उदयपुर कांड पर CM भूपेश की दो टूक:कहा-धार्मिक उन्माद में ऐसा करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए

रायपुर5 महीने पहले
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर में हुई हत्या की घटना की कड़ी निंदा की है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजस्थान के उदयपुर में युवक के हत्या की निंदा की है। उन्होंने रायपुर में कहा, ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। धार्मिक उन्माद में ऐसी घटना करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

रायपुर पुलिस ग्राउंड हेलीपैड पर पत्रकारों से चर्चा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, उदयपुर घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा, राजस्थान सरकार को इसमें लगा कि कुछ और संगठनों का हाथ हो सकता है, विदेश का भी हाथ हो सकता है। जैसे ही उनको इनपुट मिला तुरंत ही उन्हाेंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर NIA को जांच सुपुर्द किया है। अब यह जांच का विषय है, लेकिन अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री तीन दिन के कोरिया प्रवास से गुरुवार को वापस लौटे हैं।

राजस्थान के उदयपुर में दो हत्यारों ने 28 जून को एक दर्जी कन्हैया लाल की हत्या कर दी थी। हत्यारों ने इसका वीडियो भी बनाया। घटना के करीब चार घंटे बाद पुलिस ने दोनों हत्यारों को पकड़ लिया। अब वे दोनों NIA की कस्टडी में हैं। इस घटना को लेकर देश भर में माहौल गर्म होता दिख रहा है। बस्तर संभाग के कई जिलों में हिंदू संगठनों ने बंद का आह्वान किया है। कई संगठन रायपुर में भी प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

कहा-भाजपा हर जगह विपक्ष की सरकार गिराने में लगी हुई है

महाराष्ट्र में राजनीतिक उलटफेर को लेकर हुए एक सवाल पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, हम लोग पहले से आशंका व्यक्त कर रहे थे कि भाजपा, विपक्ष को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। इसलिए वह साम, दाम, दंड, भेद के माध्यम से सरकार गिराने में लगी है। उसमें उनको सफलता मिली है। अब इसमें भाजपा को जश्न मनाने की क्या जरूरत है। शिवसेना के लोग बागी हुए थे। उसके कारण मुख्यमंत्री ने वहां इस्तीफा दिया। भाजपा का असली चेहरा अब सामने आया है। क्या उन्होंने खेल खेला और उसका क्या असर हुआ। भाजपा हर स्तर पर लगी हुई है, विपक्ष की सरकार गिराने में। महाराष्ट्र में उसे सफलता मिली है। मैं नहीं समझता हूं कि प्रजातंत्र के लिए यह उचित है।

केवल सरकार गिराने के लिए घेरेबंदी

मुख्यमंत्री ने कहा, अगर सरकार से कोई विधायक नाराज हो, कोई गुट नाराज हो और उसके बाद कोई बदलाव हो तो समझ में आता है। यहां तो सरकार गिराने के उद्देश्य से घेराबंदी करे, बाड़ेबंदी करे, विधायकों की खरीद-फरोख्त करे। वह राजस्थान की बात हो, मध्य प्रदेश की बात हो, गोवा की बात हो, कर्नाटक की बात हो, चाहे नार्थ-ईस्ट में हो या अब महाराष्ट्र में। महाराष्ट्र में तो लगातार ये लोग कर ही रहे थे। सब उसके मंत्री, विधायकों की धरपकड़ कर ही रहे थे। यह उचित तो नहीं है।

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