पेड़ काटने की इतनी जल्दी?:परसा में जंगलों की कटाई से पहले NTCA से पूछा तक नहीं, अब नोटिस

रायपुर7 महीने पहले
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परसा क्षेत्र में ऐसे हरे-भरे साल के पेड़ों को धरासाई कर दिया गया है। - Dainik Bhaskar
परसा क्षेत्र में ऐसे हरे-भरे साल के पेड़ों को धरासाई कर दिया गया है।

राजस्थान सरकार को आवंटित छत्तीसगढ़ की परसा कोल ब्लॉक में जंगलों की कटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन को पेड़ों की कटाई की इतनी जल्दी थी उसने राष्ट्रीय वन्यजीव परिषद (NBWL) और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) तक से पूछा नहीं। अब NTCA ने छत्तीसगढ़ के मुख्य वन्य प्राणी संरक्षक से इसपर जवाब मांगा है।

बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने यह पत्र भेजा है।
बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने यह पत्र भेजा है।

दरअसल वन्य प्राणियों से भरे जंगल में वनों की कटाई से पहले राष्ट्रीय स्तर की इन दोनों संस्थाओं की अनुमति अनिवार्य है। परसा कोल ब्लॉक के लिए पेड़ों की कटाई से पहले प्रशासन और कंपनी ने यह अनुमति लेना भी जरूरी नहीं समझा। इसी के आधार पर छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ला ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को शिकायत भेजी थी कि सरकार ने प्राधिकरण और परिषद को बिना कोई सूचना दिये हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है। दो दिन पहले मिली इस शिकायत के बाद NTCA हरकत में आई। शुक्रवार को NTCA के सहायक वन संरक्षक हेमंत सिंह ने छत्तीसगढ़ के मुख्य वन्य प्राणी संरक्षक को एक पत्र भेजा। इस पत्र के जरिए उन्होंने मुख्य वन्य प्राणी संरक्षक से इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले पर एक रिपोर्ट मांगी गई है।

पेड़ कटाई का संभावित विरोध रोकने के लिए प्रशासन ने वहां पुलिस लगा दिया था।
पेड़ कटाई का संभावित विरोध रोकने के लिए प्रशासन ने वहां पुलिस लगा दिया था।

आधी रात को पुलिस लगाकर काटे पेड़

परसा कोल ब्लॉक से प्रभावित गांवों में लोग 58 दिन से धरने पर बैठे हैं। गांव के लोग पेड़ों की रखवाली कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया, 26 अप्रैल की आधी रात के बाद कंपनी के मजदूर पुलिस के साथ पेड़ काटने पहुंच गए। ग्रामीणों को कुछ घंटे बाद इसका पता चला तो वहां हंगामा हो गया। विरोध को देखते हुए पेड़ काटने वाले वहां से चले गए। तब तक कई दर्जन साल के पुराने पेड़ काट डाले गए थे। इस कोल ब्लॉक के लिए करीब 2 लाख पेड़ काटे जाने हैं।

प्रकाश मुनी नाम साहेब ने यह पोस्ट लिखकर हसदेव अरण्य को उजाड़ने का विरोध किया है।
प्रकाश मुनी नाम साहेब ने यह पोस्ट लिखकर हसदेव अरण्य को उजाड़ने का विरोध किया है।

लगातार बढ़ रहा है पेड़ों की कटाई का विरोध, प्रकाश मुनी भी मुखर

प्रदेश के विभिन्न शहरों में पेड़ों की कटाई का विरोध तेज हो गया है। सोशल मीडिया पर भी माहौल गर्म है। छत्तीसगढ़ में कबीरपंथ के प्रमुख प्रकाश मुनी नाम साहेब ने भी फेसबुक पर सेव हसदेव फॉरेस्ट अभियान के समर्थन में पोस्ट किया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से बुद्धिजीवी, पर्यावरणविद और लेखक-पत्रकार परसा कोल ब्लॉक के लिए जंगल उजाड़ने का विरोध कर रहे हैं।

इन्हीं खदानों के लिए रायपुर आए थे सीएम गहलोत

राजस्थान इस खदान को अंतिम मंजूरी दिलाने के लिए काफी समय से दबाव बना रहा था। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पिछले महीने इसी काम के लिए रायपुर पहुंचे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ चर्चा की। राजस्थान का तर्क था, खदान संचालन नहीं होने से उनके यहां कोयला संकट खड़ा हो गया है। बिजली घरों के संचालन के लिए पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा है। बाद में सरकार ने उनकी बात मान ली और परसा कोयला खदान के लिए वन भूमि देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

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