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सनसनीखेज ठगी:बिहार की बिजली कंपनी और रोड कॉर्पोरेशन के चेक की क्लोनिंग, ठग ने बैंक से निकाले 3.60 करोड़

रायपुर2 महीने पहले
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  • प्रबंधक पर भी शक, पौने 4 करोड़ कंपनी को सूचना दिए बिना कर दिया पेमेंट

बिहार की बिजली कंपनी और रोड डेवलपर्स कॉर्पोरेशन के फर्जी चेक से ठगों ने टाटीबंध के केनरा बैंक से 3.60 करोड़ की सनसनीखेज ठगी कर ली। बैंक में दोनों कंपनियों के जो चेक जमा किए गए हैं, उन नंबरों के चेक दोनों सरकारी दफ्तरों में सुरक्षित रखे हैं और यहां ठगों ने उन्हीं चेक से पैसे निकाल लिए। पुलिस को शक है कि चेक की क्लोनिंग की गई।

उसके बाद चेक का क्लोन बैंक में जमा किया गया। बैंक से इतनी बड़ी ठगी का भंडाफोड़ होने के बाद खासी खलबली मची है। शुक्रवार को बैंक प्रबंधन की ओर से पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करायी गई। केनरा बैंक प्रबंधन के कुछ जिम्मेदार भी जांच के घेरे में हैं। पुलिस ने ठगी के साथ साजिश और जाली दस्तावेज तैयार करने के आरोप में अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। आला अफसर भी हैरान हैं कि इतनी बड़ी रकम किसी एक व्यक्ति को कैसे जारी कर दी गई। पैसे देने के पहले एक बार भी सरकारी कंपनी के अफसरों से संपर्क तक नहीं किया। पुलिस ने बैंक से पैसे निकालने वाले के फुटेज मांगे हैं।

आमानाका टीआई भरत बरेठ ने बताया कि केनरा बैंक में के. भानूमूर्ति एजीएम है। उन्होंने जो रिपोर्ट दर्ज करायी है उसके अनुसार सुहास हरिशचंद्र काले ने बैंक में फर्जी चेक लगाकर 3.60 करोड़ निकाले हैं। काले ने बैंक प्रबंधन को बताया था कि वह विष्णु लक्ष्मी लैंड डेवलपर्स और रायपुर बिल्डर्स का डायरेक्टर है। उसने बैंक प्रबंधन को ये जानकारी भी दी कि उसका साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड(एसबीपीडीसीएल)और बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड(बीएसआरडीसीएल)से अनुबंध है। उसने सवा महीने में दोनों सरकारी विभाग के 7 चेक बैंक में जमा किए और कैश निकाल लिए। उसने जो चेक जमा किया है, वह बिहार के दोनों सरकारी विभाग के चेक की हुबहू कॉपी है।

ऐसे फूटा मामला
बिहार की बिजली कंपनी और रोड डेवलपर्स कार्पोरेशन के खाते से पैसे निकलने लगे तब वहां के अधिकारियों ने बैंक से जानकारी मांगी। अफसरों ने बैंक से पूछा कि ये पैसे कैसे निकल रहे हैं। किस आधार पर पेमेंट किया जा रहा है। बैंक ने उन 7 चेक की काॅपी दोनों दफ्तरों को भेज दी, जिनके माध्यम से पैसे भेजे गए थे। उन्होंने रायपुर की दो कंपनी का नाम बताया, जिसने पैसा निकाला है। सरकारी कंपनी के अधिकारियों ने केनरा बैंक के प्रबंधन को बताया कि उनकी ओर से फिलहाल रायपुर की किसी कंपनी को चेक जारी नहीं किया गया है। ये जानकारी भी दी गई कि जिस नंबर का चेक बैंक में जमा किया गया है वह

प्लानिंग के साथ खोला खाता, 15 दिन बाद निकाला पैसा
पुलिस के अनुसार सुहास हरिशचंद्र काले ने पूरी प्लानिंग के साथ मार्च में टाटीबंध स्थित केनरा बैंक में खाता खोला। 8 मार्च को बैंक में उसका खाता खुला। लोकल एड्रेस के तौर पर उसने देवेंद्र नगर के एक मकान का किरायानामा बैंक में जमा किया। उसने पंडरी में अपने कंपनी का ऑफिस बताया और उसके भी दस्तावेज जमा किए। खाता खुलने के 15 दिन बाद उसने पहला चेक रोड डेवलपर्स कार्पोरेशन के नाम से जमा किया। इस चेक से उसने 48 लाख कैश निकाले। उसके बाद वह थोड़े-थोड़े दिन के अंतराल में चेक जमा करता रहा। 5 मई तक 7 चेक लगाए और पौने चार करोड़ रुपए निकाल लिए।
ऑफिस में है।

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