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सर्व आदिवासी समाज का विवाद गहराया:पिछले सप्ताह आर्थिक नाकेबंदी करने वाले सोहन पोटाई धड़े को मान्यता देने से सरकार का इनकार, भारत सिंह की कार्यकारिणी को बताया गया वैध

रायपुर15 दिन पहले
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30 अगस्त को सर्व आदिवासी समाज के इसी धड़े ने प्रदेश भर में हाईवे और रेल लाइनों पर उतरकर यातायात रोक दिया था। - Dainik Bhaskar
30 अगस्त को सर्व आदिवासी समाज के इसी धड़े ने प्रदेश भर में हाईवे और रेल लाइनों पर उतरकर यातायात रोक दिया था।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के दो धड़ों के बीच विवाद गहरा गया है। रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसाइटी ने समाज के सोहन पोटाई धड़े की कार्यकारिणी को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। पंजीयक से बीपीएस नेताम धड़े के भारत सिंह की कार्यकारिणी को छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज की वैध कार्यकारिणी बताया है। सोहन पोटाई धड़ा जुलाई महीने से ही सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहा है। पिछले सप्ताह इसी धड़े ने प्रदेश भर में आर्थिक नाकेबंदी कर ताकत का प्रदर्शन किया था।

21 फरवरी को बंजारी धाम में हुए इसी सम्मेलन से चुनाव का विवाद शुरू हुआ था। इसमें सोहन धड़े ने कार्यकारिणी घोषित कर दी थी।
21 फरवरी को बंजारी धाम में हुए इसी सम्मेलन से चुनाव का विवाद शुरू हुआ था। इसमें सोहन धड़े ने कार्यकारिणी घोषित कर दी थी।

फर्म एंड सोसाइटी के सहायक पंजीयक एनके नारनवरे ने दोनों पक्षों को बताया है, सोहन पोटाई की ओर से विभाग को दी गई जानकारी निर्धारित फॉर्म में नहीं होने, कार्यकारिणी का गठन संस्था के विधान के मुताबिक नहीं होने की वजह से उसे स्वीकृति योग्य नहीं पाया गया है। वहीं भारत सिंह की ओर से पेश जानकारियां तय प्रारूप में हैं। उनकी कार्यकारिणी का चुनाव भी संस्थान के विधान के अनुसार हुआ है। ऐसे में उसे स्वीकार कर रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया है। इसमें अध्यक्ष भारत सिंह और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल कोर्पे के अलावा एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, दो सचिव, 16 उपाध्यक्ष और 16 संयुक्त सचिव मिलाकर 38 नाम हैं।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज पर नियंत्रण को लेकर दो धड़ों का यह विवाद पिछले वर्ष से ही शुरू हो गया था। कोरोना काल में प्रतिबंधों की वजह से कार्यकारिणी का चुनाव एक वर्ष के लिए टाल दिया गया था। 21 फरवरी को नवा रायपुर के बंजारी धाम में कार्यकारिणी चुनाव के दौरान हंगामा हो गया। तत्कालीन अध्यक्ष बीपीएस नेताम ने दावा किया कि चुनाव को स्थगित कर दिया गया है, लेकिन पूर्व सांसद सोहन पोटाई गुट ने उसी बैठक में खुद को मनोनीत घोषित करा लिया। बाद में दूसरे गुट ने 11 जुलाई को रायपुर में एक सम्मेलन कर चुनाव की औपचारिकता पूरी की और खुद को सर्व आदिवासी समाज का प्रतिनिधि बताया। दोनों पक्षों ने रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसाइटी में खुद को अधिकृत कार्यकारिणी के तौर पर दर्ज करने का आवेदन किया था।

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इस तरह की आपत्तियां थीं

फर्म्स एंड सोसाइटी ने सोहन पोटाई धड़े से मिली जानकारी पर कई आपत्तियां की हैं। पहली आपत्ति तो यही है कि जानकारियां निर्धारित प्रारूप में नहीं दी गईं। कार्यकारिणी की सूची भी निर्धारित फॉर्म में न दिए जाने पर आपत्ति है। सबसे बड़ी आपत्ति कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया को लेकर है। सोहन पोटाई धड़े ने 21 फरवरी 2021 के सम्मेलन का कार्रवाई विवरण रखा है। इसमें सर्वसम्मति से कार्यकारिणी के मनोनयन का उल्लेख है। संस्था की नियमावली बहुमत के आधार पर चुनाव का प्रावधान करती है। कार्रवाई विवरण में प्रांतीय अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष, महासचिव, युवा प्रभाग अध्यक्ष और महिला प्रभाग अध्यक्ष के मनोनयन का जिक्र है। वहीं नियमावली में अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष के अलावा एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, दो सचिव, 16 उपाध्यक्ष और 16 संयुक्त सचिव के निर्वाचन की व्यवस्था है।

सोहन पोटाई धड़े ने कहा, हमें सरकारी ठप्पे की जरूरत नहीं

सोहन पोटाई धड़े की ओर से सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बीएस रावटे ने कहा, इस तरह की व्यवस्था आएगी, इसका अंदाजा उन लोगों को पहले से था। हमें सरकार से कोई अनुदान नहीं लेना है, इसलिए फर्म्स एंड सोसाइटी के किसी ठप्पे की आवश्यकता नहीं है। समाज ने हमको मान्यता दी है, हम समाज के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा, इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का रास्ता है। लेकिन अभी हम लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं। अभी सभी जिला इकाईयां रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसाइटी को लिखकर देंगी कि कार्यकारिणी को उन लोगों ने चुना है जो विधान के अनुसार है। वैसे भी आदिवासी समाज रूढ़ियों और प्रथाओं से चलता है। उन्होंने कहा, सरकार के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा।

विधानसभा चुनाव से पहले ही उभरा था विवाद

इन दो धड़ों के बीच का विवाद 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले ही उभर आया था। संगठन के तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष बीएस रावटे ने संगठन के विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी। बाद में समाज के भीतर ही इसका विरोध हुआ तो भारतीय ट्राइबल पार्टी नाम के एक राजनीतिक दल के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की कोशिश हुई। इधर प्रदेश अध्यक्ष बीपीएस नेताम आदि ने खुले तौर पर कांग्रेस का समर्थन किया। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने समाज के एक सम्मेलन में खुले मंच से उनकी मांगों को पूरा करने का वादा किया। अब दूसरा धड़ा कह रहा है कि कांग्रेस सरकार अपना वह वादा पूरा नहीं कर रही है तो आंदोलन करने का ही रास्ता बचता है।

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