ओमिक्रॉन का खतरा सिर पर:बेड और ऑक्सीजन के भरोसे जंग की तैयारी, 19-20 दिन बाद आ रही रिपोर्ट सबसे कमजोर कड़ी

रायपुर6 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में ओमिक्रॉन के पहले मरीज की पुष्टि हो जाने के बाद अभी तक सीमाओं के पार दिख रहा खतरा सिर पर आ गया है। सरकार अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की सुविधाएं बढ़ाकर जंग के लिए तैयार होने का ऐलान कर चुकी है। लेकिन कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की पहचान के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है। ओमिक्रॉन से निपटने में यह सबसे कमजोर कड़ी साबित हो सकती है।

छत्तीसगढ़ के सभी कोरोना सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भुवनेश्वर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की लैब भेजे जा रहे हैं। इसमें काफी देर लग रही है। बिलासपुर वाले केस में ही ओमिक्रान पॉजिटिव पाया गया व्यक्ति संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से 2 दिसम्बर को छत्तीसगढ़ पहुंचा था। क्वारैंटाइन अवधि के बाद 15 दिसम्बर को हुई दूसरी जांच में यह व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव निकला। उसी दिन उसका सैंपल भुवनेश्वर भेज दिया गया। नमूना भेजे जाने के 20वें दिन बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित हुआ था। छत्तीसगढ़ में एपिडेमिक कंट्रोल के डायरेक्टर डॉ. सुभाष मिश्रा का कहना है, सभी अस्पतालों को एलर्ट कर दिया गया है। इलाज और रोकथाम के लिए इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं। ओमिक्रॉन के मरीजों को अलग वार्ड में रखने की तैयारी है। अधिकारियों ने बताया, जांच की सुविधाएं बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। रायपुर मेडिकल कॉलेज और एम्स में वायरोलॉजी लैब पूरी तरह से तैयार है। मेडिकल कॉलेज की तरफ से मशीन खरीदी का प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन सरकार के पास इसके लिए जरूरी फंड नहीं है।

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एम्स में मशीन तो हैं पर टेस्ट किट नहीं

रायपुर एम्स में कोविड की स्पाइक प्रोटीन में होने वाले म्यूटेशन का पता करने के लिए जरूरी जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट लैब 6 महीने पहले बन चुकी है। लेकिन, यहां टेस्ट नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह एम्स के पास टेस्ट में काम आने वाली किट नहीं होना है। बताया जाता है कि जीनोम टेस्टिंग में काम आने वाली किट, केमिकल आदि की खरीदी के लिए फंड की जरूरत है, जो एम्स को नही मिला है।

तीन स्तर पर भुवनेश्वर भेजे जाते हैं सैंपल

जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए तीन स्तर पर सैंपल भुवनेश्वर भेजे जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जितने पॉजिटिव मरीज आते हैं उसका 5%, विदेश से आने वाले सभी तथा उनके संपर्क में आने वाले लोग तथा एक स्थान 5 से 6 मरीज मिलने पर जीनोम सिक्वेंसिंग के सैंपल भुवनेश्वर भेजे जाते हैं। अब जब बड़ी संख्या में कोरोना के क्लस्टर सामने आ रहे हैं, भुवनेश्वर लैब पर दबाव बढ़ता जा रहा है। वहां से जांच की रिपोर्ट आने में देर हो रही है।

कोरोना के खिलाफ जंग में अभी यह तैयारी

बेड – 13203

आक्सीजन बेड – 6859

वेंटिलेटर – 1200

ऑक्सीजन कन्संट्रेटर – 7151

जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर – 8177

ऑक्सीजन प्लांट – 76 (कुल 113 प्रस्तावित हैं)

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