राजपथ पर दिखेगा छत्तीसगढ़ का "गोधन':दिल्ली में 26 जनवरी की परेड के लिए गोधन न्याय योजना की झांकी को मंजूरी; 12 राज्यों की झांकियां दिखेंगी

रायपुरएक वर्ष पहले
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रक्षा मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के इसी मॉडल को झांकी के लिए मंजूरी दी है। - Dainik Bhaskar
रक्षा मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के इसी मॉडल को झांकी के लिए मंजूरी दी है।

छत्तीसगढ़ के गांव और गोठान अब गणतंत्र दिवस के मुख्य परेड में प्रदर्शित किए जाएंगे। सरकार की गोधन योजना पर आधारित झांकी इस बार राजपथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस के परेड का हिस्सा बनेगी। रक्षा मंत्रालय की उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति ने छत्तीसगढ़ की इस झांकी को अपनी हरी झंडी दे दी है।

इस समिति में देश के प्रमुख शिल्पज्ञ, पेंटर, फोटोग्राफर, संगीतकार, गायक और अन्य विधाओं के विशेषज्ञ शामिल थे। दो महीने से नई दिल्ली में चल रही चयन प्रक्रिया के विभिन्न दौर से गुजरते हुए छत्तीसगढ़ ने यह सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क आयुक्त दीपांशु काबरा ने बताया, विशेषज्ञ समिति ने आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर इंडिया-75 न्यू आईडिया की थीम घोषित की है। गोधन न्याय योजना को न्यू आइडिया के तौर पर चयनित किया गया है।

उन्होंने बताया, देश के सभी राज्यों में से केवल 12 राज्यों को ही इस बार राजपथ पर अपने राज्य की झांकी के प्रदर्शन का अवसर मिला है। गोधन न्याय योजना पर बनी छत्तीसगढ़ की झांकी की विशेषता है कि वह गांवों में उपलब्ध संसाधन और तरीकों को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत करती है। यह बताती है कि शहरी और गांवों की तकनीक को मिला लिया जाए तो विश्व की कई समस्याओं का समाधान हो सकता है।

ऐसी है इस बार छत्तीसगढ़ की झांकी
झांकी के अगले भाग में गाय के गोबर को इकट्ठा करके उसे बेचने के लिए गोठानों की ओर ले जाती महिलाओं को दर्शाया जाएगा। ये महिलाएं पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में होंगी। इन्हीं में से एक महिला को गोबर से उत्पाद तैयार कर बेचने के लिए बाजार ले जाते दिखाया जाएगा। महिलाओं के चारों ओर गोठानों में साग-सब्जियों और फूलों की खेती दिखाई जाएगी। नीचे की ओर गोबर से बने दीयों की सजावट की जाएगी। झांकी के पिछले हिस्से में गौठानों को रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क के रूप में विकसित होते दिखाया जाएगा।

झांकी में यह भी दिखेगा
इस झांकी मध्य भाग में गाय को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र में रखकर पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, पोषण, रोजगार और आय में बढ़ोतरी की बात दिखाई जाएगी। सबसे आखिर में चित्रकारी करती हुई ग्रामीण महिला को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक शिल्प और कलाओं के विकास की प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें प्रदेश में विकसित हो रही जल प्रबंधन प्रणालियों, बढ़ती उत्पादकता और खुशहाल किसान को भित्ति-चित्र शैली में दिखाया जाएगा। इसी क्रम में गोबर से बनी वस्तुओं और गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करती स्वम् सहायता समूहों की महिलाओं को भी झांकी में प्रदर्शित किया जाएगा।

क्या है सरकार की गोधन न्याय योजना
छत्तीसगढ़ में सरकार ने 2020 से गोधन न्याय योजना की शुरुआत की है। इसके तहत साढ़े सात हज़ार से अधिक गोठानों में 2 रुपए किलो की दर से गोबर खरीदा जा रहा है। स्वसहायता समूहों के माध्यम से उसका उपयोग विभिन्न उत्पादों को बनाने और स्वच्छता, क्लाइमेट चेंज और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने में किया जा रहा है। इस योजना को देशभर में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने के एक विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है।

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