छत्तीसगढ़ में CM के पिता को बेल:रायपुर कोर्ट के आदेश पर नंद कुमार जेल से रिहा, गिरफ्तारी के चौथे दिन लगाई थी जमानत याचिका

रायपुर3 महीने पहले
जेल से बाहर आने के बाद कुछ संगठनों ने नंद कुमार का फूल-मालाओं से स्वागत किया।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल को जमानत मिल गई है। शुक्रवार शाम को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। रायपुर जिला अदालत ने 10 हजार रुपए के बॉण्ड पर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। नंद कुमार बघेल को जातिगत मामले में टिप्पणी मामले में 3 दिन पहले 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। तब उन्होंने जमानत लेने से इंकार करते हुए जेल जाना कबूल किया था।

नंद कुमार की गाड़ी जेल परिसर में ले जाई गई और वहीं से वे गाड़ी में बैठकर निकल गए। मीडिया को उन तक नहीं पहुंचने दिया गया।
नंद कुमार की गाड़ी जेल परिसर में ले जाई गई और वहीं से वे गाड़ी में बैठकर निकल गए। मीडिया को उन तक नहीं पहुंचने दिया गया।

क्या कहा था नंद कुमार बघेल ने?
लखनऊ में पिछले महीने एक कार्यक्रम के दौरान नंद कुमार बघेल ने कहा था, अब वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा। हम यह आंदोलन करेंगे। ब्राह्मणों को गंगा से वोल्गा (रूस की एक नदी) भेजेंगे, क्योंकि वे विदेशी हैं। जिस तरह से अंग्रेज आए और चले गए। उसी तरह से ये ब्राह्मण या तो सुधर जाएं या फिर गंगा से वोल्गा जाने को तैयार रहें।

रायपुर के डीडी नगर थाने में FIR दर्ज कराई गई थी
सर्व ब्राह्मण समाज की शिकायत पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल के खिलाफ रायपुर के डीडी नगर थाने में केस दर्ज किया गया है। नंद कुमार पर सामाजिक द्वेष पैदा करने का आरोप है। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 505- समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावनाएं पैदा करने और धारा 153 ए के तहत सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला बयान देने का आरोप है।

रायगढ़ में भी ब्राह्मण समाज ने कार्रवाई को लेकर किया था प्रदर्शन
करीब 3 दिन पहले नंद कुमार बघेल के बयान से नाराज ब्राह्मण समाज ने रायगढ़ में उनका पुतला दहन किया था। FIR दर्ज करने की मांग को लेकर सिटी कोतवाली का घेराव कर दिया। घंटों चले हंगामे के बाद पुलिस ने समाज के लोगों से शिकायत ले ली थी और कार्रवाई का भरोसा दिया था। हालांकि तब मामला दर्ज नहीं किया गया।

विवादों से रहा है पुराना नाता
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल प्रदेश में अपने बयानों से लगातार विवादों में घिरते रहे हैं। हालांकि यह पहली बार है कि जब उन्हें जेल जाना पड़ा हो। वैसे तो वे पहले से ही ब्राह्मण विरोधी बयान देते रहे हैं, लेकिन पहला चर्चित विवाद 2001 में उनकी पुस्तक ‘ब्राह्मण कुमार रावण को मत मारो’ पर हुआ था।

इस किताब में उनका कहना था कि किताब मनु स्मृति, वाल्मिकी रामायण, रामचरितमानस और पेरियार की सच्ची रामायण की नए नजरिए से व्याख्या है। हालांकि इस किताब को प्रतिबंधित कर दिया गया। वे महिषासुर, रावण को महान योद्धा भी बता चुके हैं।

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