भास्कर पड़ताल:सिटी बसें बेमुद्दत बंद क्योंकि... ऑपरेटर ने दो-दो लाख मुआवजा मांगा, नाराज निगम ने अंतिम नोटिस भेज दी

रायपुरएक महीने पहले
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21 माह से बंद सिटी बसें चलें तो नए टर्मिनल के 200 की जगह 25 रुपए ही लगेंगे। - Dainik Bhaskar
21 माह से बंद सिटी बसें चलें तो नए टर्मिनल के 200 की जगह 25 रुपए ही लगेंगे।

21 महीने से राजधानी में खड़ी 67 सिटी बसों का किराया हाल में 25 फीसदी बढ़ाया गया और उम्मीद की जा रही थी कि पंडरी बस स्टैंड बाहर जाने के बाद सड़कों पर शहर के लोगों के लिए सिटी बसें शुरू हो जाएंगी, लेकिन अब यह मामला बेमुद्दत फंस गया है। सिटी बस वालों की किराया बढ़ने के बाद हर बस के लिए दो-दो लाख रुपए मुआवजा देने की मांग आई तो नगर निगम इससे नाराज हो गया है।

निगम कमिश्नर ने आपरेटर को बसें तुरंत शुरू करने का आखिरी नोटिस तो भेजा ही है, नए ऑपरेटर की तलाश भी शुरू कर दी है। इस विवाद में सिटी बसें अगले तीन-चार माह तक शुरू नहीं होने की आशंका है। यह आम शहरी पर ऐसे प्रभाव डाल रहा है कि उसे अभी शहर से नए बस टर्मिनल यानी रावांभाठा जाने-आने के लिए 200 से 300 रु. तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यह खर्च सिटी बसें चालू रहने से 25-30 रु. से अधिक नहीं होता। कोरोना संक्रमण की वजह से राजधानी में सिटी बसें 22 मार्च 2020 को बंद की गई हैं।

छोटी-बड़ी बसों को मिलाकर सिटी बसों की संख्या 67 है, जिनमें ज्यादातर छोटी और कुछ बड़ी भी हैं। कोरोना के हालात नार्मल हैं और परिवहन के लगभग सभी साधन शुरू कर दिए हैं, लेकिन सिटी बसें अब तक बंद हैं। सभी बसें सरकारी हैं, लेकिन नगर निगम इनका संचालन एक कंपनी बनाकर निजी आपरेटर से करवा रहा है। तीन माह पहले सिटी बसें शुरू करने की बात आई तो ऑपरेटर ने डीजल की मूल्यवृद्धि का हवाला देते हुए 65 फीसदी किराया बढ़ाने की मांग की थी, हालांकि शासन ने किराया 25 प्रतिशत बढ़ा भी दिया। बसें शुरू करने की बारी आई तो ऑपरेटरों की ओर से तर्क दिया गया कि करीब दो साल से खड़ी रहने की वजह से बसें के टायर-ट्यूब और बैटरी से लेकर कई उपकरण फेल हैं। ऐसे में एक तो बसों का टैक्स माफ होना चाहिए, दूसरा बसों को चालू करने के लिए छोड़ी बस पर 2 लाख और बड़ी बस पर 3 लाख रुपए मुआवजा सरकार को देना चाहिए।

इस शर्त से नगर निगम ने त्योरियां चढ़ा ली हैं और निगम कमिश्नर की ओर से ऑपरेटर को बसें चालू करने के लिए नोटिस थमा दी गई है। अफसरों ने अब साफ कर दिया है कि इस ऑपरेटर को टर्मिनेट कर दिया जाएगा और नया ऑपरेटर ढूंढकर बसें उससे चलवाएंगे। इस प्रकिया में दो से छह माह तक लग सकते हैं। यही नहीं, निगम और आपरेटर में एग्रीमेंट हैं। अगर आपरेटर को टर्मिनेट किया गया तो जानकारों के मुताबिक वह कोर्ट चला जाएगा। कुल मिलाकर रायपुर में अगले काफी अरसे तक सिटी बसें चालू होने के आसार नहीं हैं।

आम लोग : रावांभाठा टर्मिनल महंगा पड़ा
सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को है। बलौदाबाजार हो या बिलासपुर से आने वालों को शहर से रांवाभाठा जाने के लिए ऑटो वालों को भारी किराया देना पड़ रहा है। जयस्तंभ चौक, पंडरी, देवेंद्रनगर, शंकरनगर आदि जगहों से भी ऑटो वाले रांवाभाठा तक जाने के लिए 150 से 300 रु. तक वसूल कर रहे हैं। शहर के सबसे दूर वाले स्टाॅप तक भी सिटी बसों का किराया 25-30 रुपए से ज्यादा नहीं था।

ऑपरेटर : हर बस की मरम्मत जरूरी
सिटी बस ऑपरेटर का कहना है कि 2 साल से बंद सिटी बसों को फिर से सड़क पर लाने के लिए गाड़ी की सर्विसिंग करनी होगी। इंजन ऑइल, ब्रेक ऑइल, बैट्री, चक्के और वायरिंग को फिर से बदलना होगा। इसके लिए अतिरिक्त खर्चा आएगा। ऑपरेटर के पास अभी 67 बसें हैं। इसलिए इन बसों की मरम्मत के लिए करीब 2 करोड़ चाहिए। इसके अलावा बसों पर लगभग 30 लाख का टैक्स भी बकाया है।

निगम : बसों से आमदनी हो गई बंद
निगम को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। प्रशासन ने एक सिटी 28 से 30 लाख में खरीदी थी। सिटी बस आपरेटर निगम को एक महीने में में एक बस का 5500 रु. किराया देता था। इसके बदले में निगम ने आपरेटरों को डिपो दिया है। निगम को पैसे नहीं मिल रहे, इसलिए वह भी ऑपरेटर को राहत नहीं दे रहा है। हालांकि ऑपरेटर को चेतावनी दी गई है कि सुरक्षा निधि भी जब्त कर ली जाएगी, जो करोड़ों में है।

सिटी बस ऑपरेटर को अंतिम नोटिस जारी कर दी है। इसके बाद ऑपरेटर को टर्मिनेट कर देंगे। नया एग्रीमेंट कर नए ऑपरेटर से सिटी बसें चलवाएंगे। लोगों को परेशान नहीं होने देंगे।
-प्रभात मलिक, कमिश्नर नगर निगम

गाड़ियों की सुरक्षा निधि के नाम पर 2 करोड़ से ज्यादा जमा करवाए हैं। बसों की हालत ऐसी है कि बिना मरम्मत शुरू नहीं होंगी। स्कूल बसों का टैक्स माफ किया तो हमारा क्यों नहीं?
-सैय्यद अनवर अली, सिटी बस ऑपरेटर

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