कविता एंटीबॉडी वाली:कोरोना में लोगों की उदासी दूर करने हास्य कवि सुरेंद्र दुबे ने लिखी कविता, बोले- लोग कद्दू की तरह फूल रहे, स्कूल बंद और बच्चे पैरेंट्स के सिर पर झूल रहे

रायपुर5 महीने पहले
सुरेंद्र दुबे को 2010 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ के मशहूर हास्य कवि ने अपनी पंक्तियों के जरिए लोगों को खुश करने की कोशिश की है। उन्होंने एक कविता कोरोना की वजह से बने उदासी के माहौल को दूर करने के लिए लिखी है। डॉक्टर दुबे ने कहा कि लोगों में इस तरह से डर, घर कर गया है कि वो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर करेगा। लोग चेकअप के लिए जाते हैं तो डॉक्टर कहते हैं, डरना या घबराना नहीं है। इसलिए इस टेंशन भरे माहौल में हंसना और हंसाना जरूरी है।

पढ़िए, डॉक्टर दुबे की ये रचना
हम हंसते हैं लोगों को हंसाते हैं
इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, चलिए एंटीबॉडी बनाते हैं
घिसे-पिटे चुटकलों में भी हंसो
कोरोना के आंकड़ों में मत फंसो
नदी के बाढ़ का धीरे-धीरे पानी घट जाता है
कुत्तों को भौंकने के लिए आदमी नहीं मिल रहे
चोरों को चोरी करने खाली घर नहीं मिल रहे
सुबह-शाम टहलने वाले अब कद्दू की तरह फूल रहे
स्कूल बंद हैं बच्चे मां-बाप के सिर पर झूल रहे
दूध बादाम मुनक्कका विटामिन सी खाओ
कोरोना का दुखद समाचार मत सुनाओ
अब भी वक्त है तीसरी लहर में संभल जाओ
हंसो-हंसाओ और एंटीबॉडी बनाओ

जन्मदिन के कम, मौत की खबरें ज्यादा हैं
दैनिक भास्कर से कवि डॉक्टर सुरेंद्र दुबे ने कहा कि कोरोना के इस माहौल में आम आदमी के अंदर से डर गया है। सोशल मीडिया जन्म दिवस की बजाए निधन के समाचार हैं। इस वजह से अब हाल ये है कि सामान्य सा सिर दर्द, बुखार, थकान हो तो आदमी यही सोचने लग जाता है कि कहीं कोरोना तो नहीं हो गया। जबकि इस वायरस के सामने आने के पहले ये सब आम था। इस डर की वजह से आदमी डिप्रेशन में जा रहा है। मेरा मनना है कि हमें डरना नहीं सतर्क रहना चाहिए। सतर्क रहकर मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

कौन हैं डॉक्टर सुरेंद्र दुबे

सुरेंद्र दुबे कॉमिक कविताओं के एक भारतीय व्यंग्यवादी और लेखक हैं। वह पेशे से एक आयुर्वेदिक चिकित्सक भी हैं। दुबे का जन्म 8 जनवरी 1953 को भारतीय राज्य छत्तीसगढ़ में दुर्ग के बेमेतरा में हुआ था। उन्होंने पांच किताबें लिखी हैं। उन्हें भारत सरकार ने 2010 में, देश के चौथे उच्चतम भारतीय नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

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