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कार्रवाई:बूढ़ातालाब में एसटीपी नहीं बनाने पर भेल को नोटिस देने के बाद ठेका रद्द

रायपुर8 महीने पहले
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स्मार्ट सिटी ने दो साल की तयशुदा मियाद में बूढा़ तालाब का 18 करोड़ का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) नहीं बनाने के कारण बीएचईएल यानी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड नीरी को कानूनी नोटिस भेजकर ठेका रद्द कर दिया है। हालांकि तकनीकी तौर पर स्मार्ट सिटी इस लापरवाही के लिए भेल से हर्जाना भी वसूल कर सकता था, लेकिन केवल नोटिस देकर उसने एक तरह से बाकी लापरवाह ठेका एजेंसियों की तरह भेल को भी क्लीन चिट दे दी है। भास्कर ने जब पूरे मामले की तह तक जाकर पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। दरअसल, इस तालाब की सफाई के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का ठेका लेने के बाद भेल ने इस काम को एक अन्य एजेंसी को सौंप दिया। उस एजेंसी ने काम ही नहीं किया और दो साल तक 18 करोड़ के प्लांट का स्ट्रक्चर तक नहीं बन पाया। पड़ताल में पता चला है कि स्मार्ट सिटी ने ठेका लेने के बाद काम नहीं करने पर भेल एजेंसी पर कोई फाइन तक नहीं वसूला। इतना ही नहीं, इस मामले में भी एजेंसी को क्लीन चिट दे दी गई। स्मार्ट सिटी इस लापरवाही के लिए एजेंसी से 6 फीसदी तक का फाइन वसूल कर सकता था। अगर नियमों के तहत स्मार्ट सिटी के अधिकारी कार्रवाई करते तो स्मार्ट सिटी एक करोड़ से ज्यादा का हर्जाना वसूल कर सकती थी। लेकिन बाकी तमाम प्रोजेक्ट की तरह इस मामले में भी स्मार्ट सिटी ने दोस्ताना चेतावनी देकर एजेंसी को छोड़ दिया। स्मार्ट सिटी मिशन की गाइडलाइन के मुताबिक ऐसी कोई भी एजेंसी जो तय समय पर काम पूरा न करे या जानबूझकर किसी काम को अधूरा छोड़ दे उसको ब्लैकलिस्ट करने तक का नियम है।

एसटीपी के बर्बादी के बाद बदला प्लान
तालाब की सफाई को लेकर अब नीरी मॉडल भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि 4 करोड़ में जो काम हो सकता था, उसको लेकर आखिर 18 करोड़ बहाने की जरूरत ही क्यों की गई। स्मार्ट सिटी के अधिकारी एजेंसी को बरी करने के बाद अब इसके बारे में पूछे जाने पर बच रहे है। बूढ़ा तालाब एसटीपी की बर्बादी के बाद ही स्मार्ट सिटी ने छोटे पैमाने पर एसटीपी लगाने की नई योजना भी लाई है।

"बूढ़ातालाब की सफाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में रही है। मेरे द्वारा संज्ञान लेने के बाद ही काम नहीं करने वाली एजेंसी का ठेका रद्द किया गया, फाइन या कड़ी कार्रवाई की बात है तो ये स्मार्ट सिटी प्रबंधन ही कर सकता है। इसमें जनप्रतिनिधि कुछ नहीं कर सकते।"
-एजाज ढेबर, मेयर

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