भास्कर एक्सक्लूसिव:रायपुर में सालभर से वीरान पड़े श्मशान में एक साथ जली 11 चिताएं; मर्चुरी में रखे गए कोरोना संक्रमितों के शव सड़े, कुछ लाशों में पड़े कीड़े

रायपुर7 महीने पहलेलेखक: सुमन पांडेय
तस्वीर रायपुर के बोरिया खुर्द इलाके के श्मशान की है। यहां गोबर के कंडों से अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

रायपुर के बोरिया खुर्द इलाके के श्मशान घाट के गेट के बाहर आग की तपिश और लाल लपटों की रोशनी महसूस हो रही थी। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने अंदर देखा तो एक साथ 11 चिताएं जल रही थीं। ये सभी कोविड संक्रमित मृतकों के शव थे। अंतिम संस्कार करने आए एक पहल संस्था के रितेश अग्रवाल ने बताया इस श्मशान में एक साल में भी इतने शव नहीं लाए जाते थे। आसपास रहने वाले लोग भी अंतिम संस्कार के लिए रायपुर के टिकरापारा स्थित श्मशान जाते थे। ये श्मशान बना तो था मगर एक साल से कोई अंतिम संस्कार नहीं किया गया था। अब यहां अंतिम संस्कार के लिए एक साथ कई शव आ रहे हैं।

तस्वीर रायपुर के अंबेडकर अस्पताल के मर्चुरी की है।
तस्वीर रायपुर के अंबेडकर अस्पताल के मर्चुरी की है।

सड़ रही लाशें

रायपुर के अंबेडकर अस्पताल के कोविड वार्ड में हर रोज औसतन 20 कोरोना संक्रमितों की मौत हो रही है। इनमें प्रदेश के दूसरे जिलों के मरीज भी शामिल हैं। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि अब शवों को अंतिम संस्कार के लिए भेजने की प्रक्रिया में देरी, फ्रीजर की कमी की वजह से शव सड़ने लगे हैं। कुछ लाशों में कीड़े भी लग चुके हैं। दूसरी तरफ हर दिन हो रही मौत के बाद फिर नए शव, मर्चुरी पहुंचा दिए जा रहे हैं। अंतिम संस्कार के काम में प्रशासन की मदद कर रहे एक पहल संस्था के रितेश अग्रवाल ने बताया कि कीड़े लग चुकी लाशें हमें भी सौंपी गईं। सावधानी से इन्हें श्मशान तक लाया जा रहा है, इसके बाद अंतिम संस्कार कर रहे हैं।

रायपुर के महादेव घाट स्थित मुक्तिधाम की इस तस्वीर में शेड में जगह नहीं होने की वजह नीचे भी दाह संस्कार किया गया।
रायपुर के महादेव घाट स्थित मुक्तिधाम की इस तस्वीर में शेड में जगह नहीं होने की वजह नीचे भी दाह संस्कार किया गया।

प्रक्रिया जो सता रही

कोरोना संक्रमित मरीज की अस्पताल में मौत के बाद अस्पताल तहसीलदार के दफ्तर को सूचना देते हैं। तहसीलदार के दफ्तर से अस्पताल को अप्रूवल मिलने के बाद कागजी कार्यवाही पूरी कर शव को अंतिम संस्कार के लिए भेजा जाता है। इसी प्रोसिजर में देरी से मुश्किल बढ़ रही है। शव गृह दोपहर 12 बजे के बाद प्रक्रिया शुरू करते हैं, जबकि इसे जल्दी शुरू किया जा सकता है। संक्रमण के खतरे की वजह से शव परिजनों को नहीं दिए जाते। परिजन चाहें तो प्रोटोकॉल का पालन कर अपने इलाके के श्मशान में शव भेजने को कह सकते हैं। परिवार का एक सदस्य अंतिम संस्कार के वक्त मौजूद भी रह सकता है। मगर श्मशान में दाह संस्कार स्वास्थ्य विभाग या नगर निगम के जुड़े लोग करते हैं।

तस्वीर रायपुर की है। अंबेडकर अस्पताल के पिछले हिस्से में ली गई इस तस्वीर के जरिए विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश में है।
तस्वीर रायपुर की है। अंबेडकर अस्पताल के पिछले हिस्से में ली गई इस तस्वीर के जरिए विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश में है।

रायपुर में सिर्फ तीन दिन में मौत का शतक

13 अप्रैल को प्रदेश में 109 कोविड संक्रमितों की मौत हुई। रायपुर शहर में मरने वालों का आंकड़ा 53 था। 12 अप्रैल को प्रदेश में मौत का आंकड़ा 107 था और रायपुर में 51 मौतें हुईं। 11 अप्रैल को प्रदेश में 82 लोगों के मरने की दुखद खबर मिली। इस दिन रायपुर में 37 लोगों के पिछले 24 घंटे में मौत हुई। इस तरह तीन दिन के आंकड़ों को देखें तो अकेले रायपुर शहर में ही 141 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले 1 साल में प्रदेश में कुल 5 हजार 187 कोविड संक्रमितों की जान जा चुकी है।

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