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'संस्कृति विभाग तुम्हारे बाप का नहीं है':मदद मांगने पहुंचे कलाकारों को संस्कृति विभाग में यह सुनने को मिला था, अब अफसर के दुर्व्यवहार को नाटक बनाकर नुक्कड़ों पर दिखाएंगे रंगकर्मी

रायपुर2 महीने पहले
अभिनट फिल्म एवं नाट्य फाउंडेशन "संस्कृति विभाग तुम्हारे बाप का नही है' नाम के नुक्कड़ नाटक का रिहर्सल कर रहा है। गांधी जयंती से इसे शहर के चौक-चौराहाें पर दिखाया जाएगा।

रायपुर के थिएटर कलाकारों ने संस्कृति विभाग के रवैये के खिलाफ एक कलात्मक आंदोलन शुरू किया है। पिछले महीने हबीब तनवीर स्मृति नाट्य समारोह के लिए मदद मांगने पहुंचे रंगकर्मियों को संस्कृति विभाग में सुनना पड़ा था कि संस्कृति विभाग तुम्हारे बाप का नही है। अब शहर के रंगकर्मी इस दुर्व्यवहार को ही नाटक बनाकर रायपुर शहर के नुक्कड़ों पर दिखाएंगे।

अभिनट फिल्म एवं नाट्य फाउंडेशन इन दिनों रंगकर्मी योग मिश्रा के निर्देशन में "संस्कृति विभाग तुम्हारे बाप का नही है' नुक्कड़ नाटक पर काम कर रहा है। शहर के एक स्कूल में फाउंडेशन से जुड़े समीर शर्मा, सूर्या तिवारी, फाल्गुनी लारचा, ममता जैसवार, साहित्या ठाकुर, मंगेश कुमार, सत्यम पाठक, अखिलेश कुमार, पिंकू वर्मा, आदित्य देवांगन और शुभम ठाकुर नाटक की रिहर्सल कर रहे हैं। रोजाना कई घंटे तक अभ्यास के बाद कलाकार अब प्रदर्शन के लिए तैयार हैं। गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से रायपुर शहर के चौक-चौराहों और बाजारों में लोगों के बीच इस नाटक का प्रदर्शन शुरू होगा।

कलाकार इस नाटक के द्श्यों और संवादों के अभ्यास में जुटे हुए हैं।
कलाकार इस नाटक के द्श्यों और संवादों के अभ्यास में जुटे हुए हैं।

नाटक का निर्देशन कर रहे योग मिश्रा का कहना है, हमने एक और दो सितम्बर को हबीब तनवीर की स्मृति में नाट्य समारोह किया था। उसके लिए सहायता मांगने पर संस्कृति विभाग में हमारे साथ दुर्व्यवहार हुआ था। उसकी सूचना सभी जिम्मेदार अफसरों और मंत्रियों को दी थी। समारोह के दौरान भी हमने अपनी बात उठाई थी। इसके बाद भी सरकार ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया है। सरकार जब न सुने तो गांधी जी ने आंदोलन का मार्ग सुझाया है। ऐसे में हम दो अक्टूबर से रायपुर शहर में जगह-जगह यह नाटक दिखाएंगे। उस पर भी बात नहीं बनी तो प्रदेश के अलग-अलग शहरों में इस नाटक को ले जाया जाएगा। योग मिश्रा ने कहा, हमारी मांग है कि सरकार रंगकर्म के लिए एक नीति बना दे। ताकि हम नाटक तैयार करें तो सरकार की ओर से कम से कम स्थल, लाइट और साउंड की मदद मिल जाए। रंगकर्मियों का यह कलात्मक प्रतिरोध क्या असर दिखाएगा यह तो नाटक का प्रदर्शन शुरू होने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल प्रतिरोध के इस तरीके ने सरकार और उसके अफसरों की नींद का उड़ना तय माना जा रहा है।

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रंगकर्मियों का यह आंदोलन संस्कृति विभाग के अफसरों के रवैये के भी खिलाफ है।
रंगकर्मियों का यह आंदोलन संस्कृति विभाग के अफसरों के रवैये के भी खिलाफ है।

हबीब तनवीर के अपमान का भी आरोप

रंगकर्मियों का आरोप है कि संस्कृति संचालक ने हबीब तनवीर का अपमान किया। उनका कहना था, तनवीर से बहादुर कलारिन नाटक में मां-बेटे के बीच संबंध दिखाकर छत्तीसगढ़ का अपमान किया है। उनके नाम पर आयोजित समारोह में वे कोई मदद नहीं दे सकते। संस्कृति कर्मियों का तर्क है कि बहादुर कलारिन नाटक में तो ऐसा कुछ लिखा ही नहीं है। इस प्रसंग को भी इस नुक्कड़ नाटक का हिस्सा बनाया गया है।

क्या हुआ था संस्कृति विभाग में

दरअसल योग मिश्रा और उनके साथी कलाकर पिछले 5 अगस्त को संस्कृति विभाग गए थे। उन्होंने विभाग के संचालक विवेक आचार्य से हबीब तनवीर स्मृति नाट्य समारोह के लिए मदद मांगी। आरोप है कि संचालक ने कहा, आप के प्रस्ताव पर संस्कृति विभाग मदद नहीं करेगा। मदद का ऐसा कोई प्रावधान नही है। कलाकारों ने कहा, संस्कृति विभाग ऐसे कार्यक्रमाें में मदद के लिए ही तो बना है। ऐसे जवाब से भड़के हुए संचालक विवेक आचार्य ने कह दिया "संस्कृति विभाग तुम्हारे बाप का नहीं।'

कलाकारों ने संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत से मुलाकात कर इस दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। आरोप है कि इसके बाद भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
कलाकारों ने संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत से मुलाकात कर इस दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। आरोप है कि इसके बाद भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।

इसी नाम से किया समारोह, वह भी बिना सरकारी मदद

संस्कृति विभाग में हुए दुर्व्यवहार के बाद रंगकर्मियों ने संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत से मुलाकात की थी। उनसे कार्रवाई की मांग हुई। बात नहीं बनी तो एक और दो सितम्बर को आयोजित हबीब तनवीर स्मृति नाट्य समारोह का नाम "संस्कृति विभाग तुम्हारे बाप का नहीं है' करके विरोध जताने की कोशिश हुई। इसकी देशभर में चर्चा हुई लेकिन सरकार को इससे फर्क पड़ता हुआ नहीं दिखा।

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