मंडी शुल्क बढ़ाने पर BJP ने सरकार को घेरा:किसान मोर्चा ने कहा- शुल्क बढ़ने से मंडियों में घटे धान के दाम; वापस लें अधिसूचना

रायपुर6 महीने पहले
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मंडी शुल्क में तीन रुपए की बढ़ोतरी से बवाल खड़ा हो गया है। दैनिक भास्कर में यह मुद्दा उठाने के बाद भाजपा ने भी सरकार को घेरा है। भाजपा किसान मोर्चा के प्रभारी संदीप शर्मा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने कहा- बढ़ी हुई दर से यह शुल्क प्रति क्विंटल 98 रुपए हो गया है। इसकी वजह से मंडियों में किसानों की फसलों का दाम गिर गया है। भाजपा नेताओं ने सरकार से मंडी शुल्क वृद्धि की अधिसूचना वापस लेने की मांग की है।

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रभारी संदीप शर्मा ने कहा- मंडी शुल्क में बढ़ोतरी करके भूपेश बघेल सरकार ने किसानों पर वज्रपात किया है। शुल्क बढ़ोतरी के आदेश से प्रत्येक 100 रुपए की खरीदी पर 2 रुपए की जगह 5 रुपए शुल्क लगेगा। इसको प्रति क्विंटल की दर से जोड़ें तो यह शुल्क 98 रुपए पड़ता है।

शर्मा ने कहा- भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार के समय 2018 में यह शुल्क 31 रुपए प्रति क्विंटल ही था। 2018 की तुलना में यह शुल्क तीन गुना से अधिक है। इसकी मार अंत में किसानों पर ही पड़ेगी। संदीप शर्मा ने कहा- इसका असर मंडियों में दिखने भी लगा है। मंडियों में 1450 से 1480रु तक बोली लगने वाले धान की बोली राजिम मंडी सहित तमाम मंडियों में 1000 रुपए से शुरू होकर 1250-1280 रुपए तक रुक गई। मंडी शुल्क बढ़ने से मंडियों में धान के भाव अचानक 200 रुपए नीचे आ गए हैं। इस बात से आक्रोशित होकर अनेक मंडियों में किसानों ने धान बेचने से मना कर दिया है।

शुल्क वृद्धि पर गुमराह कर रही है सरकार
किसान मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने कहा- राज्य सरकार शुल्क वृद्धि पर लोगों को गुमराह कर रही है। कहा जा रहा है- बढ़ा हुआ मंडी शुल्क किसानों को नहीं देना है। यह व्यापारी देता है। सच्चाई यही है कि मंडी शुल्क किसानों की जेब से ही जाता है। इसका प्रमाण मंडियों में धान के कीमतों में 150 से 200 रुपए तक की गिरावट है।

कारोबारी भी कर रहे हैं विरोध
भाजपा नेताओं ने कहा- व्यापारियों ने मंडी शुल्क वापस करने का ज्ञापन दिया है। उनका तर्क है कि बढ़े शुल्क की वजह से उनका बाजार की प्रतिस्पर्धा में बने रहना मुश्किल है। प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए उन्होंने बोली 200 रुपए तक घटा दिया है। दोनों नेताओं ने कहा- इसी प्रकार के जंजाल के चलते राज्य में किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं।

एक दिसंबर से बढ़ा है शुल्क
कृषि विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के हस्ताक्षर से 30 नवंबर को एक अधिसूचना जारी हुई थी। इसमें शुल्क के नए प्रावधान किए गए थे। इस अधिसूचना के मुताबिक कृषि उपज के विक्रय पर प्रत्येक 100 रुपए पर 3 रुपए की दर से मंडी शुल्क और 2 रुपए की दर से कृषक कल्याण शुल्क देना होगा। दलहनी-तिलहनी फसलों के लिए मंडी शुल्क एक रुपए और कृषक कल्याण शुल्क 50 पैसा तय हुआ है। नई व्यवस्था एक दिसम्बर से लागू है। पहले केवल मंडी शुल्क केवल 2 रुपए हुआ करता था। 20 पैसा निराश्रित कल्याण के नाम पर लिया जाता था

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