गांव-किसान वाला आइडिया कर गया काम:नतीजों में दिखा 2018 का फ्लैशबैक, कांग्रेस के लिए जश्न और भाजपा के लिए चिंता-चिंतन का समय

रायपुर5 महीने पहलेलेखक: विश्वेश ठाकरे
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पिछले सप्ताह जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दैनिक भास्कर से बात कर रहे थे, तो उन्होंने कहा था कि 2023 के चुनाव में भाजपा प्रदेश से खत्म हो जाएगी। गुरुवार को जब 15 नगरीय निकाय चुनाव के रिजल्ट आए हैं तो उनकी बात भाजपा के लिए खतरे की घंटी साबित हो रही है।

कांग्रेस ने इस चुनाव में एकतरफा जीत हासिल की है। उसे सभी 6 नगर पंचायत, 5 में से 4 नगर पालिका और 4 में से 2 नगर निगम में पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है। 2 बचे नगर निगम में भी वह मात्र 2-2- सीट से ही बहुमत से दूर रही, लेकिन वहां जो निर्दलीय जीते हैं उनसे निश्चित रूप से कांग्रेस को समर्थन मिलेगा और सभी महापौर कांग्रेस के रहेंगे। इस 15 नगरीय निकाय में महज 1 नगर पालिका में भाजपा को पूर्ण बहुमत है।

ये रिजल्ट अपेक्षित तो थे, लेकिन ऐसा भी नहीं लगा था कि ये 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बंपर जीत को याद दिला देंगे। उस समय कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटें जीती थीं। यदि उस रिजल्ट और आज के रिजल्ट के प्रतिशत की बात की जाए तो उस समय कांग्रेस की जीत का प्रतिशत 75 था आज की जीत 15 नगरीय निकाय में 13 ( 1 भाजपा, 2 किसी को बहुमत नहीं) जीत का प्रतिशत 80 है।

चुनाव परिणाम के बाद जब गुरुवार को सीएम एयरपोर्ट पर लौटे तो कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया।
चुनाव परिणाम के बाद जब गुरुवार को सीएम एयरपोर्ट पर लौटे तो कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया।

जीत का बढ़ता प्रतिशत निश्चित रूप से भाजपा को विचलित करेगा क्योंकि 2023 के विधानसभा चुनाव बहुत दूर नहीं है। इन नतीजों का क्षेत्रवार विश्लेषण बताता है कि गांवों के साथ-साथ शहरों में भी कांग्रेस का प्रभाव बढ़ रहा है। साथ ही पिछले तीन साल के कार्यकाल का एंटी इन्कंबेंसी फैक्टर का ना होना भी प्रमुख विपक्षी दल को परेशान करेगा।

हालांकि भाजपा के नेता यह स्वाभाविक बयान दे रहे हैं कि नगरीय निकाय चुनाव में सत्ता का दुरुपयोग हुआ है। बैलेट पेपर से चुनाव इसीलिए कराए गए थे कि प्रशासन के स्तर पर गड़बड़ियां की जाएं और कांग्रेस प्रत्याशी को जिताया जाए। ये बयान हार को छिपाने के लिए हो सकते हैं, लेकिन हालात को छिपाने के लिए काफी नहीं है।

कांग्रेस में जश्न का माहौल।
कांग्रेस में जश्न का माहौल।

दुर्ग-भिलाई, बीरगांव में जीत साबित करते हैं कांग्रेस का शहरी प्रभाव

चुनाव में सबसे शहरी इलाके थे दुर्ग-भिलाई जिले के। यहां की 3 बड़ी नगर निगम भिलाई, रिसाली और चरौदा में चुनाव थे। इसमें भिलाई महापौर कांग्रेस के थे और चरौदा महापौर भाजपा की थीं। रिसाली में पहली बार चुनाव हुए। अब इस बार भिलाई महापौर का पद कांग्रेस ने बचा लिया और चरौदा में भले ही वह 2 सीट से बहुमत से पीछे रह गई, लेकिन उनका महापौर बनना तय है।

इसी तरह नए बने रिसाली में भी कांग्रेस का महापौर बनेगा। इन तीनों शहरी इलाकों के कुल 150 वार्डों में से आधे से ज्यादा 78 वार्ड कांग्रेस ने जीत लिए। शहरी इलाकों में वहां कांग्रेस के विधायक होने के बाद भी यह जीत साबित करती है कि कांग्रेस उस परिकल्पना को दरकिनार कर रही है, जिसमें कहा जाता रहा है कि भाजपा शहरों की पार्टी है।

दुर्ग-भिलाई में कांग्रेस की ऐसी जीत उसका आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए भी जरूरी थी, क्योंकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का यह गृह जिला है। बीरगांव भी रायपुर से लगा शहरी और औद्योगिक इलाका है। इसे भी कांग्रेस ने भाजपा से छीना है। यहां भाजपा की मेयर थी, लेकिन अब कांग्रेस 40 में से 19 सीट के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। भाजपा को यहां 10 वार्डों में विजय मिली है। कांग्रेस ने इन इलाकों में पिछले 3 सालों में क्या विकास किया या नहीं किया यह अलग विषय है, लेकिन यह जीत बता रही है कि लोग यह विश्वास कर रहे हैं कि कांग्रेस की सरकार आने वाले 2 सालों में विकास करेगी।

2018 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने ऐसा ही जश्न मनाया था।
2018 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने ऐसा ही जश्न मनाया था।

बस्तर और गांवों में चल गई गो धन योजना
गावों में कांग्रेस कैसे मजबूत हो रही है इसे प्रेमनगर नगर पंचायत का रिजल्ट साबित करता है। यहां 40 साल बाद कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा। कांग्रेस ने यहां की 15 में से 11 वार्डों में जीत हासिल की। भाजपा 2 में सिमट गई। बाकी 5 नगर पंचायत में भी कांग्रेस का इतना स्पष्ट बहुमत है कि बस्तर के भोपालपट्टनम में 15 के 15 वार्डों में और कोंटा में 15 में से 14 वार्डों में उसके प्रत्याशी जीत गए।

यहां के भैरमगढ़ में 15 में 12 और नरहरपुर में 15 में से 11 सीट जीत ली। मारो में भी कांग्रेस का अध्यक्ष होगा। इन 6 में पहले 2 नगर पंचायत में भाजपा का अध्यक्ष था, लेकिन अब कांग्रेस का होगा। पूरी तरह से ग्रामीण इन इलाकों में कांग्रेस की जीत के पीछे गोबर खरीदने की योजना, गौठान योजना की सफलता माना जा रहा है। 2 रुपए किलो में जो गोबर खरीदा जा रहा है, उसका पूरा पैसा ग्रामीणों को मिल रहा है। नरवा गरवा योजना भी सफल है। बस्तर में आदिवासियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, हाट बाजार क्लीनिक, वनोपज की खरीदी जैसी योजनाओं का असर भी इसे कहा जा सकता है। साथ ही पीसीसी चीफ मोहन मरकाम के बस्तर में सक्रिय रहना भी इस जीत के पीछे का एक कारण है।

किसानों के लिए योजनाओं का भी जीत में बड़ा रोल

कांग्रेस को गांवों की पार्टी कहा जाता है और छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे पूरी तरह ध्यान में रखा है। इसका नतीजा गांवों के साथ-साथ ऐसे इलाके जो आधे-शहरी, आधे ग्रामीण हैं उनमें भी कांग्रेस जीती है। 5 नगर पालिकाओं में जामुल में भाजपा जीती और खैरागढ़ में कांग्रेस-भाजपा दोनों के पास 10-10 सीटें हैं। बाकी तीनों पालिकाओं में कांग्रेस के अध्यक्ष बनेंगे। यहां के रिजल्ट भी बताते हैं कि किसानों के लिए न्याय योजना, बिजली हॉफ करना, महिला स्वसहायता समूहों का कर्ज माफ करना, मोर जमीन-मोर मकान योजना के जरिए पट्टे देना जैसी योजनाएं सफल हैं।

यह योजनाएं इन्हीं इलाकों में रहने वाले लोगों को टारगेट कर लागू की गई है। नए जिलों का निर्माण, नए डिविजन, तहसीलें बनाने का फर्क भी इस रिजल्ट में दिख रहा है, क्योंकि सबसे ज्यादा तहसीलें इन्हीं इलाकों में बनी है। इस तरह इस पूरे रिजल्ट पर कांग्रेस के रणनीतिकार यह कहकर अपनी पीठ ठोंक सकते हैं कि उनकी योजनाएं सही दिशा में है। अब देखना है कि इस जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी इससे निपटने के लिए क्या करती है।