भास्कर पड़ताल:रायपुर में बच्चों पर सर्दी-बुखार व निमोनिया का अटैक, सरकारी-निजी अस्पतालों में रोज हजार केस; 5% बच्चों को भर्ती करने की नौबत

रायपुर2 महीने पहले
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कालीबाड़ी अस्पताल... बेड पर दो बच्चे, गोद में तीसरा भी। - Dainik Bhaskar
कालीबाड़ी अस्पताल... बेड पर दो बच्चे, गोद में तीसरा भी।

राजधानी में मौसम के बदलाव से बच्चों में सर्दी-बुखार और निमोनिया के मामले बुरी तरह बढ़े हैं। राजधानी में आधा दर्जन सरकारी और 50 से ज्यादा निजी अस्पतालों के ओपीडी में सर्दी-खांसी और वायरल या फिर निमोनिया से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं। भास्कर की पड़ताल तथा डॉक्टरों के अनुमान के मुताबिक ऐसे बच्चों की संख्या रोजाना एक हजार से कम नहीं है।

वायरल या निमोनिया पीड़ित बच्चों की संख्या इतनी बढ़ी है कि आईसीयू के एक-एक बेड में दो या ज्यादा बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। बच्चों के डॉक्टरों का कहना है कि वायरल के साथ-साथ बैक्टीरियल निमोनिया के मामले भी आ रहे हैं। इनमें से कुछ बच्चों में निमोनिया के संक्रमण ने फेफड़ों को भी प्रभावित किया है।

राहत सिर्फ यही है कि अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों की कोरोना जांच हो रही है, लेकिन उनमें कोविड नहीं निकल रहा है। कालीबाड़ी में डॉक्टर अंबेडकर अस्पताल के कोरोना काल में शिफ्ट हुए पीडियाट्रिक वार्ड में इस वक्त तीस से अधिक बच्चे भर्ती हैं। जिनमें से 20 से ज्यादा बच्चों का इलाज पीआईसीयू में चल रहा है।

ज्यादातर बच्चों में सर्दी-खांसी बुखार ही कॉमन बीमारी के रूप में सामने आ रहा है। जो कि स्वाभाविक तौर पर मौसम बदलने के साथ देखा जाता है। हर दिन ओपीडी में आ रहे बच्चों में से करीब 5 फीसदी बच्चों को भर्ती कराने की नौबत आ रही है। राजधानी के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इस वक्त 250 से अधिक बच्चे भर्ती हैं।

बाहर फ्रंट ऑफिस में ही बच्चों के साथ पेरेंट्स
केस-1.
कोरोना काल में अंबेडकर अस्पताल के पीडियाट्रिक यूनिट को कालीबाड़ी स्थित सरकारी मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। भास्कर टीम जब यहां पहुंची तो कुछ अभिभावक बिस्तर नहीं मिलने के कारण पीडियाट्रिक यूनिट के बाहर ही बुखार से निढाल हो चुके बच्चों के साथ नजर आए। पीआईसीयू में भी एक बिस्तर पर दो से तीन बच्चे नजर आए। डॉक्टरों ने कहा कि छोटे बच्चे हों तो एक बेड में दो को एडजस्ट करने में कोई समस्या नहीं है। जानकारों के मुताबिक डेढ़ से दो साल के बच्चों में निमोनिया के मामले ज्यादा हैं। इसीलिए पीआईसीयू में उनके साथ पेरेंट्स भी हैं।

आयुर्वेदिक के 10 में 5 बेड फुल, रोज 50 बच्चे
केस-2.
राजधानी में आयुर्वेदिक कॉलेज में बनाए गए प्रदेश के बच्चों के पहले कोविड अस्पताल में करीब दो माह से नॉन कोविड बच्चों का इलाज किया जा रहा है। हर दिन ओपीडी में यहां कम से कम 50 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बीच में बच्चों में डेंगू के केस आने पर यहां डेंगू पीड़ित बच्चों का इलाज भी किया गया। फिलहाल यहां के पीआईसीयू में दस बिस्तरों में से पांच में बच्चे इलाजरत हैं। जिसमें से एक बच्चे का इलाज बीते 15 दिन से चल रहा है। दरअसल, ये निमोनिया की बहुत क्रिटिकल कंडीशन में अस्पताल में भर्ती हुआ था। इसके फेफड़े में मवाद जम गया था। इलाज से बच्चा ठीक हो रहा है।

  • कालीबाड़ी ओपीडी में रोजाना करीब 100 बच्चे आ रहे हैं। ज्यादातर ओपीडी में ही जांच और दवाइयों से ठीक हो रहे हैं। कुछ को भर्ती करने की नौबत आ रही है। - डॉ. शारजा फुलझेले, एचओडी-पीडिया, अंबेडकर अस्पताल
  • सर्दी-खांसी, बुखार, निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या ओपीडी में सामान्य दिनों में आने वालों से दोगुनी है। बुखार दो-तीन दिन में ठीक हो रहा है, खांसी में वक्त लग रहा है। - डॉ. कनक रामनानी, पीडियाट्रिशियन-अंबेडकर अस्पताल
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