा गया है कि टीएस सिंहदेव आदि जनप्रतिनिधियों के आग्रह पर दायरा घटाया जा रहा है।
वन विभाग के इस पत्र में कहा गया है कि टीएस सिंहदेव आदि जनप्रतिनिधियों के आग्रह पर दायरा घटाया जा रहा है।

क्या है NO GO AREA वाला निर्णय

वर्ष 2011 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन केंद्र सरकार ने हसदेव नदी के जलग्रहण क्षेत्र को खनन गतिविधियों के लिए NO GO AREA घोषित कर दिया था। तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इसके लिए समृद्ध वन क्षेत्र को संरक्षित करने की जरूरत को महत्वपूर्ण बताया था। बाद में भाजपा सरकार ने इस नीति को बदल दिया। सभी क्षेत्रों में कॉमर्शियल कोल माइनिंग को मंजूरी दे दी गई।

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