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अस्पताल ने स्वीकारा 28 घंटे में 5 नवजात की मौत:रायपुर के पंडरी जिला अस्पताल ने सफाई दी, कहा- मंगलवार रात जिस बच्चे की मौत हुई उसके दिमाग तक ऑक्सीजन ही नहीं पहुंच रही थी

रायपुर2 महीने पहले
रायपुर का जिला अस्पताल परिसर आज अपेक्षाकृत शांत है। कल रात बच्चों की मौत के बाद यहां भारी हंगामा हुआ था।

रायपुर जिला अस्पताल में एक ही दिन में 6-7 बच्चों की मौत के आरोपों से हंगामा मचा हुआ है। परिजन के आरोपों के बाद जिला अस्पताल प्रबंधन ने सफाई दी है। उन्होंने कहा- 24 घंटे के भीतर सिर्फ 2 नवजात बच्चों की मौत हुई है। हालांकि उन्होंने 17 जुलाई से 20 जुलाई तक नवजात बच्चों की मौत का जो डाटा भेजा है, उसमें 19 तारीख की शाम 5.30 बजे से 20 तारीख की रात 9 बजे तक 5 बच्चों की मौत की विस्तृत जानकारी है।

एसएनसीयू के बाहर अपने बच्चों की सेहत की हालत जानने के लिए चिंतित परिजन। कल की घटना की वजह से ये लोग काफी डरे हुए हैं।
एसएनसीयू के बाहर अपने बच्चों की सेहत की हालत जानने के लिए चिंतित परिजन। कल की घटना की वजह से ये लोग काफी डरे हुए हैं।

दैनिक भास्कर ने आज सुबह से दोपहर तक जिला अस्पताल में अपनी पड़ताल की। पोस्टनेटल वार्ड के बाहर बच्चों के चिंतित परिजनों की भीड़ थी। पहचान उजागर न करने की शर्त पर मुंगेली जिले से आए एक नवजात बच्ची के पिता ने बताया, उनकी पत्नी का सोमवार को यहां सामान्य प्रसव हुआ। बच्ची बेहद कमजोर है। कल के हंगामे से वे बेहद डरे हुए हैं। कहा, उनके दो बच्चों की जन्म के बाद ही मौत हो चुकी है। दावा किया कि कम शाम को ही कम से कम तीन बच्चों की मौत हुई है।

अस्पताल प्रबंधन ने कहा, दो बच्चे मरे और यह सामान्य
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. पीके गुप्ता ने कहा, रात में उन्होंने रजिस्टर चेक किया। कल की तारीख में केवल दो बच्चों की मौत हुई है। एक मौत सुबह हुई और दूसरी रात को 8 बजे। नवजात शिशु इकाई के प्रभारी डॉ. ओंकार खंडवाल ने भी कहा, कल सुबह 8 बजे से आज सुबह 8 बजे तक केवल 2 बच्चों की मौत हुई है। 19 जुलाई को यहां तीन बच्चों की मौत हुई थी, जबकि 18 तारीख को कोई मौत नहीं थी। डॉ. खंडवाल ने बताया, SNCU की क्षमता 45 बच्चों की है, अभी 37 का इलाज हो रहा है।

कलेक्टर भी पहुंचे जिला अस्पताल
रायपुर कलेक्टर सौरभ कुमार आज दोपहर बाद जिला में पहुंचे। उन्होंने नवजात शिशु वार्ड में मौजूद डॉक्टरों से बातचीत कर स्थिति को समझा। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों से भी बात की। बताया जा रहा है कि कलेक्टर ने दस्तावेज भी तलब किए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कलेक्टर को बच्चों की मौत के आरोपों की जांच का जिम्मा सौंपा है।

रात को जारी प्रेस नोट में कहा बच्चों की मौत स्वाभाविक

मंगलवार रात जिस नवजात बच्चे की मौत को लेकर अस्पताल परिसर में हंगामा किया गया, उसकी मौत स्वाभाविक कारणों से हुई थी। माना बस्ती निवासी जानकी सिन्हा के शिशु के दिमाग में ऑक्सीजन का प्रवाह नहीं हो रहा था। उसे एनआईसीयू में बेहतर इलाज के लिए भर्ती किया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। परिजनों ने हंगामा किया और मीडिया को 7 बच्चों की मौत की भ्रामक जानकारी दे दी। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन ने 17 तारीख से 20 तारीख तक नवजात बच्चों की मौत का डाटा जारी किया है। इसमें उन्होंने कुल 6 बच्चों की मौत की जानकारी दी है।

इसी डाटा में बताया गया है कि 19 जुलाई की शाम 5.30 बजे से 20 जुलाई की रात 9 बजे तक के 28 घंटों में पांच स्वाभाविक मौतें हुई हैं।

इसमें 19 जुलाई की शाम साढ़े पांच बजे मनबती बैगा के शिशु की मौत हुई। 20 जुलाई की सुबह 2 बजे रोशनी लदेर के शिशु की मृत्यु हुई। 20 जुलाई की सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर केशरी ढीमर के शिशु की मौत हुई। इसके एक घंटे बाद 7 बजकर 50 मिनट पर दुर्गेश्वरी साहू के शिशु की मौत हुई और 20 जुलाई की रात 9 बजे जानकी सिन्हा के शिशु की मौत हुई। सभी बच्चों की मौत का कारण गंभीर बीमारी है।

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