• Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Raipur
  • Coal Kept But Not Picked Up, Hence The Shortage, 1.20 Lakh Tonnes More Supply Daily From Chhattisgarh To Get The Country Out Of Power Crisis

राज्यों ने समय पर डिमांड नहीं भेजी:कोयला था पर उठाया नहीं इसलिए कमी, बिजली संकट से उबारने छत्तीसगढ़ से रोज 1.20 लाख टन ज्यादा सप्लाई

रायपुर4 महीने पहलेलेखक: देवेंद्र गोस्वामी/ प्रशांत गुप्ता
  • कॉपी लिंक
मांग के अनुरूप कोयला आपूर्ति नहीं होने से देश के कई राज्य बीते 15 दिनों से बिजली संकट से जूझ रहे हैं। - Dainik Bhaskar
मांग के अनुरूप कोयला आपूर्ति नहीं होने से देश के कई राज्य बीते 15 दिनों से बिजली संकट से जूझ रहे हैं।

देश के कई राज्य बीते 15 दिनों से बिजली संकट गहराता जा रहा है। स्थिति यह है कि राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और बिहार समेत 16 राज्यों की सरकारों ने 2 से 10 घंटे तक बिजली कटौती शुरू कर दी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि मांग के अनुरूप कोयला आपूर्ति नहीं हो रही है। भास्कर टीम ने पड़ताल की कि आखिर देश में इतना बड़ा संकट अचानक कैसे आया? यह बात सामने आई कि लगभग सभी राज्यों ने कोल इंडिया को समय पर (जरूरत से 1 माह पहले) मांग नहीं भेजी।

यही नहीं, कई राज्यों ने निर्धारित समय पर कोयले का उठाव भी नहीं किया। तापमान अचानक बढ़ने से राज्यों में बिजली खपत इतनी तेजी से बढ़ी कि कोयला कम पड़ने लगा और अचानक संकट खड़ा हो गया। यह बात भी सामने आई कि अगले दो माह तक यह संकट बना रह सकता है।

छत्तीसगढ़ से राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, पंजाब और छत्तीसगढ़ की बिजली कंपनी को कोयले की सप्लाई की जा रही है। भास्कर के इन्वेस्टिगेशन में यह बात सामने आई कि राज्यों की बिजली कंपनियों के साथ कोल इंडिया का सालाना अनुबंध होता है। इसके अनुसार राज्यों को हर महीने निर्धारित कोयले का उठाव करना ही है, लेकिन यही नहीं किया गया। कई राज्यों पर कोल इंडिया से कोयले का उठाव न करने पर जुर्माना भी लगा है। कुछ राज्यों ने कोयले की खरीदी का कोल इंडिया को भुगतान भी नहीं किया है।

आंकड़ों के अनुसार यह बकाया राशि 2000 करोड़ रुपए से अधिक है। इन सब वजहों से राज्यों ने कोयला संकट का मुद्दा उठाया, मगर सच्चाई यही है कि सभी राज्य आने वाले 3-4 महीनों में कोयले की आवश्यकता आकलन करने में चूक गए। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कोयले की कोई कमी नहीं है। संकट को टालने खदानों में उत्पादन बढ़ा दिया गया है। सभी कोल फील्ड में रोजाना हाईपावर मीटिंग से लेकर केंद्रीय मंत्री, सचिव और अधिकारी दौरे कर रहे हैं।

कोयला संकट इसलिए भी बढ़ा
भास्कर पड़ताल में सामने आया कि देश में कोयले के उत्पादन के अतिरिक्त सालाना 200 मिलियन टन कोयला इंडोनेशिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया से आयात होता था। मगर, अक्टूबर 2021 से इन देशों से आयात कम होना शुरू हुआ और आज स्थिति यह है कि सप्लाई पूरी तरह से प्रभावित है। अब पूरी निर्भरता कोल इंडिया पर ही है।

छत्तीसगढ़ से औसत से दोगुनी सप्लाई
एसईसीएल के बिलासपुर स्थित मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक औसतन 2.50 लाख टन कोयला का उत्पादन होता है। मगर, अप्रैल के पहले हफ्ते में यह मांग 3.70 लाख टन प्रतिदिन से बढ़ते हुए, 28 अप्रैल को 4.63 लाख टन प्रतिदिन तक जा पहुंची है। जो एसईसीएल की स्थापना (1987) से लेकर अब तक सर्वाधिक है। अफसरों के अनुसार कोल इंडिया द्वारा 5 लाख टन प्रतिदिन आपूर्ति करने की बात कही गई है। हालांकि यह अभी संभव नजर नहीं आ रहा है।

गेवरा-दीपका खदानों से लाइव रिपोर्ट

एक मालगाड़ी भरती नहीं और दूसरी कतार में
भास्कर टीम 28 अप्रैल को एसईसीएल अंतर्गत आने वाली कोरबा स्थित गेवरा और दीपका माइन्स पहुंची। यहां आम दिनों की तुलना में हलचल तेज है, क्योंकि लगातार कोल इंडिया के अफसरों के दौरे हो रहे हैं। दिल्ली से अधिकारी पहुंचकर उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। यहां एक मालगाड़ी कोयले से भरती नहीं है कि दूसरी ट्रैक पर लोडिंग के लिए पहुंच जाती। दीपका माइन्स में कोयले की खुदाई कर इसे कन्वेयर बेल्ट से 3 किमी दूर ऊपर पहुंचाया जाता है, जहां मालगाड़ियां खड़ी होती हैं। एक मालगाड़ी में 46 रैक होते हैं।

प्रत्येक में 62 टन कोयला ऑटोमेटिक सिस्टम के जरिए भरा जाता है। एक घंटे में पूरी मालगाड़ी भरकर रवाना की जा रही है। स्थिति यह है कि मालगाड़ियों से कोयला ढुलाई चल ही रही है, कुछ राज्यों ने संकट टालने के लिए ट्रक भी लगा दिए हैं। कोयला निकालने वाली कंपनी ने भी अपने कर्मचारियों की संख्या और काम के घंटे बढ़ा दिए हैं। छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। रात-दिन काम जारी है। सभी का एक ही उद्देश्य है कि संकट को खत्म किया जा सके।

7 राज्यों को रोशन कर रहा छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ की खदानों से सामान्य दिनों में देशभर के कोयले में हिस्सेदारी 23 प्रतिशत, लेकिन इस संकट में बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ के बाद ओडिशा स्थित महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड से भी सप्लाई हो रही है। साल 2022-23 में छत्तीसगढ़ की खदानों से देश में सर्वाधिक 182 मिलियन टन कोयला आपूर्ति होगी। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ वर्तमान में सात राज्यों को रौशन कर रहा है।

संकट को ऐसे समझें

  • देशभर में 165 पॉवर प्लांट, इनमें से 105 में कोयला नॉर्मल स्टॉक से कम।
  • फरवरी में बिजली खपत 1,79,098 मेगावॉट, आज 1,91,834 मेगावॉट।
  • इंडोनेशिया-चीन से आयातित कोल पर आधारित पाॅवर प्लांट काम में नहीं।
  • उद्योग व गर्मी : 2019 की तुलना में देश में बिजली खपत 17 प्रतिशत बढ़ी।

छत्तीसगढ़ की भूमिका
23 लाख टन- देश में रोजाना मांग, बिजली उत्पादन के लिए
4.6 लाख टन- एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स) से रोजाना सप्लाई
05 लाख टन- देशभर में बिजली संकट के बीच एसईसीएल से की गई है मांग

रेलवे अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कोयला परिवहन में कर रहा है। सामान्य दिनों में 110 मालगाड़ियां रोज कोयला लेकर राज्यों के लिए रवाना होती थीं। यह संख्या 160 तक पहुंच गई है। -साकेत रंजन, सीपीआरओ-एसईसीआर

एसईसीएल के पास 16 मिलियन टन कोयले का स्टॉक पॉवर कंपनियों के लिए उपलब्ध है। अभी हम रोजाना 4.5 लाख टन उत्पादन किया जा रहा है। अप्रैल के हिसाब से यह बेहतर है। -डॉ. सनीष चंद्र, पीआरओ-एसईसीएल